संजय मांजरेकर ने औकिब नबी को नजरअंदाज करने पर उठाए सवाल, रणजी ट्रॉफी के महत्व पर भी दी प्रतिक्रिया!

पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ संजय मांजरेकर ने अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच के लिए जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज़ औकिब नबी को टीम में जगह न मिलने पर अजित अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति की कड़ी आलोचना की है।

उन्होंने औकिब को टीम में शामिल न किए जाने को “बेतुका” बताया और कहा कि अगर कोई गेंदबाज़ एक रणजी ट्रॉफी सीज़न में 60 विकेट लेने के बावजूद भारतीय टीम में जगह नहीं बना सकता, तो बीसीसीआई को देश की इस प्रतिष्ठित घरेलू प्रतियोगिता को बंद कर देना चाहिए।

अफगानिस्तान टेस्ट के लिए टीम घोषित होने के बाद पूर्व मुख्य चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर ने भी कहा था कि अगर खिलाड़ियों के प्रदर्शन का इनाम राष्ट्रीय टीम में चयन के रूप में नहीं मिलता, तो रणजी ट्रॉफी को खत्म कर देना चाहिए।

स्पोर्टस्टार के Insight Edge Podcast में मांजरेकर ने कहा, “मुझे वो पुराने दिन पसंद थे जब किसी खिलाड़ी के साथ बहुत बड़ा अन्याय होता था तो लोग सड़कों पर उतरकर विरोध करते थे। अब ज्यादातर गुस्सा सोशल मीडिया तक सीमित रह गया है। लेकिन यह ऐसा चयन न होना है जिसे मैं बिल्कुल समझ नहीं पा रहा। यह सच में हास्यास्पद है। जब मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज नहीं खेल रहे हैं, चाहे उन्हें आराम दिया गया हो या भविष्य की योजना हो, तो फिर रणजी ट्रॉफी रखने का क्या मतलब अगर ऐसे प्रदर्शन को नजरअंदाज किया जाएगा?”

औकिब नबी ने जम्मू-कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई थी और उन्हें टूर्नामेंट का ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया था।

मांजरेकर ने कहा कि जब जसप्रीत बुमराह, सिराज और शमी जैसे मुख्य तेज गेंदबाज़ टीम में नहीं हैं, तब भी औकिब को मौका न मिलना समझ से परे है।

उन्होंने आगे कहा, “यह भारतीय क्रिकेट के लिए शानदार कहानी थी कि जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी जीती, और यह वही खिलाड़ी था जिसने लगभग अकेले दम पर टीम को खिताब दिलाया। उसे चुनना तो बिल्कुल आसान फैसला होना चाहिए था और यह दुखद है कि वह टीम में नहीं है। मैं समझ सकता था अगर तेज गेंदबाज़ी की जगह बुमराह, सिराज और शमी ने भर रखी होती, तब शायद औकिब को मौका न मिलता। लेकिन यह फैसला मेरी समझ से बाहर है। क्रिकेट के नजरिए से भी यह सही फैसला नहीं है, क्योंकि जब आप उसका रिकॉर्ड टीम के कुछ अन्य खिलाड़ियों से तुलना करते हैं, तो साफ दिखता है कि उसके साथ बड़ा अन्याय हुआ है।”