
भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप से पहले टीम के तेज गेंदबाजों की लगातार चोटिल होने की समस्या पर गंभीर चिंता जताई है। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज गंवाने के बाद गिल ने साफ कहा कि अगर खिलाड़ी हर दूसरी या तीसरी सीरीज में चोटिल होते रहेंगे, तो विश्व कप जैसे लंबे टूर्नामेंट में लगातार मैच खेलना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
भारत को तीन मैचों की वनडे सीरीज में इंग्लैंड के हाथों 1-2 से हार का सामना करना पड़ा। रविवार को खेले गए निर्णायक तीसरे मुकाबले में टीम इंडिया 27 रन से मैच हार गई।
सीरीज शुरू होने से पहले ही तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या और नीतीश रेड्डी चोट के कारण बाहर हो गए थे। वहीं टी20 सीरीज के दौरान हर्षित राणा हैमस्ट्रिंग इंजरी का शिकार हो गए, जिसके चलते वह वनडे सीरीज नहीं खेल सके। दूसरे वनडे में वॉशिंगटन सुंदर को भी हैमस्ट्रिंग की समस्या हुई, जबकि निर्णायक मुकाबले से पहले जसप्रीत बुमराह इम्पैक्ट इंजरी के कारण टीम से बाहर हो गए।
इन लगातार चोटों पर प्रतिक्रिया देते हुए शुभमन गिल ने कहा, “हां, बिल्कुल। अगर आप उस टीम को देखें, जिसका हमने शुरुआत में ऐलान किया था, तो उसमें से कम से कम पांच खिलाड़ी इस मैच में नहीं खेल पाए। एक खिलाड़ी चोटिल होता है तो आपको अलग संयोजन बनाना पड़ता है, फिर दूसरा खिलाड़ी बाहर हो जाता है तो फिर बदलाव करना पड़ता है। लेकिन अगर हर मैच के बाद कोई न कोई खिलाड़ी उपलब्ध नहीं हो, तो कहीं न कहीं हम अपनी योजनाओं में पिछड़ जाते हैं।”
गिल ने कहा कि अगर भारत अगले साल दक्षिण अफ्रीका में होने वाले विश्व कप के फाइनल तक पहुंचता है, तो टीम को लगातार 11 मैच खेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों का बार-बार चोटिल होना बड़ी चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, “अगर हम विश्व कप को ध्यान में रखें, तो हमें लगातार 11 मैच खेलने होंगे। लेकिन यहां खिलाड़ी दो-तीन सीरीज भी लगातार नहीं खेल पा रहे हैं। इसका मतलब है कि कहीं न कहीं हमारे खिलाड़ी लगातार मैच खेलने की स्थिति में नहीं हैं और इस पर काम करने की जरूरत है।”
भारतीय कप्तान ने यह भी स्वीकार किया कि मैच वाले दिन सुबह किसी खिलाड़ी के अनफिट होने की जानकारी मिलना टीम प्रबंधन के लिए बेहद मुश्किल स्थिति पैदा कर देता है। हालांकि उन्होंने किसी खिलाड़ी का नाम नहीं लिया।
गिल ने कहा, “खिलाड़ी एक-दो मैच खेलते हैं और फिर अगर उन्हें कोई चोट या परेशानी हो जाती है, तो हमें मजबूरी में टीम का संयोजन बदलना पड़ता है। जब मैच की सुबह पता चलता है कि कोई खिलाड़ी पूरी तरह फिट नहीं है, तो फैसला लेना काफी मुश्किल हो जाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई खिलाड़ी सिर्फ 80 प्रतिशत फिट है और आप पांच गेंदबाजों के साथ उतर रहे हैं, तो जोखिम लेना आसान नहीं होता। लेकिन मुझे लगता है कि टीम के तौर पर हमें अपनी फिटनेस और तैयारी के स्तर में सुधार करने की जरूरत है।”
भारत के लिए विश्व कप की तैयारियों के बीच खिलाड़ियों की लगातार चोटें अब टीम प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनती जा रही हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में खिलाड़ियों की फिटनेस और कार्यभार प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना भारतीय टीम की प्राथमिकता होगी।








