
कोलकाता नाइट राइडर्स के बॉलिंग कोच और मेंटर ड्वेन ब्रावो का मानना है कि मौजूदा IPL सीजन में वरुण चक्रवर्ती की शानदार वापसी का सबसे बड़ा कारण टीम का उन पर अटूट भरोसा रहा।
इस सीजन में KKR के निराशाजनक प्रदर्शन के बीच वरुण चक्रवर्ती टीम के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में रहे हैं। उन्होंने अब तक 10 विकेट लिए हैं और उनका इकॉनमी रेट नौ से कम रहा है।
ब्रावो ने कहा कि टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में खराब प्रदर्शन के बावजूद टीम ने कभी भी वरुण की काबिलियत पर सवाल नहीं उठाया।
दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मैच की पूर्व संध्या पर ब्रावो ने कहा, “खेल में सब कुछ नतीजों पर आधारित होता है और कई बार लोग बहुत भावुक हो जाते हैं। वरुण जैसे खिलाड़ी, जो विश्व स्तरीय स्पिनर हैं, अभी-अभी वर्ल्ड कप जैसे बेहद व्यस्त टूर्नामेंट से लौटे थे।”
उन्होंने कहा कि वरुण को सिर्फ सही समय पर ब्रेक की जरूरत थी, लेकिन उनकी क्षमता पर किसी को शक नहीं था।
ब्रावो ने कहा, “सही समय पर ब्रेक मिलना हमेशा जरूरी होता है। लेकिन किसी ने भी उनकी क्षमता पर सवाल नहीं उठाया क्योंकि जब आप इतने अच्छे खिलाड़ी होते हैं, तो सिर्फ समय की बात होती है कि आप दोबारा फॉर्म में लौट आएं।”
ब्रावो ने IPL जैसे लंबे और दबाव भरे टूर्नामेंट में मानसिक आराम की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि KKR ड्रेसिंग रूम ने मुश्किल दौर में वरुण को पूरा समर्थन दिया।
उन्होंने कहा, “पूरी टीम ने उनका साथ दिया और मानसिक ब्रेक भी बहुत जरूरी होता है, खासकर IPL जैसे टूर्नामेंट में जहां इतने सारे मैच, दबाव और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच मुकाबला होता है।”
“कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने बड़े खिलाड़ी हैं। इस सीजन में कई बड़े खिलाड़ी संघर्ष करते दिखे हैं और यही खेल की खूबसूरती है। खिलाड़ियों को ऐसे दौर से गुजरना पड़ता है, लेकिन आखिरकार वे वापसी करते हैं।”
टी20 क्रिकेट में डेथ ओवर्स की विविध गेंदबाजी के अग्रदूत माने जाने वाले ब्रावो ने स्लोअर बॉल की कला पर भी बात की और कहा कि सिर्फ गेंद फेंकना ही नहीं, बल्कि सही समय और परिस्थिति समझना ज्यादा जरूरी है।
ब्रावो ने कहा, “मैं काफी सक्रिय रहता हूं। हर कोई चाहता है कि मैं उन्हें अपनी स्लोअर बॉल सिखाऊं। यह मेरे खेल की सबसे बड़ी ताकतों में से एक थी। लेकिन मेरी असली ताकत मैच को पढ़ने और समझने की क्षमता थी। मैं खिलाड़ियों को यही चीज सबसे ज्यादा सिखाने की कोशिश करता हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “सिर्फ स्लोअर बॉल डालना ही काफी नहीं है। यह जानना भी जरूरी है कि कब डालनी है, किस बल्लेबाज को डालनी है और उससे पहले कैसी तैयारी करनी है। इन सभी बातों का महत्व है। स्लोअर बॉल के पीछे बहुत सोच और अभ्यास होता है। दिमाग सबसे महत्वपूर्ण चीज है।”








