
ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों को आखिरकार अमेरिका में प्रवेश के लिए वीजा मिल गया है, जबकि उनके पहले मैच में अब सिर्फ 10 दिन बाकी हैं। दोनों देशों के बीच जारी तनाव और संघर्ष के बीच यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को रॉयटर्स को इसकी पुष्टि की।
इससे पहले गुरुवार रात, मेक्सिको में ईरान के राजदूत अबोलफ़ज़ल पसंदीदेह ने कहा था कि राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को अब तक अमेरिका में प्रवेश के लिए वीजा नहीं मिला है। हालांकि बाद में व्हाइट हाउस के अधिकारी ने बताया कि खिलाड़ियों के वीजा रातोंरात मंजूर कर दिए गए।
हालांकि, ईरान की अर्ध-सरकारी फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार टीम के कुछ कोचिंग और प्रशासनिक स्टाफ के सदस्यों के वीजा अभी भी लंबित हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, “राष्ट्रीय टीम के कुछ तकनीकी और प्रशासनिक स्टाफ को अभी तक वीजा जारी नहीं किया गया है और अमेरिकी दूतावास ने अब तक उन्हें वीजा देने से इनकार किया है।”
हालांकि रिपोर्ट में किसी आधिकारिक स्रोत का नाम नहीं बताया गया।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव ने इस वर्ल्ड कप को राजनीतिक रंग भी दे दिया है। दोनों देश इस टूर्नामेंट को व्यापक कूटनीतिक संदेश देने के मंच के रूप में भी देख रहे हैं।
यह फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास का पहला अवसर होगा, जब कोई मेजबान देश ऐसे राष्ट्र का स्वागत करेगा जिसके साथ उसका वर्तमान में संघर्ष चल रहा है।
वीजा मिलने में हुई देरी और ईरान में बढ़ती इस भावना के कारण कि टीम को अमेरिका में कम से कम समय बिताना चाहिए, तेहरान ने अंतिम समय में टीम के बेस कैंप को एरिज़ोना (अमेरिका) से बदलकर तिजुआना (मेक्सिको) कर दिया है। टीम के रविवार सुबह तिजुआना पहुंचने की उम्मीद है।
ईरान अपनी ग्रुप G अभियान की शुरुआत 15 जून को लॉस एंजेलिस में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ करेगा। इसके बाद उसी शहर में उसका मुकाबला बेल्जियम से होगा, जबकि तीसरा ग्रुप मैच सिएटल में मिस्र के खिलाफ खेला जाएगा।








