इंग्लैंड में भारत की टी20 सीरीज हार की बड़ी वजहें क्या रहीं? पूर्व क्रिकेटरों ने बताई कमियां!

पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा का मानना है कि इंग्लैंड दौरे पर भारत की निराशाजनक टी20 सीरीज हार की मुख्य वजह मिडिल ऑर्डर की कमजोरी, अच्छे ऑलराउंडरों की कमी और बेहद खराब फील्डिंग रही।

हैरी ब्रूक की अगुआई वाली इंग्लैंड टीम ने साउथैम्प्टन में खेले गए पांचवें और अंतिम टी20 मुकाबले में भारत को 56 रन से हराकर सीरीज 4-0 से अपने नाम की। इसके साथ ही भारत को इंग्लैंड के खिलाफ पहली बार किसी द्विपक्षीय टी20 सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले भारत आयरलैंड के खिलाफ भी पहली बार 0-2 से टी20 सीरीज गंवा चुका था।

जियोहॉटस्टार पर बातचीत के दौरान पुजारा ने कहा, “इंग्लैंड के पास नंबर पांच, छह, सात और आठ पर ऐसे बल्लेबाज़ थे जिन्होंने अहम योगदान दिया। वहीं भारत की बात करें तो नंबर पांच पर तिलक वर्मा और नंबर छह पर शिवम दुबे थे, लेकिन उन्होंने इंग्लैंड के मिडिल ऑर्डर जितना योगदान नहीं दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “हाँ, टॉप ऑर्डर भी नाकाम रहा, लेकिन भारत के पास ऑलराउंडरों के मामले में पर्याप्त गहराई नहीं है और यह बहुत बड़ी चिंता की बात है। इसके अलावा टीम की फील्डिंग भी बेहद खराब रही।”

पुजारा ने कहा, “अगर युवा टीम बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी में अच्छा प्रदर्शन नहीं करती तो उसे कुछ हद तक स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन खराब फील्डिंग बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। छोटे प्रारूप में फील्डिंग ही मैच जिताती है। गलतियां होती हैं, लेकिन पूरी सीरीज में भारत की फील्डिंग बेहद खराब रही और यह सबसे बड़ी चिंता है।”

पूर्व भारतीय सहायक कोच अभिषेक नायर का मानना है कि पूरे दौरे में भारतीय बल्लेबाज़ों की शॉर्ट गेंदों के खिलाफ लगातार संघर्ष ने टीम को एक बड़ा सबक दिया है।

उन्होंने कहा, “यह सीरीज उनके लिए आंखें खोलने वाली साबित हुई है। आयरलैंड और अब इंग्लैंड में शायद ही ऐसा कोई टी20 मैच रहा हो, जहां विरोधी टीम ने लगभग हर बल्लेबाज़ को लगातार शॉर्ट गेंदों से निशाना बनाया हो।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे साफ पता चलता है कि इंग्लैंड भारत से बेहतर तैयारी के साथ उतरा था और सबसे अहम बात यह रही कि भारत परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में नाकाम रहा। मुझे लगता है कि ऑस्ट्रेलिया की परिस्थितियां अलग होंगी। भारत ने वहां हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है क्योंकि वहां गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आती है। इंग्लैंड जैसी स्पंजी बाउंस वहां नहीं होती।”

नायर ने कहा, “यह एक अच्छा वेक-अप कॉल है। इससे टीम को समझ आएगा कि विदेशों में जीतने के लिए क्या करना होगा। मुझे भरोसा है कि विश्व कप तक भारत कहीं अधिक तैयार टीम बनकर सामने आएगा। कई बल्लेबाज़ अब वापस जाकर शॉर्ट गेंदों पर तुरंत काम करना शुरू करेंगे।”

नायर ने नए कप्तान श्रेयस अय्यर का भी समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें समय और स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, “जब आप किसी ऐसे खिलाड़ी को विश्व चैंपियन टीम की कप्तानी सौंपते हैं, तो उसे अपनी टीम चुनने और अपनी सोच के अनुसार टीम बनाने की आजादी भी देनी चाहिए। पहली बार कप्तान बनने पर आपको यह कहने की छूट नहीं मिलती कि टीम को किस दिशा में ले जाना है।”

उन्होंने आगे कहा, “पहले आपको टीम को संभालना होता है और फिर यह समझना होता है कि उसमें क्या बदलाव करने हैं। इन दो सीरीज के बाद श्रेयस के पास सोचने का समय होगा कि उन्हें टीम से क्या चाहिए, टीम को किस तरह खेलाना है और सपोर्ट स्टाफ से क्या अपेक्षाएं हैं। इसलिए अभी यह कहना गलत होगा कि कप्तान के रूप में उनका भविष्य खतरे में है।”

नायर का मानना है कि श्रेयस अय्यर को टी20 टीम की दिशा तय करने की पूरी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह सीरीज निश्चित रूप से कठिन रही और लोग श्रेयस अय्यर पर उंगली उठा सकते हैं, लेकिन समझदारी इसी में है कि पहले यह जाना जाए कि उन्हें इस टीम से क्या चाहिए।”

“उन्हें यह एहसास दिलाइए कि यह उनकी टीम है, जैसे फिलहाल हैरी ब्रूक इंग्लैंड की टीम को अपना मानते हैं, या बेन स्टोक्स ने टेस्ट टीम के साथ किया, या रोहित शर्मा और विराट कोहली ने भारतीय टीम के साथ किया था।”

उन्होंने आगे कहा, “तभी उनके प्रदर्शन का सही आकलन किया जा सकेगा। जब शुभमन गिल पहली बार वनडे कप्तान बने थे, तब भी शुरुआती कुछ सीरीज नहीं जीत पाए थे। जैसे-जैसे समय बीतता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और कप्तान अपनी सोच के अनुसार टीम तैयार करता है। अभी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन टीम किस दिशा में जा रही है, इस पर स्पष्टता जरूर होनी चाहिए।”

भारतीय स्पिनरों के खराब प्रदर्शन पर नायर ने कहा, “अक्षर पटेल भारत के लिए इसलिए सफल रहे क्योंकि वह गेंद को अंदर की ओर ड्रिफ्ट करा पाते थे। लेकिन टी20 क्रिकेट में फॉर्म भी बहुत मायने रखती है। जब वह ड्रिफ्ट नहीं दिखती, तो इसका मतलब है कि या तो उनकी गेंदबाज़ी एक्शन में बदलाव है या फिर लगातार क्रिकेट खेलने का असर है।”

उन्होंने कहा, “अक्षर ने भारत के लिए लगातार कठिन ओवर डाले हैं, इसलिए अब इंग्लैंड के बल्लेबाज़ उन्हें निशाना बनाने लगे हैं। वह जल्द ही फॉर्म में लौटेंगे, लेकिन भारत ने भी अपने स्पिनरों के साथ निरंतरता नहीं दिखाई है। कुलदीप यादव विकेट लेते हैं, लेकिन उन्हें अंदर-बाहर किया जाता रहा है, जबकि वरुण चक्रवर्ती चोट के कारण पिछले कुछ महीनों से संघर्ष कर रहे हैं।”

नायर ने अंत में कहा, “साईराज बहुतुले और सपोर्ट स्टाफ को भविष्य को ध्यान में रखते हुए इन खिलाड़ियों के साथ काम करना चाहिए, न कि उन्हें बाहर कर देना चाहिए। खिलाड़ियों को साफ बताइए कि उनसे क्या उम्मीद है और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। जब आप हारते हैं, तब टीम के लिए दिशा तय करनी चाहिए, अराजकता नहीं पैदा करनी चाहिए।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।