यानिक सिनर ने अलेक्जेंडर ज्वेरेव को हराकर लगातार दूसरी बार जीता विंबलडन का खिताब!

विश्व नंबर-1 यानिक सिनर ने रविवार को विंबलडन फाइनल में अलेक्जेंडर ज्वेरेव को रोमांचक चार सेटों में हराकर लगातार दूसरी बार विंबलडन का खिताब अपने नाम कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने अपने करियर का पांचवां ग्रैंड स्लैम खिताब भी जीत लिया।

कुछ ही सप्ताह पहले फ्रेंच ओपन जीतने के बाद अपना पहला विंबलडन फाइनल खेल रहे ज्वेरेव ने शानदार शुरुआत करते हुए कड़े मुकाबले में पहला सेट टाई-ब्रेक में जीत लिया। हालांकि, इसके बाद यानिक सिनर ने अपना खेल और बेहतर किया तथा शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 6-7(7), 7-6(2), 6-3, 6-4 से अपने नाम कर लिया।

करीब तीन घंटे तक मुकाबला पूरी तरह बराबरी पर रहा, लेकिन तीसरे सेट में मैच का रुख बदल गया। ड्रॉप शॉट का पीछा करते हुए ज्वेरेव फिसलकर गिर पड़े। हालांकि उन्होंने खेल जारी रखा, लेकिन गिरने के बाद उनकी मूवमेंट पहले जैसी नहीं रही। इसका पूरा फायदा उठाते हुए यानिक सिनर ने मैच पर नियंत्रण बना लिया और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

24 वर्षीय यानिक सिनर, जिन्होंने पिछले साल कार्लोस अल्काराज़ को हराकर विंबलडन सिंगल्स खिताब जीतने वाले पहले इतालवी खिलाड़ी बनने का इतिहास रचा था, अब ओपन एरा में लगातार विंबलडन खिताब बचाने वाले सिर्फ 10वें पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं।

यह ज्वेरेव पर यानिक सिनर की लगातार 10वीं जीत भी रही, हालांकि इस बार जर्मन खिलाड़ी ने उन्हें पहले से कहीं अधिक कड़ी टक्कर दी। 29 वर्षीय ज्वेरेव 1991 में माइकल स्टिच के बाद विंबलडन खिताब जीतने वाले पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी बनने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन उनका सपना अधूरा रह गया।

फ्रेंच ओपन में निराशाजनक प्रदर्शन और विंबलडन के पहले दौर में मियोमिर केचमानोविच के खिलाफ कठिन मुकाबले के बाद यानिक सिनर की फॉर्म पर सवाल उठने लगे थे। लेकिन उन्होंने टूर्नामेंट के अंतिम चरण में शानदार प्रदर्शन कर सभी आलोचनाओं का जवाब दिया। सेमीफाइनल में उन्होंने नोवाक जोकोविच के खिलाफ अपनी सर्विस एक भी बार नहीं गंवाई थी और फाइनल में भी साबित कर दिया कि वह दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी क्यों हैं।

ट्रॉफी जीतने के बाद यानिक सिनर ने कहा, “टेनिस खेलने के लिए इससे बेहतर जगह कोई नहीं हो सकती।”

उन्होंने आगे कहा, “रविवार की सुबह जब आप उठते हैं, तो आपको पता होता है कि यह बेहद खास दिन है। आपको नहीं मालूम कि दोबारा यहां खेलने का मौका कब मिलेगा, इसलिए मैं ऐसे पलों को कभी हल्के में नहीं लेता।”

यानिक सिनर ने आगे कहा, “ऐसा मुकाबला खेलने के लिए दो खिलाड़ियों की जरूरत होती है। हमने दोनों ने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। मैं जीतकर बेहद खुश हूं, लेकिन जिस स्तर का टेनिस हमने खेला, उस पर भी मुझे गर्व है।”

पहला सेट बेहद उच्च स्तर का रहा। दोनों खिलाड़ियों ने दमदार शॉट लगाए और एक-दूसरे को बहुत कम मौके दिए। पहले 12 गेमों में केवल यानिक सिनर को ही एक ब्रेक पॉइंट मिला, लेकिन वह उसे भुना नहीं सके।

आखिरकार ज्वेरेव ने एक शानदार ऐस लगाकर सेट पॉइंट बचाया और टाई-ब्रेक जीतकर यानिक सिनर के खिलाफ उनकी लगातार 14 सेट जीतने की लय भी तोड़ दी।

दूसरे सेट की कहानी भी लगभग वैसी ही रही। ज्वेरेव अपनी सर्विस पर हावी रहे, लेकिन इस बार टाई-ब्रेक में यानिक सिनर ने शानदार खेल दिखाते हुए मुकाबला बराबरी पर ला दिया।

मैच का सबसे अहम मोड़ तीसरे सेट में आया। स्कोर 3-3 होने पर ज्वेरेव को मैच का पहला ब्रेक पॉइंट मिला, लेकिन यानिक सिनर के ड्रॉप शॉट का पीछा करते हुए वह बेसलाइन के पीछे फिसलकर गिर पड़े। यानिक सिनर तुरंत नेट पार कर उनका हालचाल जानने पहुंचे। ज्वेरेव ने खेल जारी रखा, लेकिन उनकी मूवमेंट पर चोट का असर साफ दिखाई दे रहा था।

इसके बाद यानिक सिनर ने अपनी सर्विस आसानी से बचाई और फिर पहली बार ज्वेरेव की सर्विस ब्रेक कर दी। निराश ज्वेरेव ने गुस्से में अपना रैकेट भी फेंक दिया, क्योंकि मुकाबला धीरे-धीरे उनके हाथ से निकलता जा रहा था।

चौथे सेट में ज्वेरेव ने वापसी की पूरी कोशिश की, लेकिन यानिक सिनर शांत रहे और एक बार फिर उनकी सर्विस ब्रेक कर 4-3 की बढ़त बना ली।

मुकाबले का अंत भी शानदार अंदाज में हुआ। यानिक सिनर ने 23 शॉट्स की रोमांचक रैली जीतकर मैच पॉइंट हासिल किया और फिर तीन घंटे 46 मिनट तक चले इस मुकाबले का अंत एक शानदार फोरहैंड विनर के साथ किया। इसके साथ ही यह उनके करियर की 100वीं ग्रैंड स्लैम मैच जीत भी बन गई।

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।