
शनिवार को सूर्यकुमार यादव की जगह भारत की टी20 टीम के कप्तान बनाए गए श्रेयस अय्यर ने 3 दिसंबर 2023 से 6 जून 2026 के बीच शायद किसी भी अन्य क्रिकेटर से अधिक उतार-चढ़ाव और बदलाव देखे हैं।
भारतीय क्रिकेट में 30 महीने तक टी20 टीम से बाहर रहने के बाद वापसी करना ही बेहद मुश्किल होता है, खासकर ऐसे प्रारूप में जहां खिलाड़ी अपनी जगह के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हों। ऐसे में कप्तान बनकर लौटना श्रेयस की कहानी को और भी असाधारण बना देता है।
तो आखिर इन वर्षों में 31 वर्षीय श्रेयस ने मुख्य कोच गौतम गंभीर और अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति को कैसे प्रभावित किया?
इसका जवाब शायद उनकी कठिन परिस्थितियों से लड़ने की जिद और लगातार आगे बढ़ते रहने की मानसिकता में छिपा है।
फरवरी 2024 में मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट न खेलने के कारण श्रेयस और झारखंड के ईशान किशन का बीसीसीआई केंद्रीय अनुबंध छिन गया था। उस समय दोनों खिलाड़ियों का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा था।
इसके अलावा उन्हें टी20 विश्व कप 2024, एशिया कप 2025 और टी20 विश्व कप 2026 जैसे बड़े टूर्नामेंटों की भारतीय टीम से भी बाहर रहना पड़ा। केंद्रीय अनुबंध वापस पाने में भी उन्हें लगभग एक साल लग गया।
लेकिन श्रेयस ने निराशा में डूबने या सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करने के बजाय अपने खेल और फिटनेस पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बल्लेबाजी में सुधार किया और उन चोटों से उबरने पर काम किया, जिनकी वजह से उन्हें कुछ समय के लिए लाल गेंद क्रिकेट से भी दूर रहना पड़ा था।
उनकी वापसी का पहला बड़ा संकेत 2024 आईपीएल में मिला, जब उन्होंने टीम मेंटर गौतम गंभीर के साथ मिलकर कोलकाता नाइट राइडर्स को उसका तीसरा आईपीएल खिताब दिलाया।
संभवतः इसी दौरान गंभीर को श्रेयस की सोच, कप्तानी क्षमता और मानसिक मजबूती को करीब से समझने का मौका मिला।
वैसे भी दोनों का रिश्ता नया नहीं था। 2018 आईपीएल के दौरान जब गंभीर ने दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) की कप्तानी छोड़ी थी, तब उन्होंने ही श्रेयस को अपना उत्तराधिकारी बनाने की सिफारिश की थी। इसलिए सोशल मीडिया पर उनके खराब संबंधों की चर्चाएं सिर्फ अफवाहें ही साबित हुईं।
हालांकि पिछले दो वर्षों में श्रेयस स्वयं भी काफी परिपक्व हुए हैं। अब वह व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम की जरूरतों को प्राथमिकता देना समझते हैं।
इस बात की पुष्टि रिकी पोंटिंग ने भी की थी, जिन्होंने दिल्ली कैपिटल्स और पंजाब किंग्स में श्रेयस के साथ लंबे समय तक काम किया है।
आईपीएल 2026 के दौरान पीटीआई से बातचीत में पोंटिंग ने कहा था, “वह अपने पूरे करियर के मुकाबले अब कहीं ज्यादा मैच्योर खिलाड़ी बन चुके हैं। इस समय वह अपने खेल पर पूरी तरह नियंत्रण में हैं। वह अपने जीवन और करियर के ऐसे दौर में हैं जहां अगर कप्तानी उनके पास आती है तो वह उसका पूरा फायदा उठाएंगे।”
पोंटिंग की यह प्रशंसा बेवजह नहीं थी।
पंजाब किंग्स के लिए खेलते हुए श्रेयस ने टी20 बल्लेबाज के रूप में अपने दो सर्वश्रेष्ठ आईपीएल सीजन खेले। 2025 में उन्होंने 604 रन बनाए और 2026 में 498 रन जोड़े। इस दौरान उनका औसत 50 से अधिक रहा और उन्होंने 11 अर्धशतक तथा एक शतक लगाया।
स्पिन गेंदबाजी के खिलाफ हमेशा से खतरनाक रहे श्रेयस ने अब तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी अपनी कमजोरी काफी हद तक दूर कर ली है। उनके खेल में शामिल हुआ दमदार पुल शॉट इसका सबसे बड़ा कारण है।
कप्तानी की दौड़ में उन्होंने संजू सैमसन, ईशान किशन और तिलक वर्मा जैसे दावेदारों को पीछे छोड़ दिया। संजू की प्रतिभा शानदार है, लेकिन उनकी निरंतरता पर सवाल उठते रहे हैं, जबकि ईशान और तिलक की नेतृत्व क्षमता अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परखी नहीं गई है।
हालांकि अब श्रेयस के सामने नई चुनौतियां होंगी।
आईपीएल टीम की कप्तानी और भारतीय टीम की कप्तानी में बहुत अंतर होता है। अब उनकी बल्लेबाजी, टीम चयन और टीम के प्रदर्शन पर कहीं ज्यादा बारीकी से नजर रखी जाएगी।
इस लिहाज से श्रेयस का नेतृत्व तक पहुंचना काफी दिलचस्प रहा है।
उनके कप्तानी कार्यकाल की शुरुआत इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ सीरीज से होगी, जहां उनकी बल्लेबाजी और कप्तानी दोनों की परीक्षा होगी।
इसके बाद फिलहाल कोई बड़ा टी20 टूर्नामेंट नहीं है क्योंकि भारतीय क्रिकेट का ध्यान अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप पर रहेगा। अगला टी20 विश्व कप 2028 में खेला जाएगा और श्रेयस के पास अपनी टीम तैयार करने और दीर्घकालिक रणनीति बनाने के लिए पर्याप्त समय होगा।
हालांकि उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी एक अरब क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदों पर खरा उतरना।
उनके पूर्ववर्ती रोहित शर्मा और सूर्यकुमार यादव भारत को टी20 विश्व कप जिता चुके हैं। अब श्रेयस से भी वही उम्मीदें की जाएंगी और छोटी से छोटी गलती भी आसानी से माफ नहीं होगी।
लेकिन इस साल आईपीएल में जब पंजाब किंग्स दूसरे हाफ में लड़खड़ा गई और प्लेऑफ में जगह नहीं बना सकी, तब भी कप्तान के रूप में श्रेयस का शांत और संतुलित स्वभाव देखने को मिला।
वह सफलता और असफलता का बोझ अपने दिमाग पर नहीं रखते। उनका पूरा ध्यान सिर्फ वर्तमान पर रहता है और हर दिन जीतने की कोशिश पर केंद्रित रहता है।
यही गुण अब उनकी भारतीय टी20 कप्तानी की सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकता है।








