
रूस की युवा टेनिस स्टार मीरा एंड्रीवा ने शनिवार को फ्रेंच ओपन महिला एकल फाइनल में पोलैंड की क्वालीफायर माजा ख्वालिंस्का को सीधे सेटों में हराकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया।
19 वर्षीय एंड्रीवा ने फाइनल में ख्वालिंस्का को 6-3, 6-2 से हराया और रोलां गैरो (Roland Garros) की सबसे युवा महिला एकल चैंपियन बन गईं। उनसे पहले 1992 में मोनिका सेलेस ने 18 वर्ष की उम्र में यह खिताब जीता था।
इस जीत के साथ एंड्रीवा 2005 के बाद जन्मी पहली खिलाड़ी (पुरुष या महिला) बन गई हैं जिन्होंने कोई ग्रैंड स्लैम खिताब जीता हो। यह उनका पहला मेजर खिताब है। अब प्रतिष्ठित कूप सुज़ान लेंगलेन ट्रॉफी उनकी ट्रॉफी कैबिनेट की सबसे बड़ी उपलब्धि बन गई है, जिसमें पहले से दो WTA 1000 खिताब शामिल हैं।
मैच के बाद एंड्रीवा ने कहा, “मैं बचपन से टीवी पर रोलां गैरो देखती आई हूं। इस टूर्नामेंट को जीतना मेरा बहुत बड़ा सपना था और मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा कि यह ट्रॉफी मेरे हाथों में है।”
उन्होंने अपनी टीम और विशेष रूप से अपने मनोवैज्ञानिक (साइकोलॉजिस्ट) का धन्यवाद किया।
साथ ही उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी माजा ख्वालिंस्का की भी तारीफ करते हुए कहा, “माजा को इन शानदार तीन हफ्तों के लिए बधाई। क्वालीफायर से आकर इतने मैच जीतना और इतने बड़े खिलाड़ियों को हराना आसान नहीं था।”
हालांकि फाइनल में हार के साथ ख्वालिंस्का का ऐतिहासिक अभियान समाप्त हो गया, लेकिन उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया।
क्वालीफायर से शुरुआत करने वाली ख्वालिंस्का ने पेरिस में लगातार 9 मैच जीते और ओपन एरा में फ्रेंच ओपन फाइनल तक पहुंचने वाली पहली क्वालीफायर बनीं।
हार के बाद उन्होंने कहा, “मैं इन तीन हफ्तों को कभी नहीं भूलूंगी। पेरिस हमेशा मेरे दिल में रहेगा।”
विश्व रैंकिंग में 114वें स्थान पर मौजूद ख्वालिंस्का अब सीधे 21वें स्थान पर पहुंच जाएंगी और भविष्य में बड़े टूर्नामेंटों में नियमित रूप से खेलने का मौका मिलेगा।
उन्होंने मजाकिया अंदाज में एंड्रीवा से कहा, “मीरा, तुम्हें बधाई। तुम बेहद प्रतिभाशाली हो और इतनी कम उम्र में इतनी अच्छी खिलाड़ी होना थोड़ा परेशान करने वाला है।”
“काश दर्शकों को आज इससे बेहतर मुकाबला देखने को मिलता, लेकिन मीरा मेरे लिए बहुत ज्यादा मजबूत साबित हुईं।”
फाइनल की शुरुआत दोनों खिलाड़ियों के लिए दबाव भरी रही। तेज हवा के बीच शुरुआती चार गेम लगातार सर्विस ब्रेक में बदले।
हालांकि इसके बाद एंड्रीवा ने खुद को बेहतर तरीके से संभाला और लगातार तीन गेम जीतकर मैच पर पकड़ बना ली।
पहले सेट में बढ़त बनाने के बाद उन्होंने दूसरे सेट में भी आक्रामक खेल जारी रखा। ख्वालिंस्का ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन एंड्रीवा ने कोई मौका नहीं दिया और सीधे सेटों में मुकाबला अपने नाम कर लिया।
अंतिम गेम जीतते ही एंड्रीवा भावुक हो गईं और कोर्ट पर घुटनों के बल बैठ गईं।
इस जीत के साथ एंड्रीवा ने अपनी कोच कॉन्चिता मार्टिनेज के रोलां गैरो में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (2000 की रनर-अप) को भी पीछे छोड़ दिया।
पुरस्कार समारोह में उन्होंने मजाक करते हुए कहा, “मैरी पियर्स, मुझे नहीं पता कि मुझे आपका धन्यवाद करना चाहिए या नहीं, क्योंकि आपने यहां फाइनल में मेरी कोच कॉन्चिता को हराया था। लेकिन मैं मजाक कर रही हूं, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!”
इस ऐतिहासिक जीत के साथ मीरा एंड्रीवा ने टेनिस जगत में अपनी जगह और मजबूत कर ली है और अब उन्हें भविष्य की सबसे बड़ी स्टार्स में गिना जा रहा है।








