संजय मांजरेकर ने कहा, विराट कोहली ‘आलोचना को लेकर बहुत संवेदनशील’ हैं!

विराट कोहली ने कई बार कहा है कि वह बाहरी शोर पर ध्यान नहीं देते और लोग उनके बारे में क्या कहते हैं, इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। हालांकि, भारत के पूर्व बल्लेबाज़ संजय मांजरेकर का मानना है कि दिग्गज बल्लेबाज़ अपने बारे में कही जाने वाली हर बात सुनते और पढ़ते हैं।

मांजरेकर ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार ऐसा हुआ जब अगर उन्होंने कोहली के बारे में कुछ नकारात्मक कहा हो, तो विराट टॉस के दौरान उनके प्रति ठंडा व्यवहार करने लगते थे।

क्रिकेट कमेंटेटर और विशेषज्ञ के रूप में मांजरेकर अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। उनका कहना है कि कोहली आलोचना को लेकर काफी संवेदनशील हैं और कई बार नकारात्मक टिप्पणियों ने उन्हें अगला बड़ा शतक बनाने के लिए प्रेरित भी किया है।

स्पोर्टस्टार के ‘इनसाइट एज’ पॉडकास्ट पर मांजरेकर ने कहा, “यह बात उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है (निजी रहना)। लेकिन वह ऐसे इंसान भी हैं जो आलोचना को लेकर काफी संवेदनशील हैं। मुझे लगता है कि उनके बारे में क्या कहा जा रहा है, इसकी उन्हें पूरी जानकारी रहती है। कप्तान और खिलाड़ी के रूप में उनके साथ मेरा अनुभव रहा है। कई बार अचानक वह टॉस के दौरान मेरे प्रति बहुत रुड हो जाते थे और तब मुझे लगता था कि शायद उन्होंने अपने बारे में कही गई कोई बात सुन ली है।”

उन्होंने आगे कहा, “वह उन पहले खिलाड़ियों में से थे जो कहते थे कि हमें फर्क नहीं पड़ता लोग क्या कहते हैं। लेकिन वह संवेदनशील भी हैं। शायद यह अच्छी बात भी है क्योंकि अगर वह कोई आलोचना या नकारात्मक बात सुनते हैं, तो वही उन्हें अगला बड़ा शतक लगाने के लिए प्रेरित करती है।”

हालांकि कोहली टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं, लेकिन इस फॉर्मेट में उनका योगदान आज भी फैंस और विशेषज्ञों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। आंकड़ों के लिहाज से कोहली भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान हैं और मांजरेकर का मानना है कि आने वाले वर्षों में लोग उनकी महानता को और ज्यादा समझेंगे।

इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम की घोषणा से पहले कोहली ने पिछले साल टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। वह अपने करियर में 10,000 टेस्ट रन के आंकड़े से थोड़ा पीछे रह गए, जिसे हासिल करने की उनकी हमेशा इच्छा थी। फैंस की ओर से उनके टेस्ट संन्यास से वापसी की मांग भी उठी, लेकिन कोहली ने साफ कहा कि वह अपना फैसला नहीं बदलेंगे।

मांजरेकर ने कहा, “कप्तान के रूप में उनकी सबसे अच्छी बात यह थी कि जब मैच फीका पड़ जाता था और उन्हें लगता था कि उपलब्ध गेंदबाज़ी संसाधनों से विकेट निकालना मुश्किल है, तब भी वह टीम में ऊर्जा बनाए रखते थे। वह खिलाड़ियों को विश्वास दिलाते थे कि कुछ हो सकता है। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं हमेशा मानता हूं कि टीम अपने कप्तान जैसी बन जाती है। विराट कोहली के नेतृत्व में हर खिलाड़ी को विराट जैसा बनना पड़ता था। अगर कोई मैदान पर थोड़ा भी फीका नजर आता, तो शायद अगले टेस्ट में नहीं खेलता। इसलिए हर खिलाड़ी विराट की आक्रामकता के अनुसार खुद को ढाल लेता था।”