
बुधवार को विजय हजारे ट्रॉफी के मुकाबले में दिल्ली की टीम को ओडिशा जैसी कमजोर मानी जा रही टीम के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। 273 रनों के मामूली लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली की बल्लेबाजी पूरी तरह ढह गई और टीम सिर्फ 192 रन पर ऑलआउट हो गई। यह साल का उनका आखिरी मैच था।
दिल्ली के कप्तान ऋषभ पंत का इस टूर्नामेंट में एक और निराशाजनक प्रदर्शन रहा। वह टीम के लिए कोई खास योगदान नहीं दे सके। लक्ष्य का पीछा करते हुए 11वें ओवर में मीडियम पेसर देवव्रत प्रधान ने उन्हें 28 गेंदों में 24 रन पर आउट कर दिया।
इस हार के साथ दिल्ली को सीजन की पहली शिकस्त झेलनी पड़ी। इससे पहले तक टीम का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था, जिसमें विराट कोहली और प्रियांश आर्य की बल्लेबाजी का बड़ा योगदान था। पिछले मैच में तेज गेंदबाज नवदीप सैनी ने भी बल्ले से नाबाद 34 रन बनाकर सौराष्ट्र के खिलाफ जीत में मदद की थी।
पंत की लगातार कमजोर फॉर्म को देखते हुए भारतीय वनडे टीम में उनकी जगह को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। ध्रुव जुरेल और ईशान किशन के व्हाइट-बॉल क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण यह संभावना बढ़ती जा रही है कि पंत को आगामी भारत-न्यूजीलैंड वनडे सीरीज के लिए टीम में जगह न मिले।
विजय हजारे ट्रॉफी में अब तक पंत ने अपनी पसंदीदा मिडिल ऑर्डर पोजिशन पर बल्लेबाजी करते हुए 5 मैचों में सिर्फ 121 रन बनाए हैं। इसके मुकाबले ईशान किशन ने इस सीजन में कर्नाटक के खिलाफ खेले गए एक मैच में ही 125 रन बनाए, जबकि ध्रुव जुरेल ने तीन मैचों में 307 रन जड़ दिए हैं।
दिल्ली के चार विजय हजारे ट्रॉफी 2025–26 मैचों में पंत की सिर्फ एक ही पारी उल्लेखनीय रही—गुजरात के खिलाफ 79 गेंदों में संयमित 70 रन। इसके अलावा उनका प्रदर्शन फीका ही रहा है।
फिलहाल पंत भारतीय व्हाइट-बॉल योजनाओं का अहम हिस्सा नहीं दिख रहे हैं और सीमित ओवरों के प्रारूप से धीरे-धीरे दूर होते नजर आ रहे हैं। कभी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और मैच जिताऊ अंदाज के लिए सराहे जाने वाले पंत अब जनवरी में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद करेंगे, ताकि 2027 वनडे विश्व कप (दक्षिण अफ्रीका) की तैयारियों में अपनी दावेदारी बनाए रख सकें।








