‘जसप्रीत बुमराह और ऋषभ पंत ने मुझसे माफी मांगी’: टेम्बा बवुमा ने भारत दौरे का किस्सा साझा किया!

दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने भारत के हालिया दौरे के दौरान किए गए कुछ “अप्रिय” टिप्पणियों पर खुलकर बात की है। उन्होंने माना कि प्रोटीज़ के कोच शुक्रि कॉनराड को “ग्रॉवेल” (झुककर गिड़गिड़ाने) जैसे शब्द के इस्तेमाल से बचना चाहिए था। साथ ही बवुमा ने यह भी खुलासा किया कि जसप्रीत बुमराह और ऋषभ पंत ने एक आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए उनसे माफी मांगी थी।

भारत दौरे पर दक्षिण अफ्रीका ने दो टेस्ट, तीन वनडे और पांच टी20 मैच खेले। हालांकि वे दोनों व्हाइट-बॉल सीरीज़ हार गए, लेकिन भारत में 25 साल बाद टेस्ट जीतकर उन्होंने लंबी उपलब्धि हासिल की—और यह दौरा कुल मिलाकर अपेक्षाकृत शांत रहा।

ESPNcricinfo के लिए अपने कॉलम में बवुमा ने लिखा,
“मेरे साथ एक घटना हुई थी, जहां उन्होंने अपनी भाषा में मेरे बारे में कुछ कहा। आखिरकार दो सीनियर खिलाड़ी—ऋषभ पंत और जसप्रीत बुमराह—आकर मुझसे माफी मांगकर गए।”

उन्होंने आगे कहा, “जब माफी मांगी गई, तब मुझे ठीक-ठीक पता भी नहीं था कि बात किस बारे में है। मैंने उस समय कुछ सुना नहीं था, इसलिए मुझे अपने मीडिया मैनेजर से पूछना पड़ा।”

यह टिप्पणी कोलकाता में खेले गए पहले टेस्ट की एक घटना की ओर इशारा करती है, जहां बुमराह और पंत ने बवुमा के लिए “बौना” शब्द का इस्तेमाल किया था—जिसे कई लोगों ने उनकी कद-काठी पर तंज माना।

बवुमा ने जोड़ा, “मैदान पर जो होता है, वह मैदान पर ही रहता है, लेकिन कही गई बातें भूलती नहीं हैं। आप उन्हें ईंधन और प्रेरणा की तरह इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मन में कोई निजी रंजिश नहीं रखते।”

इसके बाद बवुमा ने गुवाहाटी में खेले गए दूसरे टेस्ट के दौरान कोच शुक्रि कॉनराड की टिप्पणी का ज़िक्र किया। कॉनराड ने कहा था कि मेहमान टीम भारतीय टीम को ‘क्रिंज’ (असहज) कराना चाहती है, जिसकी तुलना अतीत में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ इंग्लैंड के पूर्व कप्तान टोनी ग्रेग की नस्लवादी टिप्पणी से की गई थी।

बाद में कॉनराड ने माफी मांगी। बवुमा ने कहा कि आमतौर पर शांत रहने वाले उनके कोच को बेहतर शब्दों का चयन करना चाहिए था।

उन्होंने कहा, “‘ग्रॉवेल’ वाली टिप्पणी को लेकर शुक्रि को भी काफी आलोचना झेलनी पड़ी। उस वक्त मीडिया ने मुझ पर दबाव बनाया कि मैं इस पर सफाई दूं। मुझे लगा कि इस पर संदर्भ देने के लिए शुक्रि ही सबसे सही व्यक्ति हैं।”

बवुमा ने आगे कहा, “पहली बार जब मैंने यह सुना, तो इसका स्वाद कड़वा लगा, लेकिन इसने मुझे यह भी याद दिलाया कि टेस्ट सीरीज़ कितनी कड़ी और प्रतिस्पर्धी थी और कुछ लोगों के लिए इसका क्या मतलब था। वनडे सीरीज़ के बाद शुक्रि ने इस मुद्दे को खत्म कर दिया। बाद में उन्होंने माना कि वे बेहतर शब्द चुन सकते थे—और मैं उनसे सहमत हूं।”

बवुमा के मुताबिक, भारत में उनकी टीम को वही कठिन चुनौती मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।

उन्होंने कहा, “आप इसे खुलकर स्वीकार नहीं करना चाहते, लेकिन कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो मन में रह जाते हैं। आप बस यही उम्मीद करते हैं कि वे दोबारा न खुलें या उन पलों को फिर से न जीना पड़े। मानसिक तौर पर यह चुनौती थी, और पिछले अनुभव से आपको पता होता है कि भारत में खेलना कितना मुश्किल होने वाला है।”