टोंक से बेलफास्ट तक: जय मूंद्रा के क्रिकेट सपने ने भरी उड़ान!

राजस्थान के टोंक के रहने वाले बाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज जय मूंद्रा ने शुक्रवार को बेलफास्ट में खेले गए पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में अपने करियर की पहली ही गेंद पर संजू सैमसन को आउट कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यादगार आगाज़ किया। इस मैच में आयरलैंड ने भारत को हराकर इतिहास रच दिया।

मूंद्रा के लिए यह विकेट सिर्फ एक बड़े बल्लेबाज का शिकार नहीं था, बल्कि इस बात का प्रमाण भी था कि कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर अपने जुनून का पीछा करने का उनका फैसला सही साबित हुआ।

जब वह 2021 में यूनिवर्सिटी ऑफ डबलिन में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन में एमटेक करने के लिए आयरलैंड पहुंचे थे, तब उनके मन में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का कोई विचार नहीं था। विदेश में पढ़ने वाले हजारों भारतीय छात्रों की तरह उन्होंने पढ़ाई पूरी की, इंटेल जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी हासिल की और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर स्थिर जीवन शुरू कर दिया।

मूंद्रा भले ही क्रिकेट से दूर हो गए थे, लेकिन क्रिकेट उनसे कभी दूर नहीं हुआ। उस दौरान उन्होंने तेज गेंदबाजी छोड़कर खुद को एक बाएं हाथ के स्पिनर और टॉप ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में ढालने की भी कोशिश की।

हालांकि, 2024 उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्हें महसूस हुआ कि क्रिकेट के साथ उनका सफर अभी अधूरा है। उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह क्रिकेट पर ध्यान देने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने डबलिन के लेन्स्टर क्रिकेट क्लब से जुड़कर अपने करियर को नई दिशा दी।

इस सपने को पूरा करने के लिए उन्हें कई त्याग करने पड़े। कई बार वह सिर्फ अभ्यास के लिए डबलिन से बेलफास्ट तक लंबी यात्रा करते, देर रात घर लौटते और अगले दिन फिर वही सिलसिला दोहराते। आज उसी जोखिम का उन्हें सबसे बड़ा इनाम मिला है।

राष्ट्रीय टीम में पहली बार चुने जाने के बाद मूंद्रा ने क्रिकेट आयरलैंड से बातचीत में अपनी गेंदबाजी की सोच साझा की।

उन्होंने कहा,”बाएं हाथ के गेंदबाज के रूप में मेरा एंगल ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। नई गेंद से मैं स्विंग का पूरा इस्तेमाल करने की कोशिश करता हूं। मेरा लक्ष्य बल्लेबाज के पैड और स्टंप्स को निशाना बनाना होता है, साथ ही कुछ गेंदें बाहर भी ले जाना चाहता हूं। मैं कभी भी अनुमानित गेंदबाजी नहीं करना चाहता और एज निकलवाने की कोशिश करता हूं। मेरा मकसद आक्रामक रहना, बल्लेबाज पर दबाव बनाना और उसे असहज महसूस कराना है, ताकि वह गलती करे और मुझे शुरुआती विकेट मिल सकें।”

भारत के खिलाफ उन्होंने अपनी इस सोच को मैदान पर पूरी तरह साबित भी कर दिया। उनकी पहली ही गेंद संजू सैमसन के बल्ले का अंदरूनी किनारा लेकर विकेटों में जा लगी। भारतीय टी20 विश्व कप विजेता टीम के स्टार बल्लेबाज को पहली ही गेंद पर आउट कर उन्होंने न सिर्फ मैच का रुख बदल दिया, बल्कि शायद अपनी किस्मत भी बदल दी।

मूंद्रा ने कहा, “अब आयरलैंड की भारत के खिलाफ पहली जीत का हिस्सा बनना इसे और भी खास बना देता है। यह ऐसा पल है जिसे मैं जिंदगीभर याद रखूंगा। यह हमारी टीम और आयरिश क्रिकेट, दोनों के लिए गर्व का क्षण है।”

हालांकि, आयरलैंड में मूंद्रा का भविष्य अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। उनकी पिछली कंपनी द्वारा मिला वर्क परमिट जल्द समाप्त होने वाला है, जिससे आगे का रास्ता अनिश्चित बना हुआ है।

यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय दौरा है, इसलिए अन्य वरिष्ठ आयरिश खिलाड़ियों की तरह उनके पास सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट भी नहीं है। भारत के खिलाफ इस सीरीज में उन्हें सिर्फ दोनों मैचों की मैच फीस ही मिलेगी।

लेकिन अगर वह इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखते हैं, तो संभव है कि क्रिकेट आयरलैंड उन्हें भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी मानते हुए लंबी अवधि के लिए अपने साथ जोड़ ले। इससे उनके लिए आयरलैंड में लंबे समय तक बने रहने का रास्ता भी खुल सकता है।

डबलिन में कभी कोडिंग की डेडलाइन पूरी करने वाले जय मूंद्रा आज अपने ही “वतन” भारत के खिलाफ आयरलैंड की ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहे हैं। उनकी कहानी इस बात की याद दिलाती है कि कुछ सपने कभी खत्म नहीं होते, वे बस सही समय का इंतजार करते हैं।

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।