
क्या वॉशिंगटन सुंदर एक बेहतरीन ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं? या फिर वह ऐसे ऑफ स्पिन ऑलराउंडर हैं जो जरूरत पड़ने पर कुछ रन भी बना सकते हैं?
यह सवाल काफी समय से मौजूद है, लेकिन अब भारतीय टीम प्रबंधन द्वारा 26 वर्षीय क्रिकेटर का जिस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे लेकर यह बहस खुलकर सामने आने लगी है।
क्या गौतम गंभीर और उनका सहयोगी स्टाफ वास्तव में जानते हैं कि वॉशिंगटन की भूमिका क्या होनी चाहिए? 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के बावजूद वह न तो ऐसे फिनिशर साबित हुए हैं जो मैच खत्म कर सकें और न ही ऐसे स्पिनर जिन पर किसी भी टीम का पूरा गेंदबाजी आक्रमण टिका हो।
रवींद्र जडेजा को कभी “बिट्स एंड पीसेज़ क्रिकेटर” कहे जाने से चिढ़ होती थी, क्योंकि यह शब्द औसत प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। और अगर जडेजा के सर्वश्रेष्ठ दौर से तुलना की जाए, तो वॉशिंगटन अभी उसके आसपास भी नहीं हैं। इतना ही नहीं, वॉशिंगटन अब नए खिलाड़ी भी नहीं रहे।
उन्होंने 18 साल की उम्र से पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू कर लिया था और अब 26 साल की उम्र में लगभग एक दशक से भारतीय ड्रेसिंग रूम का हिस्सा हैं। लेकिन अगर 61 मैचों में उन्हें सिर्फ 26 पारियों में बल्लेबाजी का मौका मिला हो और उनका स्ट्राइक रेट 130 से भी कम हो, तो उन्हें फिनिशर नहीं कहा जा सकता।
गेंदबाजी की बात करें तो 57 पारियों में 51 विकेट और सात से थोड़ा अधिक की इकोनॉमी रेट को अच्छा नहीं बल्कि अधिकतम औसत प्रदर्शन कहा जा सकता है। उन्होंने कुल 1,049 वैध गेंदें फेंकी हैं, यानी प्रति पारी लगभग 18 गेंदें। इसका सीधा मतलब है कि उन्हें अक्सर अपने पूरे चार ओवर फेंकने का मौका ही नहीं मिलता।
वॉशिंगटन ने अपने करियर की शुरुआत ऐसे ऑफ स्पिनर के रूप में की थी जो पावरप्ले में नई गेंद से गेंदबाजी करते थे। लेकिन टी20 क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी के बढ़ते चलन के कारण अब उन्हें उस भूमिका में भी कम इस्तेमाल किया जा रहा है।
शुक्रवार को आयरलैंड के खिलाफ उन्होंने पारी का सिर्फ 16वां ओवर फेंका। बल्लेबाजी में उन्हें नंबर छह पर भेजा गया, जहां वह 12 गेंदों में केवल 9 रन ही बना सके।
हालांकि, इससे भी ज्यादा दिलचस्प उनके पिछले 12 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो मुकाबले बारिश की वजह से धुल गए थे) में गेंदबाजी का पैटर्न है। इन 10 पारियों में उन्होंने क्रमशः 1, 2, 4, 4, 1.2, 1, 1, 1, 1 और 2 ओवर फेंके।
गौतम गंभीर के कार्यकाल में वॉशिंगटन के इस्तेमाल का एक स्पष्ट पैटर्न सामने आया है।
हालांकि वह लगातार टीम में जगह बना रहे हैं, लेकिन 10 में से पांच पारियों में उन्हें सिर्फ एक ओवर ही दिया गया। जिस मैच में उन्होंने 1.2 ओवर फेंके थे, उसी में उन्होंने 3 विकेट लेकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन (3/3) किया था।
पांच में से तीन मौकों पर उन्हें पहले बदलाव के गेंदबाज के रूप में लाया गया, उन्होंने विकेट भी लिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आगे गेंदबाजी का मौका नहीं मिला। हर बार सिर्फ एक ओवर देकर हटा दिया गया।
61 मैचों की 57 गेंदबाजी पारियों में से केवल 25 बार ही उन्हें अपने पूरे चार ओवर फेंकने का मौका मिला। दिलचस्प बात यह है कि जब उन्होंने पूरे चार ओवर फेंके हैं, तब उनकी इकोनॉमी रेट 6.65 रही है, जो उनके करियर की 7.05 की औसत इकोनॉमी से बेहतर है। वहीं उनका स्ट्राइक रेट भी 20 गेंद प्रति विकेट से कम रहा, जबकि अधूरे स्पेल में यह 22.2 गेंद प्रति विकेट है।
इन आंकड़ों का समर्थन भारत के पूर्व दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी अपने यूट्यूब शो “ऐश की बात” में किया।
अश्विन ने कहा, “वॉशिंगटन को इस टीम मैनेजमेंट का पूरा समर्थन मिला है। वह इस टीम में लगभग ऑटोमैटिक चॉइस बन चुके हैं। लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें खिलाने के बावजूद उनकी कोई तय भूमिका नहीं है। कई बार उन्हें सिर्फ एक ओवर मिलता है, तो कई बार एक भी ओवर नहीं मिलता। अगर आपको याद हो, टी20 विश्व कप के दौरान टीम मैनेजमेंट ने उपकप्तान अक्षर पटेल को बाहर करके वॉशिंगटन को खिलाया था। यानी उन्हें पूरा समर्थन दिया जा रहा है।”
अश्विन का मानना है कि बल्लेबाजी में भी वॉशिंगटन का इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “उन्हें फिनिशर की भूमिका दी जा रही है, जबकि वह फिनिशर नहीं हैं। उन्हें अक्षर पटेल की तरह फ्लोटिंग रोल मिलना चाहिए, जैसा रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ की जोड़ी ने अक्षर का इस्तेमाल किया था। मुझे लगता है कि वॉशिंगटन की भूमिका का सही उपयोग नहीं हो रहा है। अगर आप उन्हें लंबा मौका देना चाहते हैं, तो पावरप्ले खत्म होने के तुरंत बाद गेंदबाजी कराइए और पूरे चार ओवर दीजिए। अगर आप उन्हें पूरा स्पेल ही नहीं देंगे, तो कैसे पता चलेगा कि वह भरोसेमंद ऑलराउंडर बन सकते हैं या नहीं?”
भले ही आयरलैंड के खिलाफ सीरीज बहुत बड़ी न हो, लेकिन अगर वॉशिंगटन सुंदर की भूमिका को लेकर यही असमंजस जारी रहा, तो यह उनके विकास में बाधा बन सकता है। क्योंकि उनमें सिर्फ “बिट्स एंड पीसेज़ क्रिकेटर” से कहीं ज्यादा उपयोगी खिलाड़ी बनने की क्षमता मौजूद है।







