
फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में टूर्नामेंट की सबसे खतरनाक आक्रामक टीमों में से एक मानी जा रही फ्रांस को स्पेन के खिलाफ 0-2 की करारी हार का सामना करना पड़ा। इस जीत के साथ स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।
पूरे टूर्नामेंट में किलियन एम्बाप्पे, उस्मान डेम्बेले, माइकल ओलीसे, ब्रैडली बारकोला और देज़िरे डुए जैसे खिलाड़ियों की बदौलत फ्रांस ने छह मैचों में 16 गोल किए थे और सेमीफाइनल तक शानदार अंदाज में पहुंचा था।
लेकिन टेक्सास के एटी एंड टी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में स्पेन ने फ्रांस की आक्रामक ताकत को पूरी तरह बेअसर कर दिया। फ्रांस को मैच में पहला शॉट लक्ष्य पर लगाने के लिए 75 मिनट से भी ज्यादा इंतजार करना पड़ा।
तब तक स्पेन 2-0 की बढ़त बना चुका था और मैच पर पूरी तरह नियंत्रण कर चुका था।
स्पेन के मिडफील्ड तिकड़ी रोड्री, दानी ओल्मो और फैबियन रुइज़ ने फ्रांस की मिडफील्ड को पूरी तरह दबाव में रखा और उसके हमलावर खिलाड़ियों तक गेंद पहुंचने ही नहीं दी।
हार के बाद किलियन एम्बाप्पे ने कहा, “मिडफील्ड में हम बार-बार 3 बनाम 2 की स्थिति में फंसते रहे। स्पेन जैसी टीम के खिलाफ यह बहुत बड़ी समस्या है। जब सारी चीजें एक साथ आपके खिलाफ जाती हैं तो नतीजा हार ही होता है। यह बेहद निराशाजनक है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम वैसा मैच बिल्कुल नहीं खेल पाए जैसा खेलना चाहते थे। चाहे रणनीति की बात हो, तकनीकी प्रदर्शन हो या फिर टीम का समग्र खेल—हम हर मोर्चे पर पीछे रहे। विश्व कप के सेमीफाइनल में अगर आप अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं करते, तो जीत नहीं सकते।”
इस हार के साथ फ्रांस के मुख्य कोच दिदिएर डेशां का कार्यकाल भी समाप्त हो जाएगा। बताया जा रहा है कि वह इस टूर्नामेंट के बाद अपने पद से हट जाएंगे।
डेशां ने इससे पहले 2018 में फ्रांस को विश्व कप चैंपियन बनाया था और 2022 में भी टीम को फाइनल तक पहुंचाया था, जहां उसे पेनल्टी शूटआउट में हार मिली थी। ऐसे में इस बार भी उनके शानदार विदाई की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन सेमीफाइनल में हार के साथ उनका सफर खत्म हो गया।
मैच के बाद डेशां ने कहा, “मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर यह ज्यादा मायने नहीं रखता कि मैं इस टूर्नामेंट से सेमीफाइनल में बाहर हुआ या फाइनल में। अभी भविष्य की बात करने का समय नहीं है। मैं राष्ट्रीय टीम के साथ किए गए अपने पूरे सफर पर गर्व महसूस करता हूं। खिलाड़ी के रूप में मुझे कई यादगार पल मिले। आज वैसा दिन नहीं है, लेकिन हमें इस हार को स्वीकार करना होगा और अब तक की उपलब्धियों को नहीं भूलना चाहिए।”
वहीं, किलियन एम्बाप्पे का भी विश्व कप फाइनल खेलने का सपना टूट गया। अगर फ्रांस यह मुकाबला जीत जाता, तो एम्बाप्पे ब्राज़ील के दिग्गज काफू के बाद तीन विश्व कप फाइनल खेलने वाले इतिहास के दूसरे खिलाड़ी बन जाते।
अब फ्रांस को शनिवार को मियामी के हार्ड रॉक स्टेडियम में तीसरे स्थान के लिए होने वाला मुकाबला खेलना होगा।
हालांकि, एम्बाप्पे ने हार के बावजूद टीम का हौसला बढ़ाया और कहा कि फ्रांस फिर मजबूती से वापसी करेगा।
उन्होंने कहा, “हमारा सपना फाइनल में पहुंचने, अपने देश को फिर से सपने देखने का मौका देने और इतिहास रचने का था। अब हमें इस हार का सामना सिर ऊंचा रखकर करना होगा। जिस तरह जीत का जश्न सिर ऊंचा रखकर मनाते हैं, उसी तरह हार को भी सम्मान के साथ स्वीकार करना चाहिए।”
एम्बाप्पे ने आगे कहा, “फिलहाल हम सभी बेहद निराश हैं। मेरे लिए शब्दों में बयान करना मुश्किल है कि मैं और पूरी टीम कितनी निराश है। लेकिन हमें खुद को संभालना होगा, थोड़ा आराम करना होगा और फिर अगले अध्याय की तैयारी करनी होगी। फुटबॉल किसी का इंतजार नहीं करता। हमें नई शुरुआत करनी होगी, इस हार को पीछे छोड़ना होगा और इससे सीख लेकर आगे बढ़ना होगा।”








