
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सीईओ टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा है कि बिग बैश लीग (BBL) में निजी निवेश आने से यह लीग आईपीएल टीम मालिकों के कंट्रोल में चली जाएगी, ऐसी चिंताएं बेवजह बढ़ाई जा रही हैं।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) की BBL को प्राइवेट करने की योजना फिलहाल रुक गई है क्योंकि बोर्ड और राज्य संघों के बीच इस पर सहमति नहीं बन पाई। न्यू साउथ वेल्स ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जबकि क्वींसलैंड ने फैसला टाल दिया।
आईपीएल टीम मालिक अब इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, यूएई और वेस्ट इंडीज की टी20 लीगों में भी टीमों के मालिक या पार्टनर बन चुके हैं। इसी वजह से कुछ लोगों को डर है कि उनका प्रभाव BBL पर भी बढ़ सकता है।
ग्रीनबर्ग ने कहा, “मुझे लगता है कि इस बात को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। भारत क्रिकेट का बहुत बड़ा हिस्सा है, लेकिन हम अपना खेल भारत को नहीं बेचने वाले। हम सिर्फ अपनी टीमों की वैल्यू बढ़ाना चाहते हैं और अच्छे पार्टनर लाना चाहते हैं। कौन पार्टनर बनेगा, यह फैसला राज्यों का होगा।”
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया BBL के जरिए करीब 427 मिलियन डॉलर जुटाना चाहता था ताकि ऑस्ट्रेलिया की टी20 क्रिकेट को मजबूत किया जा सके और खेल का भविष्य सुरक्षित रहे।
ग्रीनबर्ग ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को भारतीय निवेशकों से दूरी नहीं बनानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “आज लगभग हर बिजनेस और सरकारी संस्था भारत के साथ काम करना चाहती है क्योंकि वहां बड़े मौके हैं। ऐसे में अगर हम BBL के कुछ हिस्सों में भारतीय निवेशकों के साथ काम करें तो इसमें गलत क्या है? हमें खुले दिमाग से सोचना चाहिए।”
उन्होंने यह भी बताया कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इस संभावना पर विचार कर रहा है कि कुछ BBL टीमें पारंपरिक तरीके से चलें और कुछ में निजी निवेश और मालिकाना हक हो।
ग्रीनबर्ग ने कहा, “हां, ऐसा संभव है। लेकिन पहले हमें इस पर पूरा काम करना होगा।”








