
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के क्रिकेट निदेशक मो बॉबट का कहना है कि पिछले साल पहली बार आईपीएल ट्रॉफी जीतने के बाद भी टीम में संतुष्टि नहीं आई। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण टीम का “हंटर माइंडसेट” है, जिसने मौजूदा सीजन में आरसीबी को लगातार शानदार प्रदर्शन करने में मदद की।
18 अंकों के साथ आरसीबी इस साल प्लेऑफ में पहुंचने वाली पहली टीम बनी। अब टीम की नजर 22 मई को लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ होने वाले आखिरी लीग मैच को जीतकर अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल करने पर है। टीम ने अपने पिछले 13 मैचों में से नौ में जीत दर्ज की है।
मो बॉबट ने पीटीआई से बातचीत में कहा, “मैं नहीं चाहता था कि ऐसा लगे कि हमने एवरेस्ट फतह कर लिया है। हम लगातार आगे बढ़ना और शिकार करना चाहते थे। हमने टीम के अंदर इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल किया ताकि खिलाड़ी उसी ‘हंटर माइंडसेट’ में बने रहें।”
उन्होंने आगे कहा, “मेरे लिए और सीनियर खिलाड़ियों के लिए यह बहुत जरूरी था कि हम जल्दी से खुद को नए लक्ष्य के लिए तैयार करें और सोचें कि अब आगे क्या हासिल करना है।”
जब उनसे पूछा गया कि खिलाड़ियों में यह सोच लाना कितना आसान था, तो उन्होंने कहा, “यह ज्यादा मानसिक बदलाव की बात थी। हमें यह सुनिश्चित करना था कि सभी खिलाड़ी एक ही लक्ष्य पर फोकस करें। खेल बहुत कठोर होता है। आप ट्रॉफी जीतते हैं और दुनिया तुरंत आगे बढ़ जाती है।”
उन्होंने कहा, “आपको अपनी उपलब्धि पर गर्व भी करना है और साथ ही लोगों का ध्यान अगले लक्ष्य पर भी ले जाना है। इस सीजन में भी हमारे साथ यही होगा। हम ट्रॉफी जीतना चाहते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि ऐसा हो ही।”
बॉबट ने कहा कि आईपीएल में अलग-अलग तरह के खिलाड़ियों को संभालना भी बड़ी चुनौती होती है।
उन्होंने कहा, “आपके पास एक 19 साल का नया खिलाड़ी हो सकता है, जिसे पहली बार आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट मिला हो। वहीं दूसरी तरफ 35 साल का अनुभवी भारतीय खिलाड़ी भी हो सकता है, जिसने देश और कई फ्रेंचाइजियों के लिए सब कुछ हासिल किया हो।”
उन्होंने आगे कहा, “आईपीएल में खिलाड़ियों की कीमत हमेशा उनकी असली वैल्यू नहीं दिखाती। ऑक्शन में मिलने वाली रकम डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करती है। कई बार अनुभवी खिलाड़ी नए खिलाड़ियों से कम कमाते हैं। ऐसे में सभी को एक ही दिशा में काम करने के लिए तैयार करना आसान नहीं होता। और यह सब करने के लिए आपके पास सिर्फ आठ से दस दिन होते हैं।”
आरसीबी कप्तान रजत पाटीदार की तारीफ करते हुए बॉबट ने कहा कि वह मैदान पर फैसले लेने में काफी अच्छे हैं और इससे टीम मैनेजमेंट का काम भी आसान हो जाता है।
उन्होंने कहा, “रजत काफी अलग तरह के कप्तान हैं। जब मैं फ्रेंचाइजी में आया था तब फाफ डु प्लेसिस कप्तान थे। फाफ हर चीज में शामिल रहना पसंद करते थे। लेकिन रजत ज्यादा भरोसा करने वाले इंसान हैं।”
“रजत टीम चयन में अपनी राय देते हैं, लेकिन मैदान पर उतरने के बाद वह पूरी तरह मैच की रणनीति, गेंदबाजी बदलाव और फील्ड सेटिंग पर ध्यान देते हैं। बाकी जिम्मेदारियों के लिए वह मैनेजमेंट पर भरोसा करते हैं।”
बॉबट ने बताया कि पिछले दो सीजन में रजत कप्तान के रूप में काफी विकसित हुए हैं।
उन्होंने कहा, “अब उन्हें साफ समझ है कि वह टीम को कैसे खेलते देखना चाहते हैं। वह मैदान पर पहले से बेहतर फैसले लेने लगे हैं और शुरुआत से ही बाहरी शोर को नजरअंदाज करने में अच्छे रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि विराट कोहली और क्रुणाल पांड्या जैसे अनुभवी और आक्रामक खिलाड़ियों को संभालना भी रजत के लिए सीखने का हिस्सा है।
बॉबट ने कहा, “मुझे यकीन है कि विराट, क्रुणाल और बाकी खिलाड़ियों के सुझावों को संभालना रजत के लिए चुनौतीपूर्ण होता होगा। लेकिन वह लगातार सीख रहे हैं और कप्तान के रूप में आगे बढ़ रहे हैं। अब तक उनका विकास देखना शानदार रहा है।”








