आईपीएल की रफ्तार हो रही धीमी? सुनील गावस्कर ने बीसीसीआई से कहा—‘नियम सख्त करो’!

टी20 फॉर्मेट को तेज और करीब तीन घंटे में खत्म होने वाले मैच के तौर पर बनाया गया था, लेकिन इसके उलट आईपीएल के मुकाबले अब चार घंटे से भी ज्यादा लंबे हो रहे हैं। इस सीजन में कई कप्तानों पर धीमी ओवर रेट के लिए जुर्माना भी लगाया गया है, लेकिन इससे मैच समय पर खत्म होने पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है।

पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर, जो आईपीएल में कमेंट्री भी करते हैं, ने बीसीसीआई से अपील की है कि खेल को और “तेज और सख्त” बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि स्ट्रैटेजिक टाइम-आउट के दौरान सीमित रिजर्व खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ को ही मैदान पर आने की अनुमति होनी चाहिए।

गावस्कर ने अपने कॉलम में लिखा, “अक्सर देखा जाता है कि रिजर्व खिलाड़ी पानी की बोतल देने के लिए मैदान पर आ जाते हैं, जो जरूरी नहीं है। इससे ऐसा लगता है कि मैदान पर 11 से ज्यादा खिलाड़ी मौजूद हैं, भले ही गेंदों के बीच का समय हो।

स्ट्रैटेजिक टाइम-आउट के दौरान भी कई लोग मैदान पर आ जाते हैं, जिसमें अगली बल्लेबाजी करने वाले खिलाड़ी भी शामिल होते हैं। यह ज्यादा छूट लेने जैसा है। यहां सिर्फ दो रिजर्व खिलाड़ी और दो कोचिंग स्टाफ ही मैदान पर होने चाहिए, बाकी किसी को नहीं।”

उन्होंने आगे कहा, “जैसा कि रिची बेनॉ ने मुझसे कहा था कि मैदान एक पवित्र जगह है और वहां सिर्फ खेलने वाले और मैच ऑफिशियल्स को ही होना चाहिए। अगर मैं पिच रिपोर्ट या कोई शो नहीं कर रहा होता, तो मैं भी मैदान पर नहीं जाता। बीसीसीआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी अनावश्यक व्यक्ति मैदान में न जाए।”

गावस्कर ने बल्लेबाज के आने के समय को भी कम करने की सलाह दी।

“पहले बल्लेबाज ड्रेसिंग रूम में होते थे, लेकिन अब वे डगआउट में ही रहते हैं, इसलिए आउट होने के बाद नए बल्लेबाज के आने का समय दो मिनट से घटाकर एक मिनट किया जा सकता है। अगर बल्लेबाज तैयार नहीं है, तो टीम को चेतावनी देने के बाद पेनल्टी रन दिए जाने चाहिए।”

उन्होंने स्ट्रैटेजिक टाइम-आउट को लेकर भी सुझाव दिया, “टाइम-आउट के बाद पहली गेंद ठीक 2 मिनट 30 सेकंड में फेंकी जानी चाहिए। अभी यह ब्रेक लगभग 3 मिनट तक खिंच जाता है। गर्मी जरूर है, लेकिन इसका गलत फायदा उठाया जा रहा है। यहां भी पेनल्टी रन लागू करने से फर्क पड़ेगा।”

गावस्कर का मानना है कि सिर्फ आर्थिक जुर्माना असरदार नहीं है, क्योंकि इससे मैच के नतीजे पर कोई असर नहीं पड़ता।

उन्होंने कहा, “आज के समय में पैसों का जुर्माना टीमों के लिए कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि कई बार टीम ही खिलाड़ी का जुर्माना भर देती है। जब तक सजा ऐसी न हो जो मैच के नतीजे को प्रभावित करे, तब तक उसका असर नहीं होगा।”

उन्होंने सुझाव दिया कि पॉइंट्स या रन पेनल्टी लागू की जानी चाहिए।

“जब किसी टीम को ओवर समय पर पूरा न करने पर आखिरी ओवर में 30-मीटर सर्कल के बाहर एक खिलाड़ी कम रखना पड़ता है, तब घबराहट दिखती है, क्योंकि इससे मैच का नतीजा बदल सकता है। इसी तरह अगर रन या पॉइंट्स की सजा होगी, तो टीमें समय बर्बाद नहीं करेंगी।”