
पराग्वे ने 10 खिलाड़ियों के साथ शानदार संघर्ष करते हुए शुक्रवार को ग्रुप डी के मुकाबले में तुर्की को 1-0 से हरा दिया और फीफा विश्व कप में अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा। वहीं इस हार के साथ तुर्की की नॉकआउट चरण में पहुंचने की उम्मीदें खत्म हो गईं।
अमेरिका के खिलाफ पहले मैच में 4-1 की करारी हार के बाद दबाव में उतरी पराग्वे ने मैच की बेहतरीन शुरुआत की। मातियास गालार्सा ने मैच के सिर्फ 64 सेकंड बाद लंबी दूरी से शानदार गोल दागकर अपनी टीम को बढ़त दिला दी। यह इस टूर्नामेंट का अब तक का सबसे तेज गोल भी बन गया।
इसके बाद पूरे मैच में तुर्की ने लगातार दबाव बनाया, लेकिन पराग्वे की टीम मजबूती से डटी रही। सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में मौजूद अपने जोशीले समर्थकों और ढोल-नगाड़ों की आवाज के बीच दक्षिण अमेरिकी टीम ने शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन किया।
दूसरे हाफ में पराग्वे की मुश्किलें और बढ़ गईं, जब मिगुएल अल्मिरोन को तुर्की के डिफेंडर मेर्त मुलदुर के साथ हुई घटना के बाद रेड कार्ड दिखा दिया गया। इसके बावजूद 10 खिलाड़ियों के साथ खेल रही पराग्वे ने अपनी बढ़त बचाए रखी और यादगार जीत दर्ज की।
तुर्की ने अधिकांश समय गेंद पर कब्जा बनाए रखा। एक समय उसके पास लगभग 80 प्रतिशत बॉल पजेशन था। लेकिन एक बार फिर खराब फिनिशिंग उसकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई।
टीम ने पूरे मैच में 32 शॉट लगाए, लेकिन एक भी गोल नहीं कर सकी। यह स्थिति ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मैच की हार जैसी ही रही।
केनान यिलदिज़ और आर्दा गुलर ने कई अच्छे मौके बनाए, लेकिन पराग्वे की अनुशासित और मजबूत रक्षा पंक्ति को भेद नहीं सके। दूसरी ओर, पराग्वे को जब भी मौका मिला, उसने जवाबी हमलों में खतरा पैदा किया।
पराग्वे 2010 के बाद पहली बार विश्व कप खेल रहा है। 2010 में टीम क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी, जहां उसे बाद में चैंपियन बनी स्पेन से हार का सामना करना पड़ा था। वही उसका विश्व कप में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है।
मैच के हीरो मातियास गालार्सा ने जीत के बाद कहा, “हमने एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद अपनी गुणवत्ता और जुझारूपन दिखाया। भगवान चाहते थे कि इस बार पराग्वे के लिए ऐसा हो।”
वहीं तुर्की के कोच विंचेंजो मोंटेला ने हार और टूर्नामेंट से बाहर होने के बावजूद अपने खिलाड़ियों की सराहना की।
उन्होंने कहा, “मैं दुखी हूं, लेकिन अपने खिलाड़ियों पर गर्व भी है। उन्होंने आखिरी सीटी तक सब कुछ झोंक दिया। फुटबॉल ऐसा ही खेल है।”








