
पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अतुल वासन के अनुसार वैभव सूर्यवंशी में युवा सचिन तेंदुलकर की झलक दिखाई देती है। उनका कहना है कि इस युवा खिलाड़ी की मैच्योरिटी, निडरता और साहसी अंदाज़ उन्हें भारत के 1989 पाकिस्तान दौरे पर 16 वर्षीय सचिन तेंदुलकर की याद दिलाते हैं।
हाल ही में समाप्त हुए आईपीएल सीज़न में सूर्यवंशी ने 16 पारियों में 237.30 के शानदार स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाकर बल्लेबाजी चार्ट में शीर्ष स्थान हासिल किया और टूर्नामेंट के सबसे बड़े स्टार बनकर उभरे। 15 वर्षीय खिलाड़ी ने पैट कमिंस, कगिसो रबाडा और जसप्रीत बुमराह जैसे दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाजी कर सभी को प्रभावित किया।
अतुल वासन ने PTI से बातचीत में कहा, “वह करोड़ों में एक जनरेशनल प्रतिभा है। क्या आप इस लड़के की मैच्योरिटी और निडरता की कल्पना कर सकते हैं? वह मुझे 16 साल के सचिन तेंदुलकर की याद दिलाता है। मैंने 1989 पाकिस्तान दौरे पर सचिन की वही मैच समझ और हालात को अपने हाथ में लेने की हिम्मत देखी थी। भगवान ने उसे एक्स-फैक्टर, खेल की समझ और ताकत का वरदान दिया है।”
1989 में तेंदुलकर ने भारत के लिए डेब्यू किया था, जब उनके सामने वसीम अकरम, वकार यूनुस, अब्दुल कादिर और इमरान खान जैसी खतरनाक पाकिस्तानी गेंदबाजी थी।
तेंदुलकर के आत्मविश्वास भरे ड्राइव और निडर बल्लेबाजी ने सबको प्रभावित किया था। उनकी टाइमिंग और संयम ने साफ दिखा दिया था कि एक बड़ा सितारा उभर रहा है।
वासन ने आगे कहा, “हालांकि उसे अभी लंबा सफर तय करना है। मैं उम्मीद करता हूं कि सब कुछ उसके लिए भी वैसे ही सही दिशा में जाए जैसे सचिन के लिए गया था। वही भगवान का दिया हुआ एक्स-फैक्टर मुझे सूर्यवंशी में नजर आता है।”
वासन ने इस बात पर जोर दिया कि सूर्यवंशी का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि उसे सही मार्गदर्शन मिलता है या नहीं और क्या वह सिर्फ टी20 खिलाड़ी बनने के बजाय एक “पूर्ण क्रिकेटर” बनने की चाह रखता है।
उन्होंने कहा, “मुझे सिर्फ एक बात परेशान करती है — क्या उसे टेस्ट कैप हासिल करने के लिए सही तरीके से प्रेरित किया जा रहा है? वह इस फॉर्मेट (टी20) का बादशाह है। उसके पास खेल है। लेकिन क्या उसमें सिर्फ छक्के मारने से ज्यादा प्रतिभा है?”
दिल्ली के पूर्व कप्तान वासन ने इतनी कम उम्र में सूर्यवंशी पर रिकॉर्ड तोड़ने का दबाव डालने के खिलाफ भी चेतावनी दी।
उन्होंने कहा, “उस पर रिकॉर्ड तोड़ने का बोझ डालना गलत होगा। उसे रिकॉर्ड्स के बारे में नहीं सोचना चाहिए और न ही उसे ऐसा सोचने पर मजबूर किया जाना चाहिए। उसे सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और विराट कोहली जैसे संपूर्ण खिलाड़ी बनने का लक्ष्य रखना चाहिए।”
“इन खिलाड़ियों ने अपने खेल को लगातार ऊंचे स्तर पर पहुंचाया और लंबे समय तक टिके रहे। एक समय आएगा जब उसे अपना खेल बदलना पड़ेगा। कठिन परिस्थितियों में अगर वह खेल की बुनियादी बातों और मूल्यों पर लौट सके, तो वह महान खिलाड़ी बनेगा। यह सब इस पर निर्भर करेगा कि उसे कौन और कैसे मार्गदर्शन देता है। अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ जैसे लोग उसे सही दिशा दे सकते हैं।”
वासन का मानना है कि किसी बल्लेबाज की असली पहचान टेस्ट क्रिकेट से तय होती है।
उन्होंने कहा, “‘टेस्ट’ ही असली परीक्षा है। खिलाड़ी को सम्मान टेस्ट क्रिकेट से ही मिलता है। छोटे मैदानों पर छक्के मारना अलग बात है, लेकिन जब सामने तीन स्लिप हों, बाउंसर पर कोई रोक न हो, बड़े मैदान और कठिन परिस्थितियां हों — वहां अच्छा प्रदर्शन करोगे तो समकालीन खिलाड़ियों की नजरों में सम्मान कमाओगे।”
वासन ने वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिस गेल का उदाहरण देते हुए कहा कि सबसे खतरनाक टी20 बल्लेबाजों में से एक होने के बावजूद उन्हें असली सम्मान तब मिला जब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में खुद को साबित किया।
उन्होंने कहा, “अगर आपके पास क्रिस गेल जैसी रेंज है, तो याद रखिए गेल इसलिए गेल हैं क्योंकि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक भी बनाया। वह टी20 इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में से एक हैं।”
वासन ने यह भी कहा कि सूर्यवंशी अब भारतीय टीम में खेलने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, “सूर्यवंशी ने दिखा दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के लिए तैयार है। उसने दुनिया के लगभग हर गेंदबाज की धज्जियां उड़ाई हैं। वह सीधे भारतीय टीम में जगह बनाता है। उसे कहां खिलाना है, यह कोच का काम है। टी20 में मेरे लिए नंबर एक, दो और तीन सभी ओपनर ही होते हैं, इसलिए इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।”








