
इंग्लैंड और अर्जेंटीना बुधवार को एक बार फिर विश्व कप के सेमीफाइनल में आमने-सामने होंगे। इसके साथ ही फुटबॉल की सबसे चर्चित अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्विताओं में एक और नया अध्याय जुड़ जाएगा। पिछले कई दशकों में दोनों देशों के बीच विश्व कप में कई ऐसे मुकाबले हुए हैं, जिन्हें आज भी फुटबॉल प्रेमी नहीं भूले हैं।
1962: ग्रुप स्टेज, रैंकागुआ (चिली)
विश्व कप में इंग्लैंड और अर्जेंटीना की पहली भिड़ंत 1962 में हुई थी। इस मुकाबले में इंग्लैंड ने अर्जेंटीना को 3-1 से हराया।
यह मुकाबला अपेक्षाकृत शांत रहा और इसमें वह तीखापन नहीं था, जिसने बाद के वर्षों में दोनों टीमों की प्रतिद्वंद्विता को इतना मशहूर बनाया।
इंग्लैंड क्वार्टर फाइनल में पहुंच गया, जबकि अर्जेंटीना ग्रुप चरण से ही बाहर हो गया।
1966: क्वार्टर फाइनल, वेम्बली (इंग्लैंड)
1966 के क्वार्टर फाइनल में दोनों टीमों की प्रतिद्वंद्विता ने नया और विवादित मोड़ लिया।
अर्जेंटीना के कप्तान एंटोनियो रैटिन को रेफरी से बहस करने पर रेड कार्ड दिखाया गया। उन्होंने मैदान छोड़ने में करीब 10 मिनट लगा दिए।
पूरा मुकाबला बेहद शारीरिक खेल और कड़े टैकलों से भरा रहा।
इंग्लैंड को अर्जेंटीना की मजबूत रक्षा पंक्ति को भेदने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार जियोफ हर्स्ट के एकमात्र गोल की बदौलत इंग्लैंड ने 1-0 से जीत दर्ज की।
मैच के बाद इंग्लैंड के कोच अल्फ रैम्ज़े अर्जेंटीना की खेल शैली से इतने नाराज थे कि उन्होंने अपने खिलाड़ियों को विपक्षी टीम के खिलाड़ियों से जर्सी बदलने तक से रोक दिया।
दिलचस्प बात यह है कि एंटोनियो रैटिन का 11 जुलाई को 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया, ठीक उसी दिन जब इंग्लैंड और अर्जेंटीना ने 2026 विश्व कप के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की।
1986: क्वार्टर फाइनल, मेक्सिको सिटी
यह मुकाबला दोनों देशों के बीच विश्व कप इतिहास की सबसे चर्चित भिड़ंत माना जाता है।
डिएगो माराडोना ने पहले विवादित ‘हैंड ऑफ गॉड’ गोल किया, जिसमें उन्होंने हाथ से गेंद को गोल में पहुंचाया।
इसके कुछ ही मिनट बाद उन्होंने फुटबॉल इतिहास के सबसे महान गोलों में से एक दागा। अपने ही हाफ से गेंद लेकर उन्होंने कई इंग्लिश खिलाड़ियों को छकाते हुए शानदार गोल किया।
इंग्लैंड के लिए गैरी लाइनेकर ने एक गोल जरूर किया, लेकिन अर्जेंटीना ने 2-1 से मुकाबला जीत लिया और बाद में विश्व कप भी अपने नाम किया।
1998: प्री-क्वार्टर फाइनल, सेंट-एटियेन (फ्रांस)
1998 का मुकाबला रोमांच, विवाद और ड्रामे से भरपूर रहा।
इंग्लैंड के माइकल ओवेन ने शानदार व्यक्तिगत गोल किया, जबकि डेविड बेकहम को अर्जेंटीना के मिडफील्डर डिएगो सिमियोने को लात मारने के कारण रेड कार्ड दिखा दिया गया।
बाद में सिमियोने ने स्वीकार किया कि उन्होंने जानबूझकर बेकहम को उकसाया था।
पूरे दूसरे हाफ का अधिकांश समय 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने के बावजूद इंग्लैंड ने कड़ा मुकाबला किया।
सोल कैंपबेल ने मैच के अंतिम क्षणों में गोल भी किया था, लेकिन उसे अमान्य घोषित कर दिया गया।
इसके बाद मैच पेनल्टी शूटआउट में गया, जहां डेविड बैटी पेनल्टी चूक गए और अर्जेंटीना ने जीत दर्ज कर ली।
2002: ग्रुप स्टेज, सप्पोरो (जापान)
चार साल बाद डेविड बेकहम ने 1998 की हार का बदला लिया।
उन्होंने पेनल्टी पर मैच का एकमात्र गोल किया और इंग्लैंड ने अर्जेंटीना को 1-0 से हरा दिया।
यह हार अर्जेंटीना के लिए बेहद महंगी साबित हुई। डिएगो सिमियोने, जुआन सेबास्टियन वेरोन और गेब्रियल बतिस्तूता जैसे स्टार खिलाड़ियों के बावजूद टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी।
वहीं, इंग्लैंड क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा, जहां उसे ब्राज़ील के हाथों हार का सामना करना पड़ा।








