
भारत की विस्फोटक सलामी बल्लेबाज़ शेफाली वर्मा का मानना है कि रविवार को लॉर्ड्स में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाले महिला टी20 विश्व कप के अहम मुकाबले में जीत हासिल करने के लिए टीम को अपनी रणनीति सरल रखनी होगी।
ग्रुप के सेमीफाइनल की तस्वीर रविवार को साफ हो जाएगी। एक ओर दक्षिण अफ्रीका (6 अंक) का मुकाबला बांग्लादेश (4 अंक) से होगा, जबकि दूसरी ओर भारत (6 अंक) का सामना अब तक अजेय ऑस्ट्रेलिया (8 अंक) से होगा।
अगर दक्षिण अफ्रीका बांग्लादेश को हरा देता है, तो भारत को अंतिम चार में पहुंचने के लिए ऑस्ट्रेलिया को हराना ही होगा। वहीं ऑस्ट्रेलिया के पास आठ अंक और बेहतर नेट रन रेट होने के कारण हार के बावजूद सेमीफाइनल में पहुंचने का मौका रहेगा।
शेफाली ने जियोस्टार से कहा, “हर कोई जानता है कि ऑस्ट्रेलिया विश्व स्तरीय टीम है। लेकिन ऐसा नहीं है कि हमने उन्हें पहले नहीं हराया। हाल ही में हमने ऑस्ट्रेलिया में टी20 सीरीज़ में उन्हें हराया था और उससे हमें काफी आत्मविश्वास मिला है।”
विश्व कप से पहले खेले गए तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज़ में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से हराया था। शेफाली का मानना है कि विपक्षी टीम को अच्छी तरह जानना भारत के लिए फायदेमंद रहेगा।
उन्होंने कहा, “हम कई वर्षों से उनके खिलाफ खेल रहे हैं। हम उनके गेंदबाज़ों, उनकी ताकत और उनकी रणनीतियों को जानते हैं। इसलिए हम चीज़ों को सरल रखेंगे और अपनी ताकत पर भरोसा करेंगे। जितना ज़्यादा आप सोचेंगे, उतनी ही मुश्किल बढ़ेगी।”
पाकिस्तान के खिलाफ मैच के बाद अपनी बल्लेबाज़ी में बदलाव करने वाली शेफाली ने पिछले तीन पारियों में दो अर्धशतक जड़कर शानदार वापसी की है। उन्होंने स्वीकार किया कि टूर्नामेंट की शुरुआत में वह जरूरत से ज़्यादा सोच रही थीं।
उन्होंने कहा, “मेरी बल्लेबाज़ी में काफी सुधार आया है। पाकिस्तान मैच से पहले मैं बहुत ज़्यादा सोच रही थी कि पहली गेंद कैसे खेलूंगी और दूसरी गेंद पर कौन-सा शॉट लगाऊंगी।”
“लेकिन उस मैच के बाद मुझे एहसास हुआ कि मुझे चीज़ों को जटिल बनाने की जरूरत नहीं है। मुझे बस सरल खेलना है। बल्लेबाज़ी करते समय मैं सिर्फ गेंद को देखती हूं और उसी के अनुसार प्रतिक्रिया देती हूं। पहले से ज़्यादा योजना नहीं बनाती। इसी वजह से अब मैं खुलकर रन बना पा रही हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “इस बदलाव की वजह से मुझे अच्छे स्कोर मिल रहे हैं। मैं खुद पर ज़्यादा दबाव नहीं डाल रही हूं और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस करो या मरो के मुकाबले में भी यही तरीका अपनाने की कोशिश करूंगी।”
शेफाली ने बताया कि अब उन्होंने हर गेंद पर चौका-छक्का लगाने की बजाय स्ट्राइक रोटेट करना भी सीख लिया है।
उन्होंने कहा, “अगर मेरे शॉट नहीं निकल रहे होते, तो मैं जबरदस्ती नहीं करती। मैं सिंगल लेकर स्ट्राइक बदलती हूं और स्कोरबोर्ड चलाती रहती हूं। बल्लेबाज़ी का मतलब चीज़ों को आसान रखना है। सिंगल लेना, स्ट्राइक रोटेट करना और जरूरत पड़ने पर गेंद को ज़मीन पर खेलना भी उतना ही जरूरी है।”
“अगर गेंद मेरे हिटिंग ज़ोन में होती है तो मैं बड़ा शॉट खेलती हूं, नहीं तो अच्छी गेंद का सम्मान करती हूं और एक-दो रन लेने की कोशिश करती हूं। मैंने यही सीखा है कि हर गेंद को मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। शांत रहो, गेंद को देखो और उसी के हिसाब से खेलो।”
शेफाली ने बल्लेबाज़ी के साथ-साथ गेंदबाज़ी में भी अहम योगदान दिया है। हाल के मैचों में उन्होंने नई गेंद से गेंदबाज़ी करते हुए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1/22 के आंकड़े दर्ज किए, जिसमें ताज़मिन ब्रिट्स का महत्वपूर्ण विकेट भी शामिल था।
इससे पहले उन्होंने नीदरलैंड्स के खिलाफ शानदार 3/20 का प्रदर्शन किया था। उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी की भूमिका स्पष्ट करने का श्रेय कप्तान हरमनप्रीत कौर को दिया।
उन्होंने कहा, “हरमन दी ने मेरी भूमिका बिल्कुल साफ रखी है। उन्होंने कहा कि मुझे पावरप्ले में गेंदबाज़ी करनी होगी। इसलिए मैं नेट्स में भी नई गेंद से अभ्यास करती हूं, सही लाइन-लेंथ पर ध्यान देती हूं और स्टंप-टू-स्टंप गेंदबाज़ी करने की कोशिश करती हूं।”
“एक सलामी बल्लेबाज़ होने के नाते मुझे पता है कि अगर गेंद स्टंप से बाहर होगी तो बल्लेबाज़ को रन बनाने का मौका मिलेगा। इसलिए मैं हमेशा वही लाइन और लेंथ रखने की कोशिश करती हूं जो एक ओपनर के तौर पर मुझे परेशान करती। मेरा लक्ष्य टाइट लाइन रखना और बल्लेबाज़ को हर रन के लिए मेहनत करने पर मजबूर करना होता है।”
पूरे टूर्नामेंट में भारत की फील्डिंग चिंता का विषय रही है और कई आसान कैच छूटे हैं। हालांकि शेफाली ने अपने साथियों का बचाव करते हुए कहा कि ये गलतियां तैयारी की कमी की वजह से नहीं हुई हैं।
उन्होंने कहा, “हर खिलाड़ी अपना सौ फीसदी देने की कोशिश करता है। कोई भी जानबूझकर कैच नहीं छोड़ता या मिसफील्ड नहीं करता। कभी-कभी आपका दिन नहीं होता। गेंद हाथ में नहीं टिकती, टाइमिंग गड़बड़ा जाती है या बाउंस आपको चौंका देता है।”
“लेकिन हम हमेशा उस खिलाड़ी का साथ देते हैं जिसका दिन खराब होता है, चाहे मैदान पर हो या मैदान के बाहर। हमारी तैयारी अच्छी रही है। बांग्लादेश मैच से पहले हमें दो दिन का अभ्यास मिला था। हमने टीम के तौर पर आधे घंटे तक कैचिंग और ग्राउंड फील्डिंग की विशेष प्रैक्टिस की थी।”
उन्होंने अंत में कहा, “इसलिए मैं नहीं कहूंगी कि हमारी तैयारी में कोई कमी है। हम अपनी तरफ से हर संभव कोशिश कर रहे हैं। बस कुछ दिन चीज़ें आपके पक्ष में होती हैं और कुछ दिन नहीं। यही क्रिकेट का हिस्सा है।”







