
राजस्थान रॉयल्स के मुख्य कोच कुमार संगकारा का मानना है कि 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी पर शोहरत और चमक-दमक का कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह कम उम्र में भी बड़े स्तर के क्रिकेट के साथ मिलने वाले ध्यान और दबाव को सहजता से संभालना जानते हैं।
विस्फोटक युवा बल्लेबाज़ इस समय भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे पर हैं। लगातार ऐसी चर्चाएं हैं कि उन्हें इन टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत के लिए डेब्यू करने का मौका मिल सकता है। आईपीएल के दौरान वैभव को करीब से देखने वाले संगकारा का मानना है कि यह युवा बल्लेबाज़ भारतीय क्रिकेट ही नहीं, बल्कि विश्व क्रिकेट में भी बड़ी ताकत बन सकता है।
संगकारा ने स्काई स्पोर्ट्स से कहा, “आगे चलकर उसे क्रिकेट और व्यावसायिक दोनों क्षेत्रों में कई मौके मिलेंगे। वह इन सबके बीच कैसे संतुलन बनाएगा और उसे अपने परिवार व टीम से कितना सहयोग मिलेगा, यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।”
उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मैं पूरे भरोसे से कह सकता हूं कि वैभव को बल्लेबाज़ी से बेहद प्यार है। उसे क्रिकेट से प्यार है। शोहरत और चमक-दमक का उस पर कोई असर नहीं होता। वह बहुत जमीन से जुड़ा हुआ और कई चीज़ों को जानने के लिए उत्सुक रहने वाला लड़का है।”
संगकारा ने बताया कि वैभव की रुचियां सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “वह हर समय सिर्फ क्रिकेट में ही नहीं डूबा रहता। उसकी रुचि दूसरी चीज़ों में भी है। मुझे पूरा विश्वास है कि वह भारतीय क्रिकेट, विश्व क्रिकेट और फ्रेंचाइजी क्रिकेट—तीनों में बड़ी ताकत बनेगा। मानसिक रूप से वह बहुत मजबूत है और मुझे लगता है कि वह प्रसिद्धि के साथ आने वाली हर चुनौती का अच्छी तरह सामना करेगा।”
संगकारा ने वैभव के आत्मविश्वास का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने पिछले सीज़न में राजस्थान रॉयल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खेले गए मुकाबले को याद करते हुए कहा,
“हम लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ खेल रहे थे। उन्हें टूर्नामेंट में बने रहने के लिए 220 रन बचाने थे। हमने पहले गेंदबाज़ी की थी और जब हमारी पारी शुरू होने वाली थी, तब वैभव ओपनिंग करने जा रहा था। मैदान पर जाने से पहले उसने मेरी तरफ देखा, आंख मारी और कहा, ‘कोच, चिंता मत करिए, मैच हो गया।'”
उन्होंने आगे बताया,
“फिर वह ड्रेसिंग रूम में गया और डोनोवन फरेरा और लुआन-ड्रे प्रिटोरियस से बोला, ‘तुम दोनों सुन लो, आज मैं 13 छक्के मारूंगा। उसके बाद तुम लोग मैच खत्म कर देना।’ आखिर में उसने उस मैच में 10 छक्के लगाए।”
“शुरुआत में डोनोवन और लुआन-ड्रे को लगा कि वह मजाक कर रहा है। लेकिन जब उसने पांच छक्के पूरे कर लिए, तो दोनों गिनती करने लगे क्योंकि उन्हें यकीन हो गया कि वह सच में ऐसा कर सकता है। सिर्फ 15 साल की उम्र में वैभव का आत्मविश्वास ऐसा है।”
संगकारा ने यह भी बताया कि राजस्थान रॉयल्स ने वैभव को कैसे खोजा।
उन्होंने कहा, “2023 में हमारे विश्लेषक अक्षय ने हमें एक संदेश भेजा कि वैभव सूर्यवंशी नाम का 12 साल का एक लड़का है, जो बेहद प्रतिभाशाली है और हमें उसे जरूर देखना चाहिए। उसके कोच मनीष ओझा ने वैभव के पिता से कहा था कि यह लड़का सिर्फ 12 साल की उम्र में बड़े स्तर का क्रिकेट खेलने के लिए तैयार है। शुरुआत में हमें लगा कि यह मजाक है, लेकिन अक्षय को पूरा भरोसा था, इसलिए हमने उसे बुलाया। उस समय राहुल द्रविड़ राजस्थान रॉयल्स के मुख्य कोच थे। उन्होंने उसे सिर्फ पांच-छह मिनट देखा और कहा, ‘हमें इस लड़के को खरीदना ही होगा।'”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने पहली बार वैभव को गुवाहाटी के एक कैंप में देखा। एक छोटे नेट में जोफ्रा आर्चर और संदीप शर्मा नई गेंद से गेंदबाज़ी कर रहे थे। वहां बल्लेबाज़ी करने की किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी। तभी वैभव आया और बोला, ‘मैं बल्लेबाज़ी करूंगा।’ उसके बल्ले से निकलने वाली आवाज़ बंदूक की गोली जैसी थी। उसने आर्चर और संदीप दोनों का बड़ी आसानी से सामना किया। एक समय तो आर्चर खुद रुककर हंसने लगे क्योंकि 14 साल का यह लड़का उनके खिलाफ बेखौफ बल्लेबाज़ी कर रहा था।”
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बल्लेबाज़ी कोच और मेंटर दिनेश कार्तिक ने भी वैभव की जमकर तारीफ की।
उन्होंने कहा, “राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच से पहले हमने चर्चा की थी कि इस युवा बल्लेबाज़ की कमजोरी क्या हो सकती है। हमें लगा कि सटीक यॉर्कर या अच्छी बाउंसर उस पर असर डाल सकती है। लेकिन गुवाहाटी में कुछ भी काम नहीं आया।”
“न तो भुवनेश्वर कुमार और न ही जोश हेजलवुड उसे आउट कर पाए। उन्होंने हर तरीका आजमाया, लेकिन सफल नहीं हुए। मेरी राय में इस आईपीएल में वैभव सबसे मुश्किल बल्लेबाज़ था, जिसके खिलाफ गेंदबाज़ी करना बेहद कठिन था।”
कार्तिक ने आगे कहा, “उसके खिलाफ गलती की बहुत कम गुंजाइश होती है। उसका स्टांस चौड़ा है और पैरों का संतुलन बेहद मजबूत है। ऑफ साइड में थोड़ी भी ढीली गेंद मिलती है तो वह पूरे हाथ खोलकर शॉट खेलता है। पावरप्ले में जब सिर्फ दो फील्डर बाहर होते हैं, तब उसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है।”
उन्होंने अंत में कहा, “पावरप्ले के बाद भी वह समझदारी से अपनी ताकत के हिसाब से बल्लेबाज़ी करता है। वह एक ही तरह का बल्लेबाज़ नहीं है। वह आसानी से सिंगल लेकर स्ट्राइक रोटेट कर सकता है और अगर गेंद उसके पसंदीदा क्षेत्र में मिले, तो उसे सीमा रेखा के बाहर पहुंचाने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाता।”







