
टोक्यो ओलंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट वेटलिफ्टर मीराबाई चानू इस साल एशियन गेम्स में मेडल जीतने के लिए बेहद उत्साहित हैं और इसे अपने करियर का “अधूरा सपना” मानती हैं।
मीराबाई चानू पिछले एक दशक से भारतीय वेटलिफ्टिंग का बड़ा चेहरा रही हैं। उनके शानदार करियर में टोक्यो ओलंपिक का सिल्वर मेडल, वर्ल्ड चैंपियनशिप के तीन मेडल और कॉमनवेल्थ गेम्स में कई पदक शामिल हैं, लेकिन उनके इस शानदार सफर में अभी तक एशियन गेम्स का मेडल नहीं है।
चानू ने कहा, “एशियन गेम्स मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वहां मेरा काम अभी अधूरा है। वहां का स्तर बहुत ऊंचा होता है, जो इसे और ज्यादा चुनौतीपूर्ण और रोमांचक बनाता है।”
एशियन गेम्स में उनका सफर अब तक निराशाजनक रहा है। 2014 में अपने पहले एशियन गेम्स में वह नौवें स्थान पर रहीं थीं, जबकि 2018 में पीठ की चोट के कारण हिस्सा ही नहीं ले पाईं।
वहीं 2022 एशियन गेम्स में वह मेडल के बेहद करीब पहुंचीं, लेकिन हिप इंजरी की वजह से उनका सपना टूट गया और वह पोडियम तक नहीं पहुंच सकीं।
अब 31 साल की चानू इस बार एशियन गेम्स में शायद अपना आखिरी मौका मानते हुए वह मेडल जीतकर अपने करियर को पूरा करना चाहती हैं।
हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती वजन को मैनेज करना होगा, क्योंकि एशियन गेम्स 19 सितंबर से शुरू होंगे, जबकि कॉमनवेल्थ गेम्स जुलाई-अगस्त में हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स में वह 48 किलोग्राम वर्ग में खेलेंगी, जबकि एशियन गेम्स के लिए उन्हें वापस 49 किलोग्राम वर्ग में जाना होगा।
चानू ने कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स तक मैं अपना वजन 48 किलो के अंदर रखूंगी, लेकिन उसके दो महीने बाद एशियन गेम्स हैं, जो 49 किलो वर्ग में हैं, इसलिए मुझे फिर से वजन बढ़ाना होगा।”
मीराबाई चानू के लिए इस बार एशियन गेम्स सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि उनके शानदार करियर की अधूरी कहानी को पूरा करने का मौका है।








