रवि बिश्नोई की नो-बॉल ने भारत के स्पिन गेंदबाजी कोच पर उठाए नए सवाल!

भारत के पूर्व लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने टीम इंडिया के स्पिन गेंदबाजी कोच साईराज बहुतुले की आलोचना की है। उनका कहना है कि बहुतुले ने रवि बिश्नोई के लगातार चौड़े होते रन-अप पर ध्यान नहीं दिया, जिसकी वजह से इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में भारत की चार विकेट से हार के दौरान बिश्नोई ने कई बैक-फुट नो-बॉल फेंकीं।

बिश्नोई के लिए यह मुकाबला भूलने वाला रहा। उन्होंने अपने चार ओवरों में 60 रन दिए और तीन बार रिटर्न क्रीज को पार किया। इनमें से दो नो-बॉल 17वें ओवर में आईं, जिसमें कुल 29 रन बने और यही मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसके बाद इंग्लैंड ने जीत हासिल कर ली।

शिवरामकृष्णन ने पीटीआई से कहा, “एक स्पिनर को नो-बॉल नहीं डालनी चाहिए। यह अपराध जैसा है। और उनके द्वारा बैक-फुट नो-बॉल डालना, रिटर्न क्रीज काटना, ऐसी चीज है जिसे नेट्स में ही नोटिस किया जाना चाहिए था।”

उन्होंने आगे कहा, “साईराज (बहुतुले) को सबसे पहले उनका रन-अप देखना चाहिए था और यह जांचना चाहिए था कि वह ओवरस्टेप कर रहे हैं या रिटर्न क्रीज काट रहे हैं। सबसे पहले आपको यह देखना होता है कि गेंदबाज वैध गेंद डाल रहा है, उसके बाद अच्छी गेंद डालने की बात आती है।”

पूर्व भारतीय लेग स्पिनर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी स्पिनर का नो-बॉल डालना सही कोचिंग की कमी और बुनियादी तकनीकी समस्याओं को ठीक न करने का संकेत है।

उन्होंने कहा, “एक गेंदबाज के लिए सबसे पहली चीजों में से एक है नो-बॉल से बचना, खासकर स्पिनर के लिए। नो-बॉल डालना बहुत बड़ी गलती है। और अहम ओवरों में ऐसा करना दिखाता है कि गेंदबाजी और स्पिन गेंदबाजी कोचों की ओर से सही मार्गदर्शन और निगरानी की कमी रही है।”

भागवत चंद्रशेखर और अनिल कुंबले जैसे महान खिलाड़ियों की तुलना करते हुए शिवरामकृष्णन ने कहा कि आज के लेग स्पिनर जरूरत से ज्यादा डिफेंसिव हो गए हैं।

उन्होंने कहा, “आपने चंद्रशेखर को देखा है, आपने अनिल कुंबले को देखा है। उन्होंने शायद ही कभी नो-बॉल डाली हो। एक लेग स्पिनर को कभी डिफेंसिव विकल्प नहीं होना चाहिए। उसे हमेशा आक्रामक विकल्प होना चाहिए। लेकिन हाल के समय में लेग स्पिनरों को ज्यादातर डिफेंसिव हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सोच और रवैया बदलना होगा क्योंकि इससे उनके कौशल के विकास पर असर पड़ रहा है।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टी20 मैच अक्सर मिडिल ओवर्स में जीते या हारे जाते हैं और विशेषज्ञ स्पिनरों से अहम विकेटों की उम्मीद रहती है।

शिवरामकृष्णन ने कहा, “आमतौर पर 7 से 15 ओवर स्पिनर डालते हैं। अगर आपके दो स्पिनर चार-चार ओवर डाल रहे हैं, तो उन्हें मिलकर कम से कम चार विकेट लेने चाहिए। भले ही आप नौ रन प्रति ओवर दें, तो स्कोर 180 होता है, जिसे चेज किया जा सकता है। चार ओवर, 36 रन और दो विकेट हर स्पिनर का आदर्श प्रदर्शन होना चाहिए क्योंकि इससे आप मिडिल ऑर्डर को तोड़ते हैं और साझेदारियां बनने से रोकते हैं। इसके लिए स्पिनर को आक्रामक होना होगा और किसी भी पिच पर गेंद घुमाने में सक्षम होना चाहिए।”