IPL: कैसे एमएस धोनी का विकेट लेना रविचंद्रन अश्विन के CSK सपने को सच कर गया!

पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने शुक्रवार को खुलासा किया कि अपने करियर के शुरुआती दिनों में चैलेंजर ट्रॉफी के दौरान महेंद्र सिंह धोनी को आउट करने के बाद उनके ज़ोरदार सेलिब्रेशन से धोनी नाराज़ हो गए थे।

जियोस्टार के शो “द रविचंद्रन अश्विन एक्सपीरियंस” में बातचीत करते हुए ऑफ स्पिनर ने याद किया कि उन्हें लगा था कि धोनी का विकेट लेने से उनके लिए चेन्नई सुपर किंग्स में खेलने का रास्ता खुल सकता है।

अश्विन ने कहा, “मुथैया मुरलीधरन टीम में थे, एक लेजेंड, और वह अपने पूरे ओवर डालते थे, इसलिए मुझे मौके नहीं मिल रहे थे। मैंने 2008 में CSK के लिए नहीं खेला, लेकिन 2009 में केप टाउन में मुंबई इंडियंस के खिलाफ सचिन तेंदुलकर के सामने मुझे पहला मैच मिला। 2009 और 2010 के बीच भी मुझे ज्यादा मौके नहीं मिले।”

उन्होंने आगे कहा, “चैलेंजर ट्रॉफी में मुझे धोनी को गेंदबाज़ी करने का मौका मिला। हमारी टीम के खिलाफ धोनी दो बार आउट हुए। एक बार उन्होंने डीप कवर की ओर शॉट खेला और मैंने डाइव लगाकर कैच पकड़ा। मैंने इतना ज़्यादा जश्न मनाया कि वह सच में नाराज़ हो गए।”

“उन्होंने कहा, ‘इतना ज़्यादा सेलिब्रेट करने की क्या बात है?’ मैंने उनसे कहा, ‘आपका विकेट लेना मेरा सपना था। शायद इससे CSK में मेरे लिए दरवाज़ा खुल जाए।’ अगले साल मुझे मौका मिल गया।”

CSK के माहौल और 2010 से 2015 के बीच टीम की लगातार सफलता के राज पर अश्विन ने कहा,
“मुझे लगता है कि चेन्नई उन शुरुआती टीमों में से थी, जिनके पास सिर्फ अच्छे बल्लेबाज़ ही नहीं बल्कि कई शानदार गेंदबाज़ भी थे। इसके साथ कुछ घरेलू खिलाड़ी भी उभरे, जैसे मैं, मुरली विजय, बद्रीनाथ और शादाब जकाती। बहुत लोग उन्हें नहीं जानते, लेकिन उन्होंने CSK के लिए हीरो जैसी भूमिका निभाई। उस समय वह गोवा के कप्तान थे।”

उन्होंने आगे कहा, “वृद्धिमान साहा को भी टीम में लिया गया और मिडिल ऑर्डर में इस्तेमाल किया गया, जहां उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। चेन्नई का क्रिकेटिंग माहौल ऐसा था कि मैदान के बाहर की किसी चीज़ की चिंता नहीं करनी पड़ती थी।”

“परिवार की यात्रा, टिकट, कमरे, ट्रैवल—सब कुछ मैनेज होता था। अगर मेरे माता-पिता आना चाहते थे तो उनकी भी पूरी व्यवस्था होती थी। बसें, गाड़ियां, सब तैयार रहता था। ऐसे में दबाव में दूसरी चीज़ों की चिंता करने की बजाय आप सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान दे सकते थे। ये छोटी बातें लगती हैं, लेकिन बहुत मायने रखती हैं। ऐसी सद्भावना खरीदी नहीं जा सकती, उसे बनाना पड़ता है।”

अश्विन, जिन्होंने अपना IPL करियर CSK के साथ खत्म किया क्योंकि वह वहीं अंत करना चाहते थे जहां से शुरुआत की थी, भारत के दूसरे सबसे सफल टेस्ट गेंदबाज़ हैं। उन्होंने 106 टेस्ट मैचों में 537 विकेट लिए हैं।

उन्होंने कहा, “जब मुझे दोबारा CSK के लिए खेलने का मौका मिला, तो पहला विचार यही था कि मैं वहीं खत्म करूं जहां से शुरुआत की थी। मेरा इरादा 2-3 साल खेलने का था। ऐसा नहीं हो पाया, वो अलग कहानी है। लेकिन जहां से शुरू हुआ, वहीं खत्म हुआ।”

“मेरा एक छोटा सपना यह भी था कि मैं चेपॉक में अपना आखिरी मैच खेलूं। ऐसा नहीं हो पाया। मेरा आखिरी IPL मैच दिल्ली में हुआ। लेकिन अगर मैं चेपॉक में खेलता, तो और भी अच्छा होता। क्योंकि मेरा आखिरी वनडे मैच भी चेपॉक में ही था। उस मैदान से बहुत सारी यादें जुड़ी हैं, वह मेरे दिल के बहुत करीब है।”

अश्विन ने अपने आखिरी IPL विकेट, युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, “यह थोड़ा रणनीतिक था। क्रिकेट बदल चुका है। आज के Gen Z खिलाड़ी स्पिनर्स को उनकी लेंथ से ही मार देते हैं। इसलिए मैंने थोड़ा फुलर गेंद डालने की योजना बनाई ताकि ड्रिफ्ट मिले। अगर एक्स्ट्रा कवर पीछे हो, तो बल्लेबाज़ सोचता है कि मैं वाइड गेंद डालूंगा, लेकिन मैं पैड्स की तरफ टर्न के साथ गेंद डालता हूं। इसी तरह मैंने संजू सैमसन का विकेट लिया।”

“वैभव सूर्यवंशी असाधारण प्रतिभा हैं। जिस तरह वह छक्के मार रहे थे, मैंने उन्हें फ्लाइट से बीट करने की कोशिश की। मैंने लेंथ पीछे खींची ताकि वह लालच में आएं। वह बीट हुए लेकिन शॉट के बीच में खुद को एडजस्ट कर लिया और मिड-ऑन की तरफ रिवर्स स्वीप खेल दिया। मैंने बस कहा, ‘वाह, यह कमाल का खिलाड़ी है।’”

“14 साल की उम्र में आप उम्मीद करते हैं कि बड़े गेंदबाज़ों के सामने गलती या झिझक होगी, लेकिन उसमें ऐसा कुछ नहीं था। वह गणना करता है, खेल को पढ़ता है। जब किसी खिलाड़ी में स्किल, पावर, रणनीतिक समझ और दबाव में स्पष्टता हो, तो वह खतरनाक संयोजन होता है। उसमें यह सब है। बस उस पर ज्यादा दबाव मत डालिए। उसे अपनी क्रिकेट यात्रा जीने दीजिए। उसमें बहुत प्रतिभा है और मैं चाहूंगा कि वह रेड-बॉल क्रिकेट भी खेले।”