आईपीएल 2026: प्रियांश आर्या ने दूसरे सीजन के दबाव को कैसे किया पार!

प्रियांश आर्या के लिए उनके बचपन के कोच और मेंटर संजय भारद्वाज एक अलग ही भूमिका निभाते हैं— उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाना और आईपीएल के “दूसरे सीजन के दबाव” से बाहर निकालना। वहीं रिकी पोंटिंग उनकी तकनीकी कमियों को सुधारने में मदद करते हैं।

दिल्ली के इस प्रतिभाशाली बाएं हाथ के बल्लेबाज प्रियांश ने पिछले साल अपने पहले ही सीजन में पंजाब किंग्स के लिए 475 रन बनाकर पहचान बनाई थी। लेकिन इस सीजन में उस प्रदर्शन को दोहराना उनके लिए और बड़ी चुनौती बन गया।

आईपीएल में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जैसे पॉल वाल्थाटी और स्वप्निल असनोदकर, जो एक सीजन में चमके लेकिन फिर गायब हो गए। लेकिन गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज हमेशा से जानते थे कि प्रियांश अलग हैं।

इस सीजन में प्रियांश ने 11 गेंदों पर 39, 20 गेंदों पर 57 और 37 गेंदों पर 93 रन बनाकर साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक सीजन का चमत्कार नहीं हैं।

संजय भारद्वाज ने कहा, “मैंने उसे हमेशा यही समझाया है कि मैदान में उतरते समय कोई ‘घमंड’ या ‘स्टेटस’ लेकर मत जाओ। पिछले साल के रन तुम्हारी मेहनत और भगवान की कृपा का परिणाम हैं।”

उन्होंने बताया कि अक्सर युवा खिलाड़ी एक सीजन की सफलता के बाद दबाव और उम्मीदों का बोझ उठा लेते हैं।

“आईपीएल में अचानक मिली सफलता और पैसे के बाद बच्चे बदल जाते हैं। उन्हें अपने स्टारडम को बनाए रखने का दबाव रहता है।”

प्रियांश और उनके कोच के बीच गुरु-शिष्य जैसा रिश्ता है।

“जैसे गौतम गंभीर हमेशा मुझसे सलाह लेते थे, वैसे ही प्रियांश भी समझता है कि अगर गुरु कुछ कह रहा है, तो वह उसके भले के लिए ही है।”

भारद्वाज ने प्रियांश के माता-पिता की भी तारीफ की, जो सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं।

“उन्होंने प्रियांश से कहा कि तुम हमारे बारे में चिंता मत करो, बस अपने खेल पर ध्यान दो। हम हमेशा तुम्हारे साथ हैं।”

आजकल संजय भारद्वाज भोपाल के पास बिलकिसगंज में अपनी क्रिकेट अकादमी चलाते हैं, जहां वह “गुरुकुल” की तरह सख्त अनुशासन रखते हैं।

“यहां मोबाइल का इस्तेमाल दिन में सिर्फ एक घंटे के लिए होता है। रात 9:30 बजे लाइट बंद हो जाती है और सुबह 6 बजे सभी को मैदान में होना होता है।”

प्रियांश इस साल भी आईपीएल से पहले मैच प्रैक्टिस के लिए मंसा (पंजाब) गए थे और वहां 28 गेंदों में शतक जड़ा।

“उसकी सबसे खास बात यह है कि आईपीएल की चमक-दमक ने उसे बिल्कुल नहीं बदला। उसकी ताकत उसकी तेज बैट स्पीड और हैंड-आई कोऑर्डिनेशन है, और वह उसी पर कायम है।”

मैच के बाद भी प्रियांश अपने कोच से जुड़े रहते हैं।
“वह रात 1 बजे फोन करता है और सुबह हमारे ट्रेनीज़ से वीडियो कॉल पर बात करता है, जिससे बच्चों को प्रेरणा मिलती है।”

अंत में भारद्वाज ने कोचिंग की असली भूमिका समझाते हुए कहा, “कोच खिलाड़ी नहीं बनाता, वह सिर्फ माहौल बनाता है। उस माहौल का कितना फायदा उठाना है, यह खिलाड़ी पर निर्भर करता है। अगर कोच खिलाड़ी बनाता, तो हर खिलाड़ी गौतम गंभीर या प्रियांश आर्या बनता।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।