
इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने गुरुवार को कहा कि 2023 में शुरू हुई महिला प्रीमियर लीग (WPL) और भारत की महिला वनडे विश्व कप जीत ने भारतीय महिला क्रिकेट को एक ऐसी “अजेय ताकत” बना दिया है, जो आने वाले वर्षों में खेल को और गहराई देगी।
भारत ने 2025 के अंत में महिला वनडे विश्व कप जीतकर अपना पहला आईसीसी खिताब हासिल किया था। इस ऐतिहासिक सफलता का बड़ा श्रेय WPL को दिया गया, जिसने भारत में महिला क्रिकेट को पूरी तरह बदल दिया।
नासिर हुसैन ने जियोस्टार मीडिया डे के दौरान कहा, “महिला क्रिकेट में अब यह एक अजेय ताकत बन चुकी है। WPL और 50 ओवरों के विश्व कप की जीत का यह संयोजन भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उस जीत के बाद जो दृश्य देखने को मिले, वे अद्भुत थे। अब भारतीय महिला क्रिकेट को रोकना मुश्किल है और आने वाले समय में और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आएंगे।”
उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बदलाव टीम की गहराई (डेप्थ) में आया है।
“मेरे लिए सबसे बड़ी बात टीम की गहराई है। आज हम यह सोचने पर मजबूर हैं कि टीम का सर्वश्रेष्ठ संयोजन क्या हो। चोटों के कारण दो अहम खिलाड़ी भी बाहर हैं, खासकर अमनजोत कौर जैसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी।”
हुसैन के अनुसार, पहले भारतीय महिला टीम कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
“WPL से पहले की बात करें तो 2017 विश्व कप फाइनल के समय टीम काफी हद तक तीन-चार खिलाड़ियों पर निर्भर थी। मिताली राज जैसी महान खिलाड़ी अकेले दम पर टीम को संभालती थीं। फिर यह संख्या तीन-चार खिलाड़ियों तक बढ़ी।”
“लेकिन अब हालात अलग हैं। यह भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छी बात है क्योंकि अब टीम की स्टार खिलाड़ियों को लगातार प्रदर्शन करना पड़ता है। जैसे पुरुष क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी जैसे नए खिलाड़ी सामने आते हैं और किसी स्थापित खिलाड़ी की जगह खतरे में पड़ जाती है, वैसे ही अब महिला क्रिकेट में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।”
हुसैन का मानना है कि क्रिकेट में बढ़ते आर्थिक अवसर भी महिला क्रिकेट के विकास में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मैं सुन रहा हूं कि अब कई माता-पिता अपनी बेटियों को क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं क्योंकि WPL, बिग बैश और द हंड्रेड जैसी लीग्स में आर्थिक अवसर बढ़ गए हैं।”
“हाल ही में द हंड्रेड में कुछ खिलाड़ियों को मिले कॉन्ट्रैक्ट्स ने उनकी जिंदगी बदल दी है। डैनी गिब्सन और टिली कोर्टीन-कोलमैन जैसी खिलाड़ियों को जीवन बदल देने वाली रकम मिली है। अब क्रिकेट एक पेशा बन चुका है और मैं इसे नकारात्मक रूप में नहीं कह रहा हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “2017 में जब इंग्लैंड ने विश्व कप जीता था, मैं अपनी बेटी को फाइनल दिखाने ले गया था। इंग्लैंड ने भारत को हराया था और उस मैच के बाद कई लड़कियों ने सोचा कि क्रिकेट बहुत शानदार खेल है। लेकिन सिर्फ ‘कूल’ होना घर का खर्च नहीं चलाता।”
“आपको नौकरी, कॉन्ट्रैक्ट और आर्थिक सुरक्षा की जरूरत होती है। अब जब खेल में पैसा आ रहा है, ठीक वैसे ही जैसे पुरुषों के IPL में हुआ, तो उन क्षेत्रों से भी खिलाड़ी सामने आएंगे जहां पहले क्रिकेटर नहीं निकलते थे। पुरुष भारतीय क्रिकेट में भी पहले ज्यादातर खिलाड़ी मुंबई या दिल्ली से आते थे, लेकिन अब देश के हर कोने से प्रतिभाएं निकल रही हैं। यही बदलाव महिला क्रिकेट में भी देखने को मिलेगा।”
महिला क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए हुसैन ने कहा कि अब सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि बड़े शॉट खेलने की क्षमता भी जरूरी हो गई है।
उन्होंने कहा, “महिला क्रिकेट अब केवल टाइमिंग और टच का खेल नहीं रह गया है। मेग लैनिंग जैसी खिलाड़ी बेहतरीन टाइमिंग से गेंद को बाउंड्री तक पहुंचाती थीं और वह मेरे द्वारा देखी गई सबसे शानदार बल्लेबाजों में से एक हैं।”
“लेकिन अब आप पावर हिटर्स को देखिए। वे सीधे छक्के लगाने में विश्वास रखती हैं और खुद पर भरोसा करती हैं।”
हुसैन का मानना है कि इस विश्व कप में वही टीम सफल होगी जो सबसे ज्यादा छक्के लगाएगी।
“जो टीम सबसे ज्यादा छक्के लगाएगी, उसके टूर्नामेंट जीतने की संभावना सबसे अधिक होगी। लेकिन मैं कमेंट्री बॉक्स में हमेशा डॉट बॉल प्रतिशत पर भी नजर रखता हूं। पांच डॉट गेंदें खेलने के बाद एक छक्का लगाने का कोई फायदा नहीं है।”
उन्होंने संकेत दिया कि आधुनिक महिला क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी और निरंतर रन गति बनाए रखना सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होगी।








