बदकिस्मती से उम्मीद तक: ईशान किशन की टीम इंडिया की जर्सी दोबारा पाने की जंग!

“क्या मैं फिर से इंडिया की जर्सी पहन सकता हूं और अच्छा खेल सकता हूं?” — यह सवाल ईशान किशन ने खुद से तब पूछा, जब वह करीब दो साल तक टीम से बाहर रहे और आत्ममंथन किया।

उन्होंने खुद को साफ जवाब दिया — “हां।” और उसी का नतीजा था न्यूज़ीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में 32 गेंदों पर तूफानी 76 रन, जिससे 209 रन का लक्ष्य आसान लगने लगा।

जब उनसे पूछा गया कि टीम से बाहर होने के बाद उन्होंने खुद से क्या कहा, तो किशन बोले: “मैंने खुद से सिर्फ एक सवाल पूछा — क्या मैं दोबारा कर सकता हूं या नहीं? और मुझे बहुत साफ जवाब मिला।”

टीम में वापसी से पहले ईशान ने घरेलू क्रिकेट में कड़ी मेहनत की। उन्होंने बुची बाबू ट्रॉफी और डीवाई पाटिल जैसे टूर्नामेंट खेले और फिर झारखंड को पहली बार सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी जिताई, जहां उन्होंने पूरे सीजन में 500 से ज्यादा रन बनाए।

ईशान ने कहा, “मैं बस रन बनाना चाहता था। कभी-कभी अपने लिए खेलना जरूरी होता है, ताकि खुद के सवालों के जवाब मिल सकें — कि मैं अभी भी इंडिया के लिए खेलने लायक हूं या नहीं। इसलिए घरेलू क्रिकेट खेलना मेरे लिए बहुत जरूरी था। अच्छी बात यह रही कि हमने ट्रॉफी भी जीती और वही कॉन्फिडेंस मैं यहां लेकर आया।”

जब भारत 6/2 पर था और अभिषेक शर्मा व संजू सैमसन आउट हो चुके थे, तब भी ईशान शांत रहे।

उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ इस मैच पर ध्यान दे रहा था और सही मानसिक स्थिति में रहना चाहता था। मुझे पता था कि मैं अच्छी बल्लेबाज़ी कर रहा हूं, बस कहीं रन बनाकर खुद को साबित करना था।”

तेज स्ट्राइक रेट से खेलने के बावजूद उन्होंने जोखिम कम रखा।

ईशान बोले, “हम बिना ज्यादा रिस्क लिए खेलना चाहते थे। लेकिन पावरप्ले में ज्यादा से ज्यादा रन बनाना जरूरी था, क्योंकि 200 से ज्यादा का लक्ष्य हो तो शुरुआत मजबूत करनी ही पड़ती है।”

यह पारी सिर्फ रन नहीं थी — यह ईशान किशन की वापसी की कहानी थी।