फीफा विश्व कप: मेक्सिको ने रचा इतिहास, 1986 के बाद पहली बार नॉकआउट मुकाबला जीतकर बनाई प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह!

मेक्सिको ने मंगलवार को फीफा विश्व कप में 40 साल का इंतजार खत्म करते हुए नॉकआउट चरण में अपनी पहली जीत दर्ज की। प्रतिष्ठित एज़्टेका स्टेडियम में घरेलू दर्शकों के सामने खेले गए मुकाबले में मेक्सिको ने इक्वाडोर को 2-0 से हराकर राउंड ऑफ 16 में जगह बना ली।

पहले हाफ में जूलियन क्विनोनेस और राउल जिमेनेज के गोलों की बदौलत मेक्सिको ने यह ऐतिहासिक जीत हासिल की। यह 1986 में बुल्गारिया को हराने के बाद विश्व कप नॉकआउट चरण में मेक्सिको की पहली जीत है।

अब सह-मेजबान मेक्सिको का सामना अगले दौर में इंग्लैंड या डीआर कांगो से होगा। यह मुकाबला एज़्टेका स्टेडियम में खेला जाने वाला अंतिम विश्व कप मैच भी होगा।

आंधी-तूफान के चलते मैच की शुरुआत एक घंटे की देरी से हुई, लेकिन इससे स्टेडियम का माहौल बिल्कुल भी फीका नहीं पड़ा। 80 हजार से अधिक दर्शकों से खचाखच भरे एज़्टेका स्टेडियम में मुकाबला शुरू होने से पहले ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

मेक्सिको ने शुरुआती मिनटों में ही बढ़त बनाने का मौका बनाया, जब लुइस रोमो के क्रॉस पर राउल जिमेनेज का हेडर मामूली अंतर से बाहर निकल गया।

इसके बाद किशोर खिलाड़ी गिल्बर्टो मोरा भी बेहद कठिन कोण से शानदार शॉट लगाकर गोल करने के करीब पहुंचे, लेकिन गेंद दूर वाले पोस्ट से थोड़ा बाहर निकल गई।

इक्वाडोर ने धीरे-धीरे मुकाबले में वापसी की और गोंजालो प्लाटा के तेज काउंटर अटैक पर जॉन येबोआह का शॉट पोस्ट से टकराकर बाहर चला गया।

मेक्सिको ने आखिरकार 22वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली। रॉबर्टो अल्वाराडो ने शानदार थ्रू पास देकर जूलियन क्विनोनेस को मौका दिया। क्विनोनेस ने डिफेंडर को पीछे छोड़ते हुए जोरदार शॉट लगाया, जो सीधे टॉप कॉर्नर में जाकर लगा। यह टूर्नामेंट में उनका तीसरा गोल था।

मेक्सिको ने सिर्फ नौ मिनट बाद अपनी बढ़त 2-0 कर ली। इक्वाडोर ने अपने ही पेनल्टी बॉक्स के पास गेंद गंवा दी, जिसका मेक्सिको ने पूरा फायदा उठाया।

राउल जिमेनेज ने खुद मूव शुरू किया, फिर क्विनोनेस के साथ शानदार तालमेल बनाते हुए पहली ही टच में गेंद को टॉप कॉर्नर में पहुंचा दिया। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का 47वां गोल था। अब वह मेक्सिको के सर्वकालिक सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी जावियर हर्नांडेज़ से सिर्फ पांच गोल पीछे हैं।

दो गोल की बढ़त मिलने के बाद मेक्सिको पूरे आत्मविश्वास के साथ खेलता रहा, जबकि इक्वाडोर लगातार दबाव में नजर आया।

हाफ टाइम से पहले जॉन येबोआह ने जोरदार शॉट लगाया, लेकिन मेक्सिको के गोलकीपर राउल रेंगल ने शानदार डाइव लगाकर बेहतरीन बचाव किया।

दूसरे हाफ में इक्वाडोर के पास गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रहा, लेकिन वह रेंगल की कड़ी परीक्षा नहीं ले सका।

वहीं मेक्सिको सेट-पीस पर लगातार खतरनाक बना रहा। इक्वाडोर के गोलकीपर हर्नान गालिंडेज़ ने कप्तान सेसर मोंटेस के हेडर पर शानदार बचाव किया, जबकि मोंटेस का एक और हेडर मामूली अंतर से बाहर निकल गया।

मुकाबले के दौरान मेक्सिको ने गोल करने वाले क्विनोनेस, जिमेनेज और 17 वर्षीय गिल्बर्टो मोरा को मैदान से बाहर बुलाया। मोरा को दर्शकों ने खड़े होकर तालियों के साथ सम्मान दिया, क्योंकि वह पेले के बाद विश्व कप मैच की शुरुआत करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं

अंतिम मिनटों में इक्वाडोर ने वापसी की पूरी कोशिश की, लेकिन मेक्सिको की मजबूत रक्षा पंक्ति को भेद नहीं सका। टूर्नामेंट में मेक्सिको ने अब तक एक भी गोल नहीं खाया है।

निराशा के बीच इक्वाडोर के डिफेंडर पिएरो हिंकापिए को सैंटियागो जिमेनेज से बहस करने पर लाल कार्ड दिखाया गया।

अंतिम सीटी बजते ही मेक्सिको के खिलाड़ियों ने अपने प्रशंसकों के साथ ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। पूरे एज़्टेका स्टेडियम में मशहूर मारियाची गीत “एल रे” गूंज उठा और मेक्सिको ने 40 साल बाद विश्व कप नॉकआउट जीत का यादगार पल अपने नाम कर लिया।