
इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज़ में भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बीसीसीआई 19 जुलाई को वनडे सीरीज़ समाप्त होने के बाद एक समीक्षा बैठक करेगा। इस बैठक में टीम की लगातार हार के कारणों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि बोर्ड किसी भी तरह का आवेश में लिया गया फैसला नहीं करेगा। भारत पहले ही आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से टी20 सीरीज़ हार चुका है, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ भी पांच मैचों की सीरीज़ में एक मुकाबला बाकी रहते 0-3 से पिछड़ चुका है।
हालांकि मुख्य कोच गौतम गंभीर का अनुबंध 2027 वनडे विश्व कप तक है, इसलिए फिलहाल उनके पद पर कोई तत्काल खतरा नहीं माना जा रहा है।
सैकिया ने कहा, “बीसीसीआई फिलहाल इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टी20 सीरीज़ में भारतीय टीम के प्रदर्शन पर नजर रखे हुए है, जो उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।”
उन्होंने कहा कि बोर्ड किसी जल्दबाज़ी में फैसला नहीं करेगा, बल्कि पूरे प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा।
“यह कोई असामान्य स्थिति नहीं है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा दौर आ सकता है। हम इसे टीम का खराब फेज़ मानते हैं। 19 जुलाई को वनडे सीरीज़ खत्म होने और टीम के भारत लौटने के बाद मुख्य सदस्यों के साथ समीक्षा बैठक होगी, जिसमें इंग्लैंड दौरे पर हुई कमियों पर चर्चा की जाएगी। चूंकि अभी वनडे सीरीज़ बाकी है, हमें उम्मीद है कि टीम वापसी करेगी।”
सैकिया ने यह भी स्पष्ट किया कि समीक्षा बैठक का उद्देश्य सिर्फ टीम के प्रदर्शन और उसमें सुधार के उपायों पर चर्चा करना होगा।
“यह बैठक पूरी तरह टीम के प्रदर्शन और कमियों को दूर करने के तरीकों पर केंद्रित होगी। इसके अलावा किसी अन्य मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी।”
मुख्य कोच गौतम गंभीर के कार्यकाल में भारतीय टीम ने कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जिन्हें कोई याद नहीं रखना चाहेगा। इनमें घरेलू टेस्ट सीरीज़ में 0-3 से क्लीन स्वीप, न्यूजीलैंड के खिलाफ घर में वनडे सीरीज़ हार, आयरलैंड के खिलाफ पहली बार टी20 सीरीज़ गंवाना शामिल है। अब यदि इंग्लैंड के खिलाफ भी भारत 0-4 से सीरीज़ हारता है, तो यह टीम के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा।
समीक्षा बैठक में मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और गौतम गंभीर के शामिल होने की संभावना है। वहीं टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर की मौजूदगी पर संशय है क्योंकि उन्हें तीन मैचों की टी20 सीरीज़ के लिए जिम्बाब्वे रवाना होना है।
इससे पहले न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज़ हारने के बाद भी बीसीसीआई इसी तरह की समीक्षा बैठक कर चुका है।
हालांकि टी20 विश्व कप 2026 में भारत को लगातार दूसरा खिताब दिलाने वाले कोच गौतम गंभीर को सिर्फ चार महीने बाद हटाने की संभावना नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात में उनसे कई कठिन सवाल जरूर पूछे जा सकते हैं।
नई कप्तानी में खेल रही भारतीय टीम पहले जैसी नजर नहीं आ रही है और लगातार खराब प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टीम चयन समिति में गौतम गंभीर शामिल नहीं हैं, लेकिन प्लेइंग इलेवन चुनने में उनका प्रभाव सबसे अधिक माना जाता है।
जिम्बाब्वे दौरे के लिए संजू सैमसन को “आराम” देने के नाम पर बाहर रखने और उनकी जगह 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को मौका देने के फैसले की काफी आलोचना हो रही है।
संजू सैमसन का एक पुराना इंटरव्यू भी फिर से चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने बताया था कि गौतम गंभीर ने उनसे कहा था कि “अगर तुम लगातार 21 बार भी शून्य पर आउट हो जाओ, तब भी तुम्हें टीम से बाहर नहीं किया जाएगा।”
लेकिन जिम्बाब्वे दौरे से बाहर किए जाने के बाद इंग्लैंड में 76 रन पर ऑलआउट होने के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने सिर्फ इतना कहा कि उन्होंने सैमसन से बातचीत की थी और उस बातचीत का सम्मान करते हुए वह उसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं करेंगे।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब किसी खिलाड़ी को पहले खुलकर खेलने और लगातार असफल रहने के बावजूद टीम में बने रहने का भरोसा दिया जाए, फिर कुछ मैचों बाद उसे “आराम” के नाम पर बाहर कर दिया जाए, तो क्या खिलाड़ी को विरोधाभासी संकेत नहीं मिलते? ऐसे में क्या पूरी जिम्मेदारी सैमसन पर डाली जा सकती है?
लगातार बदलती प्लेइंग इलेवन पर भी सवाल
एक और बड़ा सवाल टीम चयन को लेकर उठ रहा है। इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ छह टी20 मुकाबलों (स्थगित मैच सहित) में भारत ने छह अलग-अलग प्लेइंग इलेवन उतारीं।
यह भी चर्चा है कि वनडे टीम में गौतम गंभीर की सोच विराट कोहली और रोहित शर्मा से मेल नहीं खाती। वहीं टी20 टीम में लगातार हो रहे प्रयोगों से खिलाड़ियों के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है। खिलाड़ी निडर होकर खेलने के बजाय अपनी जगह बचाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
टीम में बल्लेबाजी को नंबर-8 तक बढ़ाने की गंभीर की रणनीति और वॉशिंगटन सुंदर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर टी20 टीम की भविष्य की योजनाओं में उनकी जगह क्या है।
पूर्व भारतीय विकेटकीपर और मौजूदा कमेंटेटर दीप दासगुप्ता का मानना है कि अगले टी20 विश्व कप में अभी दो साल का समय बाकी है, इसलिए टीम प्रबंधन को नए खिलाड़ियों को आज़माने का पूरा अधिकार होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हार निराशाजनक जरूर है, लेकिन बड़ी तस्वीर भी देखनी होगी। नए खिलाड़ियों को आज़माने में कोई बुराई नहीं है। ये युवा खिलाड़ी इंग्लैंड जैसी परिस्थितियों के अभ्यस्त नहीं हैं। यहां की पिचें और खेलने का तरीका भारत से बिल्कुल अलग है। आईपीएल में पहले छह ओवरों में तेजी से रन बनाना अहम होता है, लेकिन इंग्लैंड में पावरप्ले के दौरान विकेट बचाकर खेलना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।”








