
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सोमवार को कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत जवाब देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसे “पब्लिक अथॉरिटी” यानी सरकारी संस्था नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही आयोग ने अपना 2018 का पुराना फैसला भी बदल दिया।
सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने कहा कि BCCI भले ही भारत में क्रिकेट चलाने और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में टीम भेजने जैसे बड़े काम करता हो, लेकिन यह सरकार के नियंत्रण या फंडिंग में नहीं है, इसलिए इसे सरकारी संस्था नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा, “आरटीआई कानून की धारा 2(h) के अनुसार BCCI को ‘पब्लिक अथॉरिटी’ नहीं माना जा सकता, इसलिए इस कानून के नियम उस पर लागू नहीं होते।”
यह फैसला उस आरटीआई आवेदन को खारिज करते हुए दिया गया जिसमें पूछा गया था कि BCCI भारत का प्रतिनिधित्व करने और खिलाड़ियों के चयन के लिए किन नियमों और अधिकारों का इस्तेमाल करता है।
इससे पहले 2018 में तत्कालीन सूचना आयुक्त एम. श्रीधर आचार्युलु ने BCCI को सार्वजनिक संस्था मानते हुए उसे आरटीआई के तहत लाने का आदेश दिया था। उन्होंने BCCI को सूचना अधिकारी नियुक्त करने और लोगों को जानकारी देने के निर्देश भी दिए थे।
लेकिन BCCI ने इस फैसले को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने मामला दोबारा CIC को भेज दिया और नए सिरे से सुनवाई करने को कहा।
दोबारा सुनवाई में CIC ने कहा कि BCCI कोई सरकारी संस्था नहीं है। यह तमिलनाडु सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड एक निजी संस्था है।
आयोग ने कहा कि BCCI अपनी कमाई खुद करता है, जैसे मीडिया राइट्स, स्पॉन्सरशिप, टिकट बिक्री और ब्रॉडकास्टिंग डील्स से।
फैसले में कहा गया, “BCCI के कामकाज, पैसे और प्रबंधन पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। इसलिए इसे पब्लिक अथॉरिटी नहीं माना जा सकता।”
आयोग ने यह भी कहा कि सिर्फ “जनता से जुड़ा काम” करने से कोई संस्था आरटीआई के दायरे में नहीं आ जाती।
यह मामला 2017 की एक आरटीआई से शुरू हुआ था, जिसमें पूछा गया था कि BCCI भारत का प्रतिनिधित्व करने और खिलाड़ियों का चयन करने का अधिकार कैसे इस्तेमाल करता है।
खेल मंत्रालय ने उस समय कहा था कि उनके पास यह जानकारी नहीं है और वे आवेदन BCCI को नहीं भेज सकते क्योंकि BCCI खुद को सरकारी संस्था नहीं मानता।
CIC ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक किसी संस्था को सरकार से बड़ा फंड या सीधा नियंत्रण नहीं मिलता, तब तक उसे आरटीआई के तहत नहीं लाया जा सकता।








