एशिया कप:फुल्टन ने चीन पर जीत के बावजूद भारत की मुश्किलों को माना!

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन अपनी टीम के प्रदर्शन से ज़्यादा खुश नहीं दिखे, लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि टूर्नामेंट की शुरुआत जीत के साथ करना ही सबसे अहम था।

वर्ल्ड नंबर 7 भारत ने एशिया कप के अपने पहले मैच में 23वें नंबर की चीन टीम को 4-3 से हराया, लेकिन इस दौरान टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी और खेल फीका नजर आया।

पोस्ट-मैच इंटरैक्शन में फुल्टन ने कहा: “पहला हाफ अच्छा था, हम अच्छी पोज़िशन में आए लेकिन फिर कुछ गलतियां कीं। अच्छी बात यह रही कि हमारे पास एक और गियर था। दूसरे हाफ में हमें कुछ पेनल्टी कॉर्नर मिले और हमने उन्हें कन्वर्ट भी किया। स्ट्रोक को गोल में नहीं बदल पाना दुर्भाग्यपूर्ण था।”

दूसरे हाफ में कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक मिस किया, लेकिन उन्होंने तीन पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला।

फुल्टन बोले: “हमने मैच जीतने लायक खेला, लेकिन अपनी उम्मीदों के मुताबिक नहीं खेले। पहला हर्डल अच्छा हर्डल था। टीम में बहुत फाइट दिखी, लेकिन हमने कई मौके गंवाए और कुछ सॉफ्ट गोल भी खा लिए।”

उन्होंने साफ कहा कि भले ही नतीजा उनके पक्ष में रहा, लेकिन टीम को अभी कई क्षेत्रों में सुधार करने की ज़रूरत है।

“सबसे ज़रूरी था तीन पॉइंट्स हासिल करना और हमने वो कर लिया।”

फुल्टन ने यह भी दोहराया कि किसी भी टीम को हल्के में लेना गलती होगी।

“मैं हर टीम से फाइट की उम्मीद करता हूं। हम यहां सबसे हाई रैंक्ड टीम और फ़ेवरेट्स हैं, तो हर टीम हमें हराने के लिए खुद को और ऊपर उठाएगी और हमें उस चैलेंज को मैनेज करना होगा।”

“मैंने कई मैच देखे हैं जब आप अच्छा नहीं खेलते लेकिन जीत जाते हैं। और जीत हासिल करना ही अहम है।”

कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने भी माना कि चीन के खिलाफ मैच से सबक लेना ज़रूरी है।

“ये मुश्किल मैच था लेकिन जीतना अहम था। आखिरी सीटी तक हम लड़े। हमारे लिए ये अच्छा सबक है।”

उन्होंने ज़ोर दिया कि डिफेंस मज़बूत करना होगा।

“ज़्यादातर टीमें यहां बैकफुट पर खेलना पसंद करती हैं, गहराई में बैठकर काउंटर अटैक करती हैं। हमारे लिए ये सबक है कि डिफेंसिव लाइन मज़बूत रखनी होगी।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।