
पूर्व भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज़ सबा करीम का मानना है कि अब समय आ गया है कि श्रेयस अय्यर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी कप्तानी की अलग पहचान बनाएं और आईपीएल में दिखाई गई अपनी शानदार रणनीतिक सोच को भारतीय टीम के लिए भी लागू करें।
टी20 विश्व कप जीत के बाद सूर्यकुमार यादव की जगह कप्तान बनाए गए श्रेयस अय्यर अब तक एक भी मुकाबला नहीं जीत सके हैं। भारत पहले आयरलैंड के खिलाफ 0-2 से सीरीज़ हार गया और उसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ पहले मैच के धुल जाने के बाद लगातार तीन टी20 मैच हारकर सीरीज़ में 0-3 से पिछड़ गया।
जियोहॉटस्टार पर बातचीत के दौरान सबा करीम ने कहा, “मुझे लगता है कि अब श्रेयस अय्यर के लिए कप्तान के रूप में खुद को स्थापित करने का समय आ गया है। आईपीएल में हमने उनकी जो रणनीतिक कप्तानी देखी है, वह अभी तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नजर नहीं आई है।”
उन्होंने टीम चयन और बल्लेबाजी क्रम पर भी सवाल उठाए।
“उदाहरण के तौर पर, जब श्रेयस खुद बल्लेबाजी कर रहे थे, तब शिवम दुबे को नंबर पांच पर भेजा गया। मुझे यह फैसला बिल्कुल समझ नहीं आया। यह वही श्रेयस अय्यर नहीं हैं जिन्हें हमने आईपीएल में देखा है। अगर वह अभी आईपीएल में कप्तानी कर रहे होते, तो तिलक वर्मा को शिवम दुबे से पहले नंबर पांच पर भेजते।”
करीम ने आगे कहा, “जब आप कप्तान के तौर पर बीच में बल्लेबाजी कर रहे होते हैं, तब अपने साथी बल्लेबाज़ को दिए जाने वाले संदेश बेहद अहम होते हैं। हो सकता है कि इस भूमिका में पूरी तरह ढलने में उन्हें थोड़ा समय लगे।”
हालांकि, उन्होंने श्रेयस की बल्लेबाजी की जमकर तारीफ की और कहा कि यही उनकी कप्तानी को भी मजबूत बनाएगी।
“सबसे बड़ी सकारात्मक बात यह है कि उन्होंने बल्ले से रन बनाए हैं। इससे किसी भी कप्तान का आत्मविश्वास बढ़ता है। जब आपका खुद का प्रदर्शन अच्छा होता है तो कप्तानी भी अपने आप बेहतर हो जाती है। उम्मीद है कि आने वाले मैचों में यह देखने को मिलेगा। मैं चाहता हूं कि श्रेयस अपनी अलग पहचान बनाएं। वह इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं, अब समय है इसे साबित करने का।”
सबा करीम का मानना है कि पांचवें टी20 मुकाबले में भारत को मध्यक्रम में एक अनुभवी दाएं हाथ के बल्लेबाज़ की जरूरत है, इसलिए संजू सैमसन को मौका मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मैं टीम संयोजन में बदलाव देखना चाहता हूं। भारत को मध्यक्रम में एक दाएं हाथ के बल्लेबाज़ की जरूरत है और फिलहाल संजू सैमसन सबसे उपयुक्त विकल्प हैं। लगातार बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों की श्रृंखला को तोड़ने के लिए एक अनुभवी दाएं हाथ का बल्लेबाज़ जरूरी है और संजू से बेहतर विकल्प कोई नहीं है। सवाल सिर्फ यह है कि उनकी जगह कौन बाहर जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर टीम प्रबंधन तिलक वर्मा को बरकरार रखता है, तो फिर शिवम दुबे की जगह संजू सैमसन को शामिल करना चाहिए। इससे बल्लेबाजी और गहरी तथा मजबूत होगी।”
“मैं वॉशिंगटन सुंदर की जगह सूर्यांश शेडगे को देखना चाहूंगा। वह दो-तीन ओवर मीडियम पेस गेंदबाजी कर सकते हैं, जिससे छठे गेंदबाज़ की भूमिका भी पूरी हो जाएगी।”
करीम ने भारत की हार के लिए बल्लेबाज़ों की खराब रणनीति और परिस्थितियों के अनुरूप खुद को न ढाल पाने को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, “आपको विपक्षी गेंदबाज़ों की रणनीति को समझना होता है। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो नतीजे आपके पक्ष में नहीं आएंगे। भारतीय बल्लेबाज़ों के साथ भी यही हुआ। जोफ्रा आर्चर और जोश टंग लगातार शॉर्ट गेंदें डालते रहे और हमने बैकफुट पर आक्रामक शॉट खेलने की कोशिश में दो विकेट गंवा दिए।”
उन्होंने आगे कहा, “अभिषेक शर्मा भी आउट हुए, भले ही वह आदिल राशिद की गेंद पर थे, लेकिन विकेट तो विकेट होता है। नई गेंद के खिलाफ भारतीय बल्लेबाज़ मैदान के आयामों का सही आकलन नहीं कर पाए। उस समय जरूरत स्ट्राइक रोटेट करने की थी।”
“अगर हम आर्चर और टंग के शुरुआती स्पेल को संभलकर खेलते और शुरुआती विकेट नहीं गंवाते, तो बाद में तेजी से रन बना सकते थे।”
करीम ने कहा कि भारत का मिडिल ओवरों में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा।
“मुझे सबसे ज्यादा चिंता मिडिल ओवरों में हमारी रन बनाने की गति को लेकर हुई। दूसरी ओर इंग्लैंड ने हमारे स्पिनरों को उनका पूरा स्पेल तक नहीं फेंकने दिया। यह भारतीय टीम अभी भी इंग्लैंड की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल नहीं पा रही है।”
उन्होंने अंत में कहा, “हम अब भी ऐसे बल्लेबाजी कर रहे हैं जैसे भारत की छोटी बाउंड्री वाले मैदानों पर खेल रहे हों। विश्व कप जीतने वाली टीम से इस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की जाती।”








