फीफा विश्व कप: केप वर्डे ने इतिहास रचा, सऊदी अरब से ड्रॉ खेलकर नॉकआउट में बनाई जगह!

विश्व कप में पहली बार खेल रही केप वर्डे की सपनों जैसी यात्रा शुक्रवार को भी जारी रही। टीम ने सऊदी अरब के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेलकर फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ 32 में ऐतिहासिक जगह बना ली। इस शानदार उपलब्धि के साथ अब नॉकआउट मुकाबले में उसका सामना मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना से मियामी में होगा।

ग्रुप H में स्पेन ने उरुग्वे को 1-0 से हराकर सात अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि केप वर्डे ने लगातार तीन ड्रॉ के दम पर दूसरा स्थान अपने नाम किया। इसके साथ ही यह छोटा अफ्रीकी देश विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंचने वाला इतिहास का सबसे छोटा देश बन गया। वहीं उरुग्वे और सऊदी अरब, दोनों दो-दो अंकों के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गए।

‘प्लेयर ऑफ द मैच’ डेरॉय डुआर्टे ने कहा, “ऐसा लग रहा है जैसे मैं कोई सपना जी रहा हूं। बचपन से मेरा सपना था कि मैं विश्व कप में खेलूं।”

उन्होंने आगे कहा, “कल से हम अर्जेंटीना के बारे में सोचना शुरू करेंगे। यह बहुत कठिन मुकाबला होगा, लेकिन हमें विश्वास रखना होगा। फुटबॉल में कुछ भी संभव है।”

अपने पहले ही विश्व कप में केप वर्डे ने इतिहास रच दिया है। टीम ने पहले स्पेन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ संघर्षपूर्ण ड्रॉ खेला और फिर उरुग्वे के खिलाफ 2-2 की शानदार वापसी करते हुए पूरे ग्रुप चरण में जबरदस्त जुझारूपन दिखाया।

अंतिम सीटी बजने के बाद केप वर्डे के खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ अपने मोबाइल फोन पर स्पेन और उरुग्वे के मैच का नतीजा देखने लगे। जैसे ही उन्हें क्वालिफाई करने की खबर मिली, उन्होंने अपने प्रशंसकों के साथ जमकर जश्न मनाया। पूरे मुकाबले के दौरान समर्थक ढोल-नगाड़ों और गीतों के साथ लगातार टीम का उत्साह बढ़ाते रहे।

मैच खत्म होने के काफी देर बाद तक कई खिलाड़ी मैदान पर ही मौजूद रहे। उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया, तस्वीरें खिंचवाईं और राष्ट्रीय ध्वज ओढ़कर अपने देश के फुटबॉल इतिहास के सबसे बड़े पल का जश्न मनाया। केप वर्डे की आबादी करीब पांच लाख है।

अगर मैच की बात करें तो मुकाबले में ज्यादा गुणवत्ता देखने को नहीं मिली, लेकिन पूरे मैच में केप वर्डे ज्यादा खतरनाक टीम नजर आई। उसने कई अच्छे मौके बनाए, लेकिन उन्हें गोल में नहीं बदल सकी। सबसे बेहतरीन मौका लारोस डुआर्टे के पास आया, लेकिन आमने-सामने की स्थिति में वह गोलकीपर मोहम्मद अलोवैस को नहीं भेद सके।

दोनों टीमों ने तेज शुरुआत की क्योंकि दोनों के पास नॉकआउट में पहुंचने का मौका था। हालांकि पहले हाफ में गलत पास और खराब टैकल के कारण खेल बार-बार बाधित होता रहा।

सऊदी अरब ने पहला शॉट पहले हाफ के इंजरी टाइम में लगाया, जब मोहम्मद कन्नो के हेडर को 40 वर्षीय गोलकीपर वोज़िन्हा ने आसानी से रोक लिया। वोज़िन्हा की मां, जो वीजा में देरी के कारण अमेरिका देर से पहुंची थीं, स्टैंड्स से अपने बेटे का उत्साह बढ़ा रही थीं।

दूसरे हाफ में भी केप वर्डे का दबदबा बना रहा। टीम ने कुल 15 शॉट लगाए, लेकिन खराब फिनिशिंग के कारण जीत का गोल नहीं कर सकी। वहीं सऊदी अरब पूरे दूसरे हाफ में कोई प्रभावी आक्रमण करने में नाकाम रहा।

सऊदी अरब के मुख्य कोच जॉर्जियोस डोनिस ने माना कि उनकी टीम मैच पर नियंत्रण नहीं बना सकी और पर्याप्त मौके भी नहीं बना पाई।

उन्होंने कहा, “हम मौके बनाने में संघर्ष करते रहे। जब आप खेल की रफ्तार पर नियंत्रण नहीं रख पाते और आक्रमण में खतरा पैदा नहीं कर पाते, तो जीतना बहुत मुश्किल हो जाता है।”

सऊदी अरब का टूर्नामेंट सिर्फ तीन मैचों में एक गोल के साथ समाप्त हो गया। पूरे अभियान के दौरान टीम कभी भी ज्यादा प्रभावशाली नजर नहीं आई और ह्यूस्टन में निराशाजनक प्रदर्शन के साथ उसका विश्व कप सफर खत्म हो गया।