ईशान किशन के लिए भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाना क्यों मुश्किल है!

भारत के पूर्व कप्तान और पूर्व चयन समिति अध्यक्ष कृष्णमाचारी श्रीकांत ने गुरुवार को कहा कि ईशान किशन के पास सफल टेस्ट बल्लेबाज बनने के लिए सभी जरूरी गुण हैं, लेकिन फिलहाल भारतीय टेस्ट टीम में उनके लिए जगह बनाना आसान नहीं है।

करीब दो साल तक भारतीय टीम से बाहर रहने के बाद ईशान किशन ने शानदार वापसी की है। पहले उन्होंने टी20 टीम में वापसी की और फिर अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में शतक जड़कर अपनी दावेदारी मजबूत की।

हालांकि श्रीकांत का मानना है कि ईशान एक बेहतरीन विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, लेकिन टेस्ट टीम में उनके लिए फिलहाल कोई स्पष्ट स्थान नहीं है।

उन्होंने कहा, “मैं ईशान किशन का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। उन्होंने लगभग शून्य से वापसी की है और शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। मुझे उनका खेल बहुत पसंद है। उनके शॉट्स की गुणवत्ता, टाइमिंग, ताकत और सहज बल्लेबाजी कमाल की है। ईशान सभी फॉर्मेट खेलने की क्षमता रखते हैं। वह टेस्ट क्रिकेट भी खेल सकते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से उनके लिए कोई जगह नहीं है।”

दरअसल, 2024 में घरेलू क्रिकेट न खेलने की वजह से ईशान को बीसीसीआई के केंद्रीय अनुबंध से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने फिर से शुरुआत की, अपनी अकादमी में कड़ी मेहनत की और बुची बाबू ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट में भी हिस्सा लिया।

श्रीकांत ने कहा, “बीसीसीआई ने उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए कहा, जो एक बहुत अच्छा फैसला था। इससे उन्हें काफी फायदा हुआ।”

इसके बाद ईशान ने झारखंड की कप्तानी करते हुए सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में भी शानदार प्रदर्शन किया।

हालांकि श्रीकांत का मानना है कि मौजूदा चयन समिति घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुछ खिलाड़ियों को पर्याप्त मौके नहीं दे रही है।

उन्होंने विशेष रूप से यशस्वी जायसवाल का उदाहरण दिया।

“यशस्वी जायसवाल एक असाधारण खिलाड़ी हैं। मेरे हिसाब से वह सभी फॉर्मेट खेलने की क्षमता रखते हैं। लेकिन उनका उपयोग केवल टेस्ट क्रिकेट में किया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में उन्होंने शतक भी लगाया था। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी उनके नाम टेस्ट शतक हैं। वह टी20 क्रिकेट में भी शानदार खिलाड़ी हैं। दुर्भाग्य से छोटे फॉर्मेट में उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया है।”

1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य श्रीकांत ने कहा कि भारतीय टीम में ओपनिंग स्लॉट को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा है।

“ओपनिंग स्लॉट में सबसे ज्यादा परेशानी है। कभी आप टीम में होते हैं, कभी नहीं। कभी कोई दूसरा आपकी जगह ले लेता है। फिर वापसी करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन मुझे लगता है कि जायसवाल सभी फॉर्मेट के खिलाड़ी हैं।”

श्रीकांत का मानना है कि आजकल बहुत ज्यादा क्रिकेट खेले जाने के कारण हालिया प्रदर्शन को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा है।

“दुर्भाग्य से कुछ खिलाड़ियों को मौका मिलता है और फिर उन्हें भुला दिया जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। निरंतरता होनी चाहिए। लेकिन आजकल इतना ज्यादा क्रिकेट खेला जा रहा है कि लोग पिछली सीरीज के प्रदर्शन भी भूल जाते हैं।”

हालांकि उन्होंने चयन समिति के काम की तारीफ भी की।

“घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुछ खिलाड़ियों को अभी भी भारतीय टीम में जगह नहीं मिलती। मुझे लगता है कि चयन समिति को इस दिशा में सुधार करना चाहिए। अजीत अगरकर शानदार काम कर रहे हैं, लेकिन टेस्ट क्रिकेट सबसे बड़ा फॉर्मेट है और वहां शायद कुछ अलग सोच अपनानी होगी।”

ईशान के बचपन के कोच उत्तम मजूमदार ने उनकी तकनीक में आए बदलावों के बारे में बताया।

उन्होंने कहा, “एक समय ऐसा था जब ईशान रन नहीं बना पा रहे थे। फिर एक दौर आया जब वह अच्छी शुरुआत तो कर रहे थे लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल पा रहे थे। हमने बैठकर बात की और उन्होंने महसूस किया कि उन्हें अपने शॉट्स थोड़ा देर से खेलने चाहिए।”

कोच के अनुसार, अब ईशान पहले की तुलना में आधा सेकंड देर से शॉट खेलते हैं और यही बड़ा बदलाव साबित हुआ है।

“उनकी स्टांस में अब ज्यादा मजबूती, आत्मविश्वास और नियंत्रण दिखता है। वह गेंद को शरीर के करीब खेलते हैं और उससे दूर नहीं जाते। इससे उनके खेल में काफी सुधार आया है। अब वह ज्यादा संतुलित और नियंत्रित नजर आते हैं।”

मजूमदार ने बताया कि ईशान ने मानसिक रूप से मजबूत बनने के लिए योग और एकाग्रता बढ़ाने वाली थेरेपी का भी सहारा लिया।

“उन्होंने योग और कॉन्सन्ट्रेशन थेरेपी के जरिए मानसिक बदलाव किए। वह घंटों नेट्स में अभ्यास करते थे। इसी मेहनत की वजह से वह घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर पाए।”

ईशान की हालिया फॉर्म ने उनकी भारतीय टीम में वापसी को मजबूत किया है, लेकिन टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए उन्हें अभी भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।