
भारतीय बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने कहा है कि बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) को प्रस्तावित स्कोरिंग बदलावों को लेकर सावधानी से कदम उठाना चाहिए। ओलंपिक पदक विजेता साइना का मानना है कि मौजूदा 21-पॉइंट सिस्टम बैडमिंटन के लिए जरूरी तीव्रता और सहनशक्ति को बनाए रखता है।
BWF ने वर्तमान 3×21 स्कोरिंग सिस्टम की जगह 3×15 फॉर्मेट लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव पर 25 अप्रैल को डेनमार्क के हॉर्सेंस में होने वाली BWF की वार्षिक आम बैठक में मतदान होना है।
PTI को दिए एक इंटरव्यू में साइना ने कहा, “बैडमिंटन की समृद्ध परंपरा रही है और ऑल इंग्लैंड ओपन तथा BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसे टूर्नामेंट हमेशा अपनी तीव्रता और सहनशक्ति के कारण खास रहे हैं। स्कोरिंग या फॉर्मेट में किसी भी बदलाव पर बहुत सावधानी से विचार किया जाना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा, “मौजूदा 21-पॉइंट सिस्टम ने अच्छा काम किया है और खिलाड़ी कई वर्षों में इसके अनुसार ढल चुके हैं। अगर बदलाव किए जाते हैं तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि रैलियों की गुणवत्ता और खेल का प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन प्रभावित न हो। अंत में ध्यान निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और खेल की भावना पर होना चाहिए।”
नए BWF वर्ल्ड टूर स्ट्रक्चर के तहत एशिया और यूरोप में होने वाले पांच सुपर 1000 टूर्नामेंट में सिंगल्स इवेंट का नया फॉर्मेट लागू किया जाएगा। पारंपरिक सीधे नॉकआउट सिस्टम की जगह 48 खिलाड़ी पहले ग्रुप स्टेज में खेलेंगे, जिसके बाद नॉकआउट राउंड होंगे।
डबल्स मुकाबले हालांकि पहले की तरह 32 जोड़ियों के नॉकआउट ड्रॉ में ही खेले जाएंगे। हर सुपर 1000 टूर्नामेंट 11 दिनों तक चलेगा और दो वीकेंड में आयोजित होगा।
साइना ने कहा कि BWF को खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और भलाई पर भी अधिक ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर इतना व्यस्त है कि खिलाड़ियों को रिकवरी के लिए बहुत कम समय मिलता है, जिससे चोट और थकान का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा, “बैडमिंटन शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से बहुत कठिन खेल है। रैलियां लंबी होती हैं, खेल की गति बहुत तेज होती है और खिलाड़ी लगभग हर हफ्ते टूर्नामेंट खेलते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “BWF ने कैलेंडर को व्यवस्थित करने की कोशिश की है, लेकिन खिलाड़ी के नजरिए से रिकवरी का समय बेहद जरूरी है। चोट और थकान प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं और खिलाड़ियों के करियर को भी छोटा कर सकते हैं।”
पिछले हफ्ते ऑल इंग्लैंड ओपन में भारतीय शटलर लक्ष्य सेन खिताब जीतने के करीब पहुंचे थे, लेकिन पुरुष एकल फाइनल में चीनी ताइपे के लिन चुन-यी से हारकर उन्हें उपविजेता से संतोष करना पड़ा। इससे पहले भी लक्ष्य 2022 में इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे थे।
साइना ने लक्ष्य की तारीफ करते हुए कहा, “ऑल इंग्लैंड ओपन के फाइनल में दो बार पहुंचना बहुत बड़ी उपलब्धि है। यह बैडमिंटन के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक है और यहां प्रतिस्पर्धा का स्तर हमेशा बहुत ऊंचा होता है।”
उन्होंने कहा, “कभी-कभी खेल में जीत और उपविजेता बनने के बीच फर्क सिर्फ कुछ अंकों या छोटे पलों का होता है। अगर कोई खिलाड़ी बार-बार उस स्तर तक पहुंच रहा है तो इसका मतलब है कि खिताब दूर नहीं है।”
35 वर्षीय पूर्व विश्व नंबर-1 साइना ने भारतीय युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भी सराहना की, लेकिन कहा कि शीर्ष स्तर पर निरंतरता के लिए शारीरिक ताकत, मैच टेम्परामेंट और रणनीतिक समझ बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा, “शीर्ष स्तर पर लगातार प्रदर्शन के लिए कई सालों तक फिटनेस, अनुशासन और मानसिक मजबूती जरूरी होती है। खिलाड़ियों को पूरे सीजन में अपना स्तर बनाए रखना पड़ता है, सिर्फ कुछ टूर्नामेंट में नहीं।”
उन्होंने अंत में कहा, “जब पीवी सिंधु और मैं नियमित रूप से खेलते थे, तब हमारा फोकस हमेशा तैयारी, रिकवरी और लगातार बेहतर बनने पर रहता था। मौजूदा पीढ़ी के लिए जरूरी है कि वे अपनी शारीरिक ताकत, मैच टेम्परामेंट और रणनीतिक समझ को लगातार बेहतर बनाते रहें, ताकि बड़े टूर्नामेंटों में निरंतर अच्छा प्रदर्शन कर सकें।”








