टी20 वर्ल्ड कप: अंतिम चार दावेदारों पर एक रणनीतिक नज़र!

20 टीमों में से अब सिर्फ चार टीमें बची हैं, क्योंकि इस हफ्ते टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल खेले जाएंगे। बुधवार को कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका का सामना न्यूजीलैंड से होगा, जबकि गुरुवार को मुंबई में मौजूदा चैंपियन भारत की भिड़ंत इंग्लैंड से होगी।

दक्षिण अफ्रीका

सालों तक टूर्नामेंट के अहम मौकों पर चूकने के कारण “चोकर्स” कहलाने वाली एडन मार्करम की दक्षिण अफ्रीका इस बार टूर्नामेंट की इकलौती अजेय टीम है और अपने पहले वर्ल्ड कप खिताब की तलाश में आत्मविश्वास से भरी हुई है। दो साल पहले उपविजेता रहने वाली प्रोटीज़ टीम लगातार सात मैच जीत चुकी है, जिसमें सुपर आठ में भारत और वेस्ट इंडीज पर शानदार जीत शामिल है।

मार्करम ने सात मैचों में 268 रन बनाकर बल्लेबाजी की अगुवाई की है। क्विंटन डी कॉक, रयान रिकेल्टन, डेवाल्ड ब्रेविस, डेविड मिलर और ट्रिस्टन स्टब्स जैसे बल्लेबाज लंबे शॉट खेलने में सक्षम हैं। गेंदबाजी में केशव महाराज अपनी बाएं हाथ की स्पिन से बल्लेबाजों को जकड़ सकते हैं, जबकि लुंगी एनगिडी ने 12 विकेट लेकर अपनी धीमी ऑफ-कटर से बड़े बल्लेबाजों को चकमा दिया है।

हालांकि दक्षिण अफ्रीका की असली चुनौती मानसिक हो सकती है — वर्ल्ड कप के अहम मौकों पर बार-बार नाकाम रहने का इतिहास। वे 50 ओवर वर्ल्ड कप में पांच बार और टी20 में दो बार सेमीफाइनल में पहुंचे। 2024 में पहली बार टी20 फाइनल में पहुंचे, लेकिन भारत से सात रन से हार गए थे, जबकि आखिरी चार ओवर में 26 रन चाहिए थे और छह विकेट बाकी थे।

हालांकि पिछले साल वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीतने वाली टीम के आठ खिलाड़ी इस टी20 टीम में भी हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।

न्यूजीलैंड

न्यूजीलैंड सुपर आठ में इंग्लैंड से हारने के बावजूद बेहतर नेट रन रेट के आधार पर सेमीफाइनल में पहुंचा। ग्रुप स्टेज में दक्षिण अफ्रीका ने उन्हें हराया था, लेकिन वे कोलकाता में हिसाब बराबर करने की कोशिश करेंगे।

कप्तान और प्रमुख स्पिनर मिशेल सैंटनर, ग्लेन फिलिप्स और रचिन रवींद्र टीम को संतुलन देते हैं। सैंटनर के पास लॉकी फर्ग्यूसन की तेज गेंदबाजी से लेकर ईश सोढ़ी की लेग स्पिन तक विकल्प हैं। टीम फील्डिंग में बेहद चुस्त है और टिम सीफर्ट अक्सर पावरप्ले में तेज शुरुआत देते हैं।

हालांकि कीवी टीम में अन्य तीन सेमीफाइनलिस्टों जैसी मैच बदलने वाली स्टार पावर कम दिखती है। वे अंतिम चार में ऐसी इकलौती टीम हैं जिसने दो मैच गंवाए हैं — इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका से। सात मैचों में उन्होंने केवल अफगानिस्तान और श्रीलंका जैसी टेस्ट खेलने वाली टीमों को हराया है।

इंग्लैंड

हैरी ब्रूक की कप्तानी में इंग्लैंड ने सुपर आठ में शानदार प्रदर्शन किया और श्रीलंका, पाकिस्तान तथा न्यूजीलैंड को हराकर ग्रुप 2 में शीर्ष स्थान हासिल किया। ग्रुप स्टेज में उनका प्रदर्शन कुछ उतार-चढ़ाव भरा रहा, जिसमें नेपाल के खिलाफ आखिरी गेंद पर रोमांचक जीत भी शामिल थी।

ब्रूक ने पाकिस्तान के खिलाफ नंबर तीन पर आकर शतक जमाया और कप्तानी की परिपक्वता दिखाई। अपने पहले वर्ल्ड कप में कप्तान के तौर पर वे एक समझदार रणनीतिकार के रूप में उभर रहे हैं।

विल जैक्स एक ऐसे ऑलराउंडर हैं जो बल्ले से विस्फोटक साबित हो सकते हैं और सात मैचों में चार बार ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ रहे हैं। जोफ्रा आर्चर ने शुरुआती दो मैचों में महंगे साबित होने के बाद अब अपनी पुरानी धार वापस पा ली है।

ओपनर जोस बटलर ने सात मैचों में सिर्फ 62 रन बनाए हैं और सितंबर के बाद से कोई टी20 अर्धशतक नहीं लगाया, लेकिन इंग्लैंड अपने पूर्व कप्तान पर भरोसा बनाए रखेगा।

भारत

डिफेंडिंग चैंपियन भारत ने सुपर आठ में जिम्बाब्वे और वेस्ट इंडीज को हराकर सही समय पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। टूर्नामेंट की शुरुआत में स्पष्ट दावेदार मानी जा रही सूर्यकुमार यादव की टीम ग्रुप स्टेज में थोड़ी अस्थिर नजर आई थी। अमेरिका के खिलाफ पहले मैच में वे 77/6 पर संघर्ष कर रहे थे, लेकिन सूर्यकुमार की 84 रन की पारी ने उन्हें बचाया।

संजू सैमसन को ओपनिंग पर लाकर भारत ने अभिषेक शर्मा और ईशान किशन की दो बाएं हाथ के बल्लेबाजों की जोड़ी को तोड़ा, जिससे टीम को संतुलन और मजबूती मिली।

गेंदबाजी में नंबर-1 टी20 गेंदबाज वरुण चक्रवर्ती ने 12 विकेट लेकर स्पिन आक्रमण की अगुवाई की है, जबकि जसप्रीत बुमराह एक बार फिर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाजों में साबित हुए हैं। वानखेड़े स्टेडियम में 35,000 दर्शकों का घरेलू समर्थन भारत के लिए 12वें खिलाड़ी जैसा होगा।

हालांकि अभिषेक शर्मा की फॉर्म चिंता का विषय है। टूर्नामेंट की शुरुआत उन्होंने दुनिया के नंबर-1 टी20 बल्लेबाज के रूप में की थी, लेकिन लगातार तीन शून्य के बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ अर्धशतक लगाया। वेस्ट इंडीज के खिलाफ वह 10 रन पर आउट हुए और इंग्लैंड शुरुआती विकेट के लिए उन्हीं को निशाना बनाएगा।

अब देखना होगा कि कौन सी टीम दबाव को बेहतर तरीके से संभालती है और फाइनल में जगह बनाती है।