सौरव गांगुली ने मोहम्मद शमी की टीम इंडिया में वापसी का किया समर्थन, बोले—‘बुमराह के साथ ही खेलना चाहिए’!

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने मोहम्मद शमी की भारतीय टीम में वापसी का जोरदार समर्थन किया है और उनके हालिया प्रदर्शन को चयन के लिए पर्याप्त बताया है।

गांगुली ने कहा, “उन्हें बुमराह के साथ ही गेंदबाजी करनी चाहिए, कहीं और नहीं। वह इतने अच्छे हैं। हमने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ उनका स्पेल देखा—चार ओवर में सिर्फ 9 रन देकर दो बड़े टी20 बल्लेबाज ट्रैविस हेड और अभिषेक शर्मा को रोका। यह शानदार था।”

लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए खेलते हुए शमी ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 2/9 के आंकड़े के साथ प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड भी जीता था।

गांगुली ने रणजी ट्रॉफी में शमी के प्रदर्शन की भी तारीफ की, जहां उन्होंने बंगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, “उनका रणजी सीजन बहुत शानदार रहा। मुझे वह सेमीफाइनल याद है—हालांकि बंगाल हार गया था, लेकिन उन्होंने आठ विकेट लिए थे और टीम को वहां तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।”

सेलेक्टर्स द्वारा नजरअंदाज किए जाने के बावजूद, गांगुली ने घरेलू क्रिकेट खेलने की शमी की भूख की सराहना की।

उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि वह रणजी ट्रॉफी खेलना चाहते हैं। एक तेज गेंदबाज के लिए यह आसान नहीं होता, लेकिन नई गेंद से मोहम्मद शमी को गेंदबाजी करते देखना सबसे शानदार होता है।”

गांगुली ने आगे कहा कि शमी पूरी तरह फिट और तेज नजर आ रहे हैं और लगातार गेंदबाजी करने से वह अपनी सर्वश्रेष्ठ स्थिति में पहुंच चुके हैं।

“मैं उन्हें फिर से भारत की जर्सी में देखना चाहता हूं। उम्मीद है कि उनका समय फिर आएगा, क्योंकि वह इतने अच्छे खिलाड़ी हैं।”

उन्होंने शमी की गेंदबाजी की तारीफ करते हुए कहा, “जब गेंद सीधी सीम के साथ निकलती है, तो उसे देखना किसी ट्रीट से कम नहीं होता।”

इस बीच, चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर पहले ही कह चुके हैं कि शमी के लिए टीम के दरवाजे बंद नहीं हुए हैं, लेकिन उन्होंने मैच फिटनेस को चयन का अहम मानदंड बताया था।

हालांकि शमी का मानना है कि उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है।

2025-26 के घरेलू सीजन में बंगाल के लिए खेलते हुए शमी ने रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में कुल 67 विकेट लिए।

इस मौके पर मौजूद शमी ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “हम मजदूर आदमी हैं, हमें बस गेंद डालनी है। जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं—चोटें भी लगती हैं—लेकिन मेहनत को कभी नहीं भूलना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर आप बहुत ज्यादा दिखावे के पीछे भागते हैं, तो वही आपकी कमजोरी बन जाता है। आजकल हर कोई सोशल मीडिया के पीछे भाग रहा है।”

उत्तर प्रदेश में जन्मे शमी ने कहा कि उनकी जड़ों से जुड़ाव आज भी बना हुआ है और उनके अंदर खेल के लिए वही जुनून है।

“मैं किसान परिवार से हूं और अपनी जड़ों को नहीं भूला हूं। अगर आपको उस स्तर पर फिर खेलना है, तो आपके अंदर वही भूख होनी चाहिए।”

उन्होंने घरेलू क्रिकेट को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया और कहा, “मेरे लिए घरेलू क्रिकेट हर फॉर्मेट जितना ही अहम है। भले ही मैं उत्तर प्रदेश में पैदा हुआ हूं, लेकिन बंगाल मेरी कर्मभूमि है।”

अंत में उन्होंने कहा, “जब तक मेरे अंदर खेलने की ताकत और जुनून है, मैं बंगाल के लिए खेलता रहूंगा।”