
बंगाल क्रिकेट में सौरव गांगुली और पूर्व CAB अध्यक्ष अभिषेक डालमिया के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। सितंबर में होने वाली AGM (वार्षिक आम सभा) से पहले दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है।
कुछ दिन पहले अभिषेक डालमिया ने राज्य सरकार की स्पोर्ट्स इंटीग्रिटी और एंटी-करप्शन हेल्पलाइन से क्रिकेट प्रशासन में कथित गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की जांच की मांग की थी। इसके जवाब में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) ने पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री को एक पत्र लिखकर इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया।
CAB ने कहा कि संगठन में भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी या सिस्टम में खराबी जैसी बातें सच नहीं हैं। संस्था का कहना है कि अभिषेक डालमिया को अगर कोई शिकायत थी, तो उन्हें पहले CAB की आंतरिक शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहिए था, न कि सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने चाहिए थे।
CAB ने सौरव गांगुली का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने ICC क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन, CAB अध्यक्ष, BCCI अध्यक्ष और भारतीय कप्तान जैसी कई बड़ी जिम्मेदारियां निभाई हैं, लेकिन उनकी ईमानदारी पर कभी कोई आरोप नहीं लगा।
संस्था ने यह भी कहा कि पिछले 30 वर्षों में CAB पर कभी भी “सिस्टम में सड़ांध” जैसे आरोप नहीं लगे। CAB के अनुसार, यह कहना गलत है कि सिर्फ एक कार्यकाल में सब कुछ सही था और बाकी सभी कार्यकालों में गड़बड़ियां थीं।
CAB ने बताया कि संगठन में पहले से ही एक स्वतंत्र लोकपाल (Ombudsman) और एथिक्स ऑफिसर मौजूद हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ज्योतिर्मय भट्टाचार्य इस पद पर हैं और कोई भी व्यक्ति सबूतों के साथ उनके पास शिकायत दर्ज करा सकता है।
संस्था का मानना है कि सार्वजनिक पत्र लिखने के बजाय इन आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए था।
वहीं, अभिषेक डालमिया ने अपने पत्र में मांग की थी कि खिलाड़ियों, कोचों, अभिभावकों और अधिकारियों के लिए एक गोपनीय शिकायत प्रणाली बनाई जाए, ताकि वे वित्तीय गड़बड़ियों, भ्रष्टाचार, पक्षपात और दबाव जैसी समस्याओं की शिकायत कर सकें।
CAB ने अंत में कहा कि वह पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम कर रही है और पश्चिम बंगाल में क्रिकेट के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
कुल मिलाकर, AGM से पहले बंगाल क्रिकेट की राजनीति एक बार फिर गर्म हो गई है और आने वाले महीनों में यह विवाद और बढ़ सकता है।








