
पूर्व दक्षिण अफ्रीकी कप्तान फाफ डु प्लेसिस का मानना है कि गौतम गंभीर की जबरदस्त प्रतिस्पर्धात्मक भावना भले ही उन्हें कई बार “विलेन” बना देती थी, लेकिन इसी रवैये ने उनकी टीमों को और मजबूत बनाया, खासकर कोलकाता नाइट राइडर्स को।
गंभीर की कप्तानी में केकेआर ने दो बार आईपीएल खिताब जीता, जबकि तीसरी बार 2024 में उन्होंने टीम के मेंटर के रूप में ट्रॉफी दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने भारतीय टीम को मुख्य कोच के रूप में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 और इसी साल का टी20 वर्ल्ड कप भी जिताया।
डु प्लेसिस ने कहा, “गंभीर को लेकर मेरा नजरिया उन खिलाड़ियों से अलग है जो उनके साथ खेले हैं। जब आप उनके खिलाफ खेलते हैं तो वह कहानी के विलेन जैसे लगते हैं, लेकिन आप उनका सम्मान भी करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि गंभीर की सबसे बड़ी खासियत उनकी प्रतिस्पर्धात्मक सोच है।
“वह इस बात की बिल्कुल परवाह नहीं करते कि लोग उन्हें पसंद करते हैं या नहीं। एक लीडर के रूप में उनका काम है ऊंचे मानक तय करना और टीम में जवाबदेही लाना।”
डु प्लेसिस के मुताबिक, गंभीर सिर्फ अपनी टीम ही नहीं बल्कि विरोधी कप्तानों को भी प्रेरित करते हैं।
“एक विरोधी कप्तान के तौर पर आप उन्हें हराना चाहते हैं, लेकिन जिस तरह वह खुद को पेश करते हैं और टीम के लिए मानक तय करते हैं, उसका सम्मान करना पड़ता है।”
उन्होंने कहा कि एक अच्छे लीडर की यही पहचान होती है और गंभीर ने अपने करियर की शुरुआत से ही यह साबित किया है।
“अगर उनके रिकॉर्ड को देखें तो मानना पड़ेगा कि उनकी लीडरशिप में केकेआर एक मजबूत टीम बनी।”
डु प्लेसिस ने यह भी बताया कि फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट में सिर्फ कप्तान ही लीडर नहीं होता।
“लोग अक्सर कप्तान को ही लीडर मानते हैं, लेकिन असली लीडरशिप ऊपर से नीचे तक आती है—मालिक, कोच और पूरी लीडरशिप ग्रुप से।”
उन्होंने सफल टीमों का उदाहरण देते हुए कहा कि मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और केकेआर जैसी टीमों में मजबूत लीडरशिप ग्रुप होता है, जहां कप्तान और कोच का तालमेल बेहद अहम होता है।
आखिर में डु प्लेसिस ने कहा कि टीम की सफलता काफी हद तक कप्तान और कोच के रिश्ते पर निर्भर करती है।
“अगर कप्तान मजबूत है तो वह टीम को आगे बढ़ाता है, लेकिन अगर कप्तान अनुभवहीन है तो कोच को ज्यादा जिम्मेदारी निभानी पड़ती है—और यही जगह है जहां गंभीर बेहद प्रभावी साबित हुए।”








