
लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए बेहद खराब रहे आईपीएल 2026 सीजन के बाद, जहां टीम 10 टीमों में आखिरी स्थान पर रही, शुक्रवार को विस्फोटक विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को कप्तानी से हटा दिया गया।
एलएसजी के क्रिकेट निदेशक टॉम मूडी ने 14 मई को आई रिपोर्ट्स की पुष्टि की थी कि पंत अब टीम के कप्तान नहीं रहेंगे।
फ्रेंचाइजी ने आधिकारिक बयान में कहा, “लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) औपचारिक रूप से घोषणा करना चाहती है कि ऋषभ पंत ने फ्रेंचाइजी से अपनी कप्तानी की जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया है, और फ्रेंचाइजी ने उनके इस अनुरोध को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।”
मीडिया रिलीज में टॉम मूडी के हवाले से कहा गया, “ऋषभ ने खुद फ्रेंचाइजी से यह अनुरोध किया था और हमने सम्मानपूर्वक इसे स्वीकार कर लिया है।”
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर ने आगे कहा, “ऐसे फैसले कभी आसान नहीं होते। कप्तान के रूप में ऋषभ ने ड्रेसिंग रूम में जो योगदान दिया, उसके लिए हम आभारी हैं। अब हमारा ध्यान टीम के सामूहिक पुनर्निर्माण और बेहतर स्तर तक पहुंचने पर है।”
घटनाक्रम पर नजर रखने वाले लोगों से बातचीत के बाद यह साफ दिखाई देता है कि 28 वर्षीय पंत शायद अब सिर्फ खिलाड़ी के रूप में भी टीम में बने रहना नहीं चाहते और उन्हें ट्रेड या ऑक्शन में भेजा जा सकता है। बल्लेबाज के तौर पर भी उनका सीजन बेहद खराब रहा, जहां उन्होंने 14 पारियों में सिर्फ 312 रन बनाए।
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने भी कहा था कि अब पंत को कप्तानी से आगे बढ़कर खुद को टेस्ट क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज बनाने पर ध्यान देना चाहिए और फिर दोबारा सीमित ओवरों की क्रिकेट में आगे बढ़ना चाहिए। अब समय आ गया है कि वह खुद को ऐसे बल्लेबाज के रूप में देखें जो भारत को मैच जिता सके।
गौतम गंभीर के मार्गदर्शन और केएल राहुल की कप्तानी में लखनऊ सुपर जायंट्स अपने शुरुआती दो सीजन में सम्मानजनक प्रदर्शन करते हुए प्लेऑफ तक पहुंची थी। लेकिन 2024 सीजन में गंभीर के केकेआर जाने के बाद चीजें बिगड़ने लगीं।
केएल राहुल पर एक शर्मनाक हार के बाद एलएसजी मालिक संजीव गोयनका की सार्वजनिक नाराजगी ने खतरे की घंटी बजा दी थी। टीम के अंदर यह धारणा बनने लगी थी कि यह फ्रेंचाइजी खिलाड़ियों को सहज माहौल नहीं देती।
2025 सीजन के मेगा ऑक्शन से पहले माना जा रहा था कि ऋषभ पंत 25 करोड़ रुपये से ऊपर बिकेंगे, और ऐसा ही हुआ। गोयनका ने पंत को 27 करोड़ रुपये में खरीदा। कोलकाता में एक भव्य लॉन्च इवेंट के दौरान गोयनका ने कहा था कि पंत “15 साल का निवेश” हैं और उनमें “जन्मजात लीडर” तथा “आईपीएल का सर्वश्रेष्ठ कप्तान” बनने की क्षमता है।
हालांकि, ऋषभ पंत और जस्टिन लैंगर के बीच कभी तालमेल नहीं बन पाया। दोनों के रिश्ते बेहद खराब थे और अगर सख्ती से कहा जाए तो पूरी तरह बिखरे हुए थे।
कोचिंग स्टाफ में किसी मजबूत भारतीय नाम की कमी—भले ही भरत अरुण कोचिंग स्टाफ में हैं—ने भी नकारात्मक असर डाला। ऊपर से टीम के बजट का बड़ा हिस्सा पंत पर 27 करोड़ और चोटिल व अनियमित मयंक यादव पर 11 करोड़ खर्च कर दिया गया, जिससे संतुलन बिगड़ गया।
पंत लगातार अलग-अलग बल्लेबाजी क्रम पर उतरते रहे और असफलताओं के बाद खुद को नीचे भेजते गए, जिसने उनकी स्थिति और खराब कर दी।
टॉम मूडी के आने से हालात और जटिल हो गए। करीब से देखने वाले कई लोग मानते हैं कि एलएसजी मालिकों का भरोसा विदेशी कोचों, खासकर ऑस्ट्रेलियाई कोचों, पर ज्यादा रहता है। लेकिन सवाल यह है कि अच्छी विदेशी स्ट्राइक बॉलिंग न होने के बावजूद ऑल-इंडियन बॉलिंग अटैक खिलाने का फैसला किसने लिया? पंत, लैंगर या मालिकों ने?
टीम चयन भी बड़ा सवाल बना रहा। हिममत सिंह प्लेइंग इलेवन में कैसे पहुंचे और आयुष बदोनी को तुरंत क्यों नहीं मौका मिला? कुछ मैचों के बाद निकोलस पूरन को आराम क्यों नहीं दिया गया और अर्शिन कुलकर्णी का इस्तेमाल क्यों किया गया? तैयारी और रणनीति की कमी साफ नजर आई, जिसने यह दिखाया कि पंत और लैंगर पूरी तरह एक-दूसरे से असंगत थे।
सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली तस्वीर दूसरे आखिरी मैच के बाद सामने आई, जब एलएसजी 220 रन का स्कोर भी डिफेंड नहीं कर सकी। वैभव सूर्यवंशी ने तूफानी अंदाज में 38 गेंदों पर 93 रन ठोक दिए, जबकि पंत की धीमी बल्लेबाजी के कारण टीम कम से कम 20 रन पीछे रह गई थी।
मैच के बाद मालिक और उनके परिवार के सदस्य मैदान में मौजूद थे, लेकिन पंत उनके साथ नहीं थे। परिवार के बच्चे 15 साल के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी से मिलना चाहते थे। उसी पल साफ हो गया था कि एलएसजी इमोशनली ऋषभ पंत से आगे बढ़ चुकी है। अब सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी थी।








