
लखनऊ सुपर जायंट्स के तेज गेंदबाज मयंक यादव IPL 2024 में भारत की ओर से सबसे तेज गेंद फेंककर सुर्खियों में आए थे, लेकिन इसके तुरंत बाद वह चोटों से जूझने लगे। अब बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में रिहैब के बाद मयंक IPL 2026 में नई शुरुआत के लिए तैयार हैं।
मयंक ने बताया कि सर्जरी के बाद उनके जीवन में काफी बदलाव आया है और अब वह अपने शरीर का पहले से ज्यादा ध्यान रखते हैं।
उन्होंने कहा, “सर्जरी के बाद मेरे लिए सब कुछ बदल गया है। पहले मैं अपने शरीर का बिल्कुल ध्यान नहीं रखता था। रिकवरी सेशन को टाल देता था और कई चीजों को नजरअंदाज करता था। लेकिन अब मैं रिकवरी, न्यूट्रिशन और नींद पर खास ध्यान देता हूं। जितना मैं अपने शरीर का सम्मान करूंगा, उतना ही मेरा शरीर मैदान पर मेरा साथ देगा।”
मयंक ने अपनी रिकवरी प्रक्रिया में जसप्रीत बुमराह को बड़ा श्रेय दिया। उन्होंने बताया कि नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) में रिहैब के दौरान बुमराह ने उनका मार्गदर्शन किया।
उन्होंने कहा, “जब मैं NCA में रिहैब कर रहा था, तब बुमराह भैया भी वहां थे। उनका मेरे साथ बहुत अच्छा बॉन्ड है। वह मेरे लिए एक शिक्षक की तरह हैं। उनकी भी वही सर्जरी हुई थी, वही स्थिति थी।”
“उन्होंने मुझे बताया कि सर्जरी के बाद वापसी कैसे करनी है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। रिकवरी के दौरान शरीर कैसा महसूस करेगा, कैसे प्रतिक्रिया देगा—ये सब उन्होंने समझाया। हम जब भी कॉल या मैसेज पर बात करते हैं, वह अपना अनुभव शेयर करते रहते हैं।”
मयंक ने यह भी बताया कि उन्हें अपने टैलेंट का एहसास IPL में आने के बाद हुआ।
“जब मैं पहली बार IPL में आया, तो हमारे ट्रेनर्स स्पीड गन से गेंदबाजी की रफ्तार मापते थे। तभी मुझे पता चला कि मेरे पास यह खास टैलेंट है। अब मुझे इसका सम्मान करना है।”
उन्होंने आगे कहा, “तेज गेंदबाजी में हमेशा थोड़ा जोखिम रहता है—आप कर पाएंगे या नहीं। इसमें शरीर पर शारीरिक और मानसिक दोनों तरह का दबाव पड़ता है।”
अपने बचपन को याद करते हुए मयंक ने बताया कि उन्हें शुरू से ही तेज गेंदबाजी का शौक था।
“जब मैं गली क्रिकेट खेलता था, तो मुझे स्पिन गेंदबाजी करनी नहीं आती थी, इसलिए मैं सिर्फ तेज गेंदबाजी करता था। बचपन से ही मेरा क्रेज फास्ट बॉलिंग के लिए था। मेरे पिता भी मुझे तेज गेंदबाजों के वीडियो दिखाते थे।”
“खासतौर पर जब भारत साउथ अफ्रीका में खेलता था, तो मैं वे मैच खूब देखता था। मुझे वहां के दो तेज गेंदबाज—मॉर्ने मोर्केल और डेल स्टेन—बहुत पसंद थे। उन्हीं से मुझे तेज गेंदबाजी का जुनून मिला।”








