
वर्ल्ड कप जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही फ्रांस की टीम को टूर्नामेंट की अपनी सबसे कठिन चुनौती का सामना करना होगा, जब वह क्वार्टर फाइनल में शानदार फॉर्म में चल रही मोरक्को से भिड़ेगी। यह मुकाबला 2022 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल का रीमैच होगा, जहां फ्रांस ने कतर में एटलस लायंस के ऐतिहासिक सफर को रोक दिया था।
फ्रांस के वर्ल्ड कप अभियान ने अब तक टीम की ताकत, धैर्य और संयम की परीक्षा ली है, लेकिन डिडिएर डेशॉम्प्स की टीम को मोरक्को के खिलाफ एक बिल्कुल अलग चुनौती मिलने वाली है। यह मुकाबला टूर्नामेंट में फ्रांस की असली फुटबॉल परीक्षा साबित हो सकता है।
यह मैच 2022 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल की याद दिलाएगा, जहां फ्रांस ने मोरक्को के यादगार सफर को खत्म किया था। हालांकि इस बार उत्तरी अफ्रीकी टीम किसी सरप्राइज पैकेज के रूप में नहीं, बल्कि एक आत्मविश्वास से भरी मजबूत टीम के रूप में मैदान पर उतरेगी, जिसने साफ कर दिया है कि उसका लक्ष्य खिताब जीतना है।
फ्रांस ने पराग्वे को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। यह ऐसा मुकाबला था, जिसमें कौशल से ज्यादा धैर्य और मानसिक मजबूती की जरूरत थी। पराग्वे ने बेहद डिफेंसिव खेल दिखाया और फ्रांस को गोल करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी।
किलियन एम्बप्पे के इस वर्ल्ड कप के सातवें गोल की मदद से डेशॉम्प्स की टीम जीत हासिल करने में सफल रही, लेकिन इस प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि अपनी जबरदस्त अटैकिंग ताकत के दम पर आगे बढ़ रही फ्रांस को अब नॉकआउट दौर में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
मोरक्को के खिलाफ चुनौती बिल्कुल अलग होगी। मोहम्मद औहबी की टीम ने साबित किया है कि वह दबाव झेल सकती है, गेंद पर नियंत्रण रख सकती है और विरोधियों की गलतियों का तेजी से फायदा उठा सकती है।
ग्रुप स्टेज में अजेय रहने के बाद मोरक्को ने राउंड ऑफ 16 में कनाडा को 3-0 से हराकर साबित किया कि टीम टूर्नामेंट के साथ और मजबूत होती जा रही है।
ब्राजील, स्कॉटलैंड और हैती जैसी टीमों वाले मुश्किल ग्रुप से सात अंक हासिल करके मोरक्को पहले ही अपनी क्षमता दिखा चुका है। उनके प्रदर्शन ने यह साबित किया है कि वे सिर्फ 2022 की भावनात्मक सफलता को दोहराने नहीं आए हैं, बल्कि उससे आगे बढ़ना चाहते हैं।
दूसरी तरफ, फ्रांस ने अभी तक मोरक्को जैसी तकनीकी क्षमता, तेज खेल और आत्मविश्वास से भरी टीम का सामना नहीं किया है। राउंड ऑफ 32 में पराग्वे ने उन्हें चुनौती जरूर दी थी, लेकिन वह मोरक्को जैसी फुटबॉल चुनौती पेश नहीं कर सका, जबकि स्वीडन को फ्रांस ने आसानी से हरा दिया था।
यह क्वार्टर फाइनल इस बात की सबसे बड़ी परीक्षा होगा कि क्या फ्रांस की मजबूत फॉरवर्ड लाइन ऐसी टीमों के खिलाफ भी अपना दबदबा कायम रख सकती है, जो तेज काउंटर अटैक से नुकसान पहुंचा सकती हैं और उनकी डिफेंसिव मजबूती को चुनौती दे सकती हैं।
मोरक्को को इस बड़े मुकाबले में अपने अहम स्ट्राइकर इस्माइल साइबारी की कमी खल सकती है, जबकि मांसपेशियों की चोट के कारण मिडफील्डर ऑरेलियन चुआमेनी के खेलने पर भी संशय है।
एम्बाप्पे, ओस्मान डेम्बेले, माइकल ओलिसे और ब्रैडली बारकोला जैसे खिलाड़ियों के साथ फ्रांस के पास इस वर्ल्ड कप की सबसे खतरनाक अटैकिंग लाइन में से एक है, लेकिन मोरक्को की रणनीति, अनुशासन और आत्मविश्वास फ्रांस की असली ताकत की परीक्षा लेने के लिए तैयार है।








