वैभव सूर्यवंशी के भारत डेब्यू का यूरोप में इंतजार, टिकटों के लिए मची होड़; गैरी सोबर्स से हुई तुलना!

पूर्व भारतीय और आयरिश क्रिकेटर एम.वी. नरसिम्हा राव का कहना है कि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर दीवानगी अब पूरे यूरोप में फैल चुकी है। आयरलैंड के खिलाफ संभावित डेब्यू से पहले प्रशंसक आखिरी समय तक टिकट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

वैभव 26 जून से बेलफास्ट में शुरू होने वाली दो मैचों की टी20 सीरीज में भारत के लिए पदार्पण कर सकते हैं और राव समेत कई क्रिकेट प्रेमी उन्हें खेलते हुए देखने के लिए उत्साहित हैं।

राव ने पीटीआई से कहा, “मुझे लगता है कि आयोजकों को अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था करनी पड़ेगी क्योंकि स्टॉर्मॉन्ट मैदान में लगभग 7000 सीटें ही हैं। पेरिस समेत यूरोप के कई हिस्सों से लोग मैच देखने आना चाहते हैं। उम्मीद है कि उनके लिए कोई व्यवस्था की जा सकेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर वैभव आयरलैंड में डेब्यू करते हैं तो वह ऐतिहासिक और यादगार दिन होगा। पिछले 10 दिनों में यहां उनके लिए जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है।”

भारत के लिए चार टेस्ट मैच खेलने वाले और बाद में आयरलैंड का प्रतिनिधित्व करने वाले राव का मानना है कि बेलफास्ट की पिच वैभव को पसंद आ सकती है।

“वह शानदार खिलाड़ी हैं। मैंने उन्हें आईपीएल में टीवी पर खेलते देखा है। यहां की पिचें आमतौर पर धीमी होती हैं और आयरलैंड के पास बहुत तेज गति वाले गेंदबाज भी नहीं हैं, इसलिए उन्हें बल्लेबाजी में मजा आ सकता है।”

हालांकि राव का मानना है कि अगले महीने इंग्लैंड में होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज वैभव के लिए बड़ी परीक्षा होगी।

“इंग्लैंड में उनके लिए चुनौती ज्यादा कठिन होगी क्योंकि वहां गेंद स्विंग करती है और टी20 मैच के दौरान भी मौसम तेजी से बदल सकता है। फिर भी मैं उनके अच्छे प्रदर्शन की कामना करता हूं।”

राव ने वैभव की बल्लेबाजी शैली की तुलना महान वेस्टइंडीज ऑलराउंडर गैरी सोबर्स से की।

उन्होंने कहा, “जितने मैच मैंने देखे हैं, उन्हें देखकर मुझे गैरी सोबर्स की याद आती है। उनका बैकलिफ्ट ऊंचा है, बल्ला सीधा नीचे आता है और वह गेंद को बहुत जल्दी पढ़ लेते हैं। इतनी कम उम्र में उनके पास लगभग हर शॉट खेलने की क्षमता है।”

71 वर्षीय राव का मानना है कि वैभव की सबसे बड़ी परीक्षा लगातार मिल रही तारीफों के बीच खुद को संतुलित रखना होगा।

“उनके पास ईश्वर प्रदत्त प्रतिभा है। लेकिन मेरी सलाह यही है कि सचिन तेंदुलकर की तरह विनम्र बने रहें। फिटनेस और अभ्यास पर ध्यान दें और अलग-अलग परिस्थितियों में खुद को ढालें। अब वह सुपरस्टार बन चुके हैं और यही उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।”

राव भारतीय टीम के उपकप्तान तिलक वर्मा से मिलने को भी उत्साहित हैं, जिन्हें उन्होंने हैदराबाद में अंडर-16 दिनों के दौरान प्रशिक्षण दिया था।

28 जून को दूसरे टी20 मुकाबले से पहले राव को रॉय टॉरेन्स बेल बजाने का सम्मान भी मिलेगा।

उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बहुत बड़ा सम्मान और भावुक क्षण है। सबसे खास बात यह है कि मैंने भारत और आयरलैंड दोनों देशों के लिए क्रिकेट खेला है। मैं इस पल को जिंदगी भर याद रखूंगा क्योंकि पिछले साढ़े तीन दशकों में मैंने आयरिश क्रिकेट के लिए काफी काम किया है।”

बातचीत के दौरान राव ने 1995 में आयरलैंड के लिए खेले अपने एक यादगार मैच को भी याद किया।

उन्होंने बताया कि नॉर्थहैम्पटनशायर के खिलाफ मैच में विपक्षी टीम में कर्टली एम्ब्रोस, एलन लैम्ब, केविन करन और रॉब बेली जैसे खिलाड़ी थे।

“उस दिन एम्ब्रोस तूफान की तरह गेंदबाजी कर रहे थे। हमारी टीम के कुछ बल्लेबाजों ने कहा कि उन्हें गेंद दिखाई ही नहीं दे रही थी।”

राव ने उस मैच में नाबाद 47 रन बनाए थे। उन्होंने हंसते हुए बताया, “एम्ब्रोस ने पहली ही गेंद मेरे सीने की तरफ बाउंसर फेंकी, जिसे मैंने मिडविकेट पर चौके के लिए भेज दिया। थोड़ी देर बाद वह मेरे पास आए और बोले — ‘तुम आयरिश नहीं लगते।'”

बाद में नॉर्थहैम्पटनशायर ने उन्हें टीम में शामिल होने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन उन्होंने कोचिंग का रास्ता चुना।

राव ने आयरलैंड में अपने कोचिंग करियर के दौरान इयोन मॉर्गन, केविन ओ’ब्रायन, विलियम पोर्टरफील्ड और एंड्रयू बालबर्नी जैसे खिलाड़ियों के साथ काम किया। वहीं भारत में उनकी अकादमी से वीवीएस लक्ष्मण और मिताली राज जैसे खिलाड़ी भी निकले।

उन्होंने कहा, “लक्ष्मण करीब 12 साल की उम्र में मेरे पास आए थे। उन्हें भारत के महान बल्लेबाजों में से एक बनते देखना मेरे लिए बेहद खुशी की बात है। आज भी वह मेरे संपर्क में रहते हैं।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।