
आधुनिक व्हाइट-बॉल क्रिकेट में बल्लेबाजी क्रम में बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) एक महत्वपूर्ण गुण बन गई है। भारत के पूर्व ऑलराउंडर विजय शंकर का मानना है कि मैच की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग भूमिकाओं में ढलने वाले खिलाड़ी अब टीमों के लिए पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गए हैं।
भारत और आईपीएल में नंबर 3 से लेकर नंबर 8 तक बल्लेबाजी कर चुके विजय शंकर का कहना है कि क्रिकेट के बदलते स्वरूप ने ऐसे असली ऑलराउंडरों की अहमियत बढ़ा दी है जो बल्ले और गेंद दोनों से योगदान दे सकें और टीम की जरूरत के अनुसार खुद को ढाल सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि उभरते हुए ऑलराउंडरों को कार्यभार और फिटनेस की शिकायत करने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों को स्वीकार करना चाहिए।
पीटीआई से बातचीत में विजय शंकर ने कहा, “हम ऑलराउंडर कार्यभार का बहाना नहीं बना सकते। हम शुरू से ही दोगुने कार्यभार के साथ बड़े हुए हैं। इसलिए तेज गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर अतिरिक्त कार्यभार को अपनी चोट या फिटनेस की समस्या का कारण नहीं बता सकते।”
विजय का मानना है कि उनकी बहुमुखी प्रतिभा ही ऑलराउंडरों को किसी भी टीम का सबसे उपयोगी और मैच का रुख बदलने वाला खिलाड़ी बनाती है।
उन्होंने कहा, “ऑलराउंडर होने की खूबसूरती यही है कि आप कहीं भी बल्लेबाजी कर सकते हैं। मैं ऊपर भी बल्लेबाजी करता था और जरूरत पड़ने पर नीचे भी।”
“टीम को जहां जरूरत होती थी, मैं वहां खेलने के लिए तैयार रहता था। यह मेरे लिए फायदा भी था और नुकसान भी। फायदा इसलिए क्योंकि मैं टीम के लिए उपयोगी था, लेकिन नुकसान इसलिए क्योंकि लगातार अलग-अलग नंबर पर खेलने के कारण मैं व्यक्तिगत रूप से बड़े स्कोर नहीं बना पाया।”
विजय शंकर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर को याद करते हुए बताया कि विराट कोहली और रवि शास्त्री ने उन्हें अक्सर फ्लोटर बल्लेबाज की भूमिका में इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा, “मैंने भारत के लिए टी20 में आखिरी बार न्यूजीलैंड के खिलाफ नंबर 3 पर बल्लेबाजी की थी। मैंने नंबर 7 पर भी बल्लेबाजी की है और नंबर 5 तथा 6 पर भी। आईपीएल में भी मैं नंबर 3 से लेकर नंबर 8 तक हर स्थान पर खेला हूं। मुझे एहसास हुआ कि मेरी सबसे बड़ी ताकत यही थी कि मैं किसी भी नंबर पर बल्लेबाजी कर सकता था।”
हालांकि 2019 विश्व कप टीम में उनके चयन को लेकर काफी विवाद हुआ था, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ मैच खेला। हालांकि पैर की अंगुली में फ्रैक्चर होने के कारण उनका पहला और आखिरी आईसीसी टूर्नामेंट जल्दी समाप्त हो गया।
उन्होंने कहा, “मेरा अंतरराष्ट्रीय करियर 2019 विश्व कप के दौरान लगी पैर की अंगुली की चोट से प्रभावित हुआ। उस चोट के बाद मैं करीब डेढ़ महीने तक क्रिकेट से दूर रहा।”
“उसके बाद मैंने कुछ इंडिया ए मैच खेले, लेकिन फिर वापसी नहीं कर पाया। यह समय काफी कठिन था क्योंकि हर बार खुद को साबित करना पड़ता है। लेकिन उन्हीं मुश्किल पलों ने मुझे एक मजबूत इंसान बनाया।”
विजय शंकर आज भी विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ अपने पहले ही गेंद पर इमाम-उल-हक का विकेट लेने का पल नहीं भूले हैं।
उन्होंने कहा, “विश्व कप खेलना हमेशा मेरा सपना था। विश्व कप में पहली ही गेंद पर विकेट लेना एक खास उपलब्धि थी। उससे भी ज्यादा खुशी इस बात की थी कि मैं उस समय भारतीय टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन कर रहा था।”
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला का भी जिक्र किया, जब उन्होंने आखिरी ओवर में 10 रन बचाकर भारत को जीत दिलाई थी।
“मुझे याद है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी ओवर में मैंने 10 रन बचाए थे और भारत को जीत दिलाई थी। लेकिन बाद में चोटों ने मुझे काफी पीछे धकेल दिया। वह दौर मुश्किल था, लेकिन मैंने उससे बहुत कुछ सीखा और अपने सफर का आनंद भी लिया।”
भारत के लिए खेलने के अलावा विजय शंकर ने राहुल द्रविड़ के मार्गदर्शन में इंडिया ए टीम के साथ दुनिया के कई देशों का दौरा किया, जिसे वह अपने करियर का अहम अनुभव मानते हैं।
उन्होंने कहा, “मैंने इंडिया ए के लिए पांच साल क्रिकेट खेली और लगभग हर बड़े क्रिकेट देश का दौरा किया। राहुल द्रविड़ हमेशा मेरे आदर्श रहे हैं। उनके साथ खेलना और उनके नेतृत्व में खेलना मेरे लिए सौभाग्य की बात थी।”
35 वर्षीय विजय शंकर ने हाल ही में भारतीय घरेलू क्रिकेट से संन्यास लिया है। उन्होंने बीसीसीआई का लेवल-2 कोचिंग कोर्स भी पूरा कर लिया है और भविष्य में कोचिंग की दुनिया में कदम रखने की इच्छा जताई है।
उन्होंने कहा, “क्रिकेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है और मैं इस खेल को कुछ लौटाना चाहता हूं। मैंने कोचिंग में लेवल-2 सर्टिफिकेशन भी पूरा कर लिया है। जब तक मैं फिट हूं, तब तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेलना चाहता हूं।”
“इसी वजह से मैंने घरेलू क्रिकेट से संन्यास लिया। लेकिन आने वाले वर्षों में कोचिंग करना जरूर मेरे दिमाग में है और मैं क्रिकेट के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहूंगा।”
हालांकि विजय शंकर को अपने करियर में एक बात का अफसोस हमेशा रहेगा।
उन्होंने कहा, “मेरे लिए टेस्ट क्रिकेट ही सब कुछ था। मेरा सपना भारत की टेस्ट कैप हासिल करना था, लेकिन मैं उससे बहुत मामूली अंतर से चूक गया। शायद यही एक बात है जिसका मुझे हमेशा अफसोस रहेगा।”








