
भारत के स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने स्वीकार किया है कि पिछले साल पीठ की चोट के बावजूद वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेना सही फैसला नहीं था। हालांकि उन्होंने कहा कि अब वह पूरी तरह फिट हैं और शुक्रवार को दोहा डायमंड लीग में अपने सीजन की शुरुआत के लिए तैयार हैं।
सितंबर 2025 में टोक्यो वर्ल्ड चैंपियनशिप में नीरज ने 84.03 मीटर का थ्रो किया था और आठवें स्थान पर रहे थे। टूर्नामेंट के बाद उन्होंने खुलासा किया था कि उनकी कमर के निचले हिस्से में चोट थी। इस चोट से उबरने में समय लगने के कारण उन्हें इस सीजन की शुरुआत भी टालनी पड़ी।
नीरज ने कहा, “पिछले साल टोक्यो वर्ल्ड चैंपियनशिप से पहले मुझे चोट थी। हमने काफी मेहनत की और मैं टोक्यो में खेला भी, लेकिन अब मुझे लगता है कि वह फैसला सही नहीं था क्योंकि मुझे पहले से पता था कि मुझे समस्या है। लेकिन वह 2025 की आखिरी प्रतियोगिता थी, इसलिए मैंने खेलने का फैसला किया।”
उन्होंने आगे कहा, “एक खिलाड़ी के जीवन में ऐसा होता है कि एक चोट से बचने की कोशिश करते हैं तो दूसरी परेशानी सामने आ जाती है। पहले टखने में दिक्कत हुई, फिर कंधे में। इसके बाद मैंने अपनी टीम और फिजियो के साथ बैठकर शरीर के हर हिस्से पर काम किया।”
वापसी से पहले नीरज ने भरोसा जताते हुए कहा, “मैं खुद को बहुत अच्छा और फिट महसूस कर रहा हूं। अब देखते हैं कल क्या होता है।”
विश्व रिकॉर्डधारी भाला फेंक खिलाड़ी यान जेलेज़नी के मार्गदर्शन में नीरज ने 16 मई 2025 को दोहा में 90.23 मीटर का थ्रो कर पहली बार 90 मीटर का आंकड़ा पार किया था। लेकिन नीरज का मानना है कि तकनीकी रूप से वह उनका सबसे बेहतरीन थ्रो नहीं था।
उन्होंने कहा, “तकनीकी रूप से वह थ्रो इतना अच्छा नहीं था। मेरे हाथ की गति बहुत तेज थी, लेकिन अगर मैंने अपने निचले शरीर का बेहतर इस्तेमाल किया होता तो शायद दो-तीन मीटर और जुड़ सकते थे। मैंने उस थ्रो का वीडियो भी ज्यादा बार नहीं देखा।”
नीरज ने बताया कि उन्हें ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वालिफिकेशन राउंड के थ्रो ज्यादा पसंद आते हैं।
“क्वालिफिकेशन राउंड में मैं काफी रिलैक्स रहता हूं और दूर तक थ्रो करता हूं। लेकिन जब फाइनल या मुख्य मुकाबले में उतरता हूं तो जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो जाता हूं और अपनी तकनीक भूल जाता हूं। इसलिए मुझे क्वालिफिकेशन राउंड के थ्रो ज्यादा पसंद हैं क्योंकि तकनीकी रूप से वे बेहतर होते हैं।”
करीब एक साल तक यान जेलेज़नी के साथ काम करने के बाद नीरज ने इस साल जनवरी में उनसे अलग होने का फैसला किया।
उन्होंने कहा, “जेलेज़नी महान खिलाड़ी और बेहतरीन कोच हैं। हमने कुछ खास चीजों पर काम किया और मुझे खुशी है कि मैंने उनके मार्गदर्शन में 90 मीटर का आंकड़ा पार किया। लेकिन पूरे सीजन एक ही जगह रहना मेरे लिए संभव नहीं था। इसलिए टोक्यो वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद हमने फैसला किया कि अब मुझे अपने विचारों के साथ काम करना चाहिए और भारतीय कोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।”
अब नीरज भारतीय कोच जैवीर चौधरी के साथ काम कर रहे हैं।
“जैवीर मेरे सीनियर हैं। मैंने उनके साथ ही भाला फेंकना शुरू किया था। वह पिछले 15-16 साल से मेरी यात्रा को जानते हैं। उन्हें मेरी ट्रेनिंग योजनाओं की पूरी जानकारी है। अब हम मेरी तकनीक पर काम कर रहे हैं। किसी एक चीज पर बहुत ज्यादा गहराई से काम नहीं कर रहे, बल्कि अपनी प्राकृतिक तकनीक पर ध्यान दे रहे हैं।”
नीरज का मानना है कि इस साल ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप नहीं होने से मानसिक रूप से थोड़ी राहत जरूर है, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के कारण सीजन फिर भी काफी व्यस्त रहेगा।
उन्हें भारत की 32 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम में कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए शामिल किया गया है। इसके लिए उन्हें 82.61 मीटर का क्वालिफाइंग मार्क पार करना होगा, जो उनके स्तर के हिसाब से ज्यादा मुश्किल नहीं है।
ग्लासगो में जुलाई-अगस्त के दौरान होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्हें श्रीलंका के रुमेश थरंगा पाथिराजे, पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम, त्रिनिदाद और टोबैगो के विश्व चैंपियन केशोर्न वॉलकॉट और दो बार के विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा।
नीरज ने कहा, “इन सभी खिलाड़ियों ने 90 मीटर से ज्यादा थ्रो किया है। इसलिए कॉमनवेल्थ गेम्स का मुकाबला ओलंपिक या वर्ल्ड चैंपियनशिप से कम नहीं होगा। यह बहुत कठिन प्रतियोगिता होगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि वह सितंबर-अक्टूबर में जापान में होने वाले एशियन गेम्स में भी हिस्सा लेने की योजना बना रहे हैं।
जब उनसे पूछा गया कि हवा का अधिकतम फायदा उठाने के लिए वह तकनीकी रूप से क्या बदलाव करते हैं, तो नीरज ने कहा,
“कभी-कभी मैं यहां हवा के खिलाफ भी थ्रो करता हूं, जो अच्छा नहीं होता। हमें समझना पड़ता है कि हवा का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए। भाला फेंक में हवा रन-अप की गति बढ़ाने में मदद करती है। अगर भाले को थोड़ा ऊपर की ओर छोड़ा जाए और हवा पीछे से मिले तो फायदा होता है। लेकिन अगर आप बहुत सपाट थ्रो करेंगे तो हवा ज्यादा मदद नहीं करेगी। इसलिए हवा का फायदा उठाने के लिए सही सोच और सही तकनीक दोनों जरूरी हैं।”








