गुरनूर बरार ने बताया कैसे घरेलू क्रिकेट ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचाया!

भारत के नए तेज गेंदबाज गुरनूर बरार का मानना है कि घरेलू क्रिकेट में वर्षों की मेहनत और इंडिया ए टीम के साथ मिले अनुभव ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आसानी से कदम जमाने में मदद की।

पंजाब के इस तेज गेंदबाज ने अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी पहली वनडे सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी रफ्तार और सटीक गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया है।

लखनऊ में भारत की 170 रन की सीरीज जीत के बाद गुरनूर ने कहा, “इंडिया ए सेटअप मेरे लिए बहुत बड़ी चीज रहा है। अगर आप रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो इंडिया ए, दलीप ट्रॉफी या ईरानी कप के लिए चुने जाते हैं। जब मुझे इंडिया ए का कॉल आया तो मैं बहुत खुश था।”

26 वर्षीय गुरनूर ने अपनी तेज रफ्तार, उछाल और दबाव में यॉर्कर डालने की क्षमता से इस सीरीज में खास पहचान बनाई है। दो वनडे मैचों में उन्होंने 15.5 ओवर में 6 विकेट लिए हैं।

उन्होंने कहा, “मैंने वही करने की कोशिश की जो रणजी ट्रॉफी में करता था। तेज गेंदबाजी, सही लेंथ पर गेंद डालना और स्विंग कराना। इंडिया ए में भी मैंने यही किया और उसी तरह की गेंदबाजी दोहराने की कोशिश की।”

6 फीट 5 इंच लंबे गुरनूर “हिट द डेक” गेंदबाज माने जाते हैं, जो अपनी उछालभरी गेंदों से बल्लेबाजों को परेशान करते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं अपनी इस पहचान के बारे में ज्यादा नहीं सोचता। मुझे खुद पर भरोसा है और मैं जो भी करता हूं, चाहे हार्ड लेंथ हो या तेज गेंदबाजी, उसी पर ध्यान देता हूं। यहां भी मैंने वही करने की कोशिश की।”

अच्छी शुरुआत के बावजूद गुरनूर का मानना है कि वह अभी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचे हैं।

“इन दोनों मैचों में मैं अपने प्रदर्शन से और बेहतर करना चाहता था। मुझे पता है कि मैं आज से भी बेहतर गेंदबाजी कर सकता हूं। उम्मीद है कि आने वाले मैचों में और अच्छा प्रदर्शन करूंगा।”

हाल ही में आईपीएल में गुजरात टाइटंस का हिस्सा रहे गुरनूर ने अपनी प्रगति का श्रेय टीम के अनुभवी गेंदबाजों को दिया।

उन्होंने कहा, “गुजरात टाइटंस में बहुत अच्छा माहौल है। वहां आशीष नेहरा सर, कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज भाई, प्रसिद्ध कृष्णा भाई और ईशांत शर्मा जैसे खिलाड़ी हैं। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है।”

“हर खिलाड़ी खेलना चाहता है और मैं भी अपने मौके का इंतजार कर रहा था। लेकिन उसी दौरान मैं देख रहा था कि वे क्या अच्छा कर रहे हैं और कहां गलतियां कर रहे हैं। मैं जितना हो सके उतना सीखना चाहता था ताकि मौका मिलने पर बेहतर कर सकूं। भगवान का शुक्र है कि मुझे भारत के लिए खेलने और अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिला।”

गुरनूर की गेंदबाजी की एक खास बात डेथ ओवरों में उनकी प्रभावशीलता रही है। उन्होंने बताया कि वह यॉर्कर पर काफी मेहनत करते हैं।

“मेरे हिसाब से हर तेज गेंदबाज को यॉर्कर पर काम करना चाहिए। मैं अपनी डेथ बॉलिंग पर मेहनत करता हूं कि लगातार यॉर्कर कैसे डाल सकूं। डेथ ओवरों में अच्छे बल्लेबाजों के खिलाफ यॉर्कर बहुत काम आती है।”

उन्होंने कहा कि भारतीय टीम प्रबंधन का भरोसा उन्हें खुलकर गेंदबाजी करने की आजादी देता है।

“मैनेजमेंट और गेंदबाजी कोच मेरा बहुत समर्थन करते हैं। इससे मुझे खुलकर गेंदबाजी करने का मौका मिलता है। उन्होंने मुझे कोई नई सलाह नहीं दी, बस मेरी ताकत पर भरोसा रखने को कहा।”

गुरनूर का मानना है कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में सिर्फ तेज गेंदबाजी काफी नहीं होती।

“आप सिर्फ तेज गेंद नहीं डाल सकते। अगर विकेट में कुछ नहीं है तो कई बल्लेबाज रफ्तार पसंद करते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम बल्लेबाज और विपक्षी टीम के अनुसार योजना बनाएं और फील्ड सेट करें।”

उन्होंने यह भी बताया कि परिस्थितियों के अनुसार अपनी लेंथ बदलना बहुत जरूरी होता है।

“अगर आपकी आउटस्विंग अच्छी है तो हर बल्लेबाज को परेशानी होती है, इसलिए मैं जितना हो सके गेंद स्विंग कराने की कोशिश करता हूं। लेकिन जब स्विंग कम मिलती है तो मैं अपनी लेंथ पीछे कर देता हूं।”

दूसरे वनडे की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “गर्मी और विकेट की वजह से गेंद ज्यादा स्विंग नहीं हो रही थी। इसलिए हमने अपनी योजना बदली। जब स्विंग नहीं मिलती तो हम गेंद को थोड़ा पीछे डालते हैं। सब कुछ बल्लेबाज, विकेट और मैच की स्थिति के हिसाब से होता है।”

गुरनूर ने भारत के कप्तान शुभमन गिल के साथ अपने रिश्ते के बारे में भी बात की।

“दोस्ती अपनी जगह है और टीम के लिए खेलना अपनी जगह। हम पहले साथ में अभ्यास करते थे और एक-दो मैच भी साथ खेले हैं। लेकिन टीम इंडिया के लिए खेलना और फिर उनका मेरी पहली विकेट में मदद करना बहुत खास एहसास था।”

उन्होंने गिल की कप्तानी की भी तारीफ की।

“अच्छा कप्तान वही होता है जो अपने गेंदबाजों का समर्थन करे। यहां सभी सीनियर खिलाड़ी और कप्तान गेंदबाजों का पूरा साथ देते हैं। यह बहुत अच्छी बात है।”

शुरुआती सफलता मिलने के बावजूद गुरनूर का ध्यान आगे बेहतर करने पर है।

“मैं आसानी से संतुष्ट नहीं होता। मुझे खुशी है कि मैंने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन मैं टीम इंडिया के लिए और ज्यादा करना चाहता हूं। मैं लगातार बेहतर करना चाहता हूं। मैं बस अपना काम करता रहता हूं।”