
आईपीएल के हालिया सीज़न के दौरान फ्रेंचाइज़ियों की चिंताओं के बावजूद, बीसीसीआई का अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और उनकी राष्ट्रीय टीमों के बीच उपलब्धता संबंधी विवादों में मध्यस्थता करने का कोई इरादा नहीं है।
नीलामी में खरीदे जाने के बाद टूर्नामेंट से नाम वापस लेने वाले विदेशी खिलाड़ियों पर बीसीसीआई पहले ही प्रतिबंध लगाने का नियम लागू कर चुका है, लेकिन पूरे दो महीने चलने वाले आईपीएल में विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
हालिया सीज़न में जोश हेज़लवुड, पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जैसे खिलाड़ी चोट और फिटनेस समस्याओं के कारण टूर्नामेंट के शुरुआती हिस्से से बाहर रहे। स्टार्क की गैरमौजूदगी का असर दिल्ली कैपिटल्स के प्रदर्शन पर भी पड़ा।
राजस्थान रॉयल्स के मुख्य कोच कुमार संगकारा ने प्लेऑफ अभियान के बाद नाराज़गी जताई थी कि सैम करन ने चोट का हवाला देकर आईपीएल से नाम वापस ले लिया, लेकिन बाद में इंग्लैंड में सरे के लिए टी20 क्रिकेट खेलते दिखाई दिए।
पंजाब किंग्स के सह-मालिक मोहित बर्मन ने भी कहा था कि बीसीसीआई और अन्य क्रिकेट बोर्डों को विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता को लेकर बेहतर समन्वय करना चाहिए।
संगकारा ने कहा था, “हमें बताया गया था कि सैम करन पूरे सीज़न से बाहर हो गए हैं, लेकिन बाद में मैंने उन्हें सरे के लिए दो-तीन मैच खेलते देखा। यह निराशाजनक था।”
हालांकि, बीसीसीआई का मानना है कि इस तरह के मामलों को खिलाड़ी और उसकी फ्रेंचाइज़ी के बीच ही सुलझाया जाना चाहिए, क्योंकि फ्रेंचाइज़ियां ही खिलाड़ियों की वास्तविक संरक्षक होती हैं।
बोर्ड का मानना है कि अंतिम समय में टूर्नामेंट से हटने पर लगाया गया दो साल का प्रतिबंध पर्याप्त निवारक है। इसके अलावा खिलाड़ी अपनी फ्रेंचाइज़ी से चर्चा करके स्वयं निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
बीसीसीआई के एक सूत्र ने कहा, “टीमें ही खिलाड़ियों की संरक्षक हैं। हम इसे उनके और खिलाड़ियों के आपसी समझौते पर छोड़ देते हैं। कुछ खिलाड़ी आईपीएल को राष्ट्रीय टीम से ऊपर रखते हैं और कुछ राष्ट्रीय टीम को प्राथमिकता देते हैं। हमारे नियम स्पष्ट हैं। यदि कोई चोटिल नहीं है और फिर भी हटता है, तो दो साल का प्रतिबंध लागू होगा।”
सूत्र ने जोफ्रा आर्चर का उदाहरण देते हुए बताया कि इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) द्वारा उनका कार्यभार सीमित रखने की सलाह के बावजूद, आर्चर ने पूरे आईपीएल सीज़न के लिए खुद को उपलब्ध रखा था।
सैम करन के मामले पर सूत्र ने कहा, “जहां तक सैम करन की बात है, फ्रेंचाइज़ी को अच्छी तरह पता होगा कि अगले सीज़न में क्या करना है।”
हालांकि मौजूदा आईपीएल नीलामी का कुल पर्स 125 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, फिर भी खिलाड़ियों के अनुबंध अभी एनएफएल या यूरोपीय फुटबॉल लीगों के स्तर तक नहीं पहुंचे हैं।
बीसीसीआई भविष्य में वेतन में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के पक्ष में है, लेकिन फिलहाल किसी बड़े इज़ाफे के पक्ष में नहीं है। बोर्ड को डर है कि अधिक धनराशि उपलब्ध होने पर बोली प्रक्रिया असंतुलित हो सकती है, जैसा कि 2021 में हुआ था जब क्रिस मॉरिस उस समय आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बने थे।
गौरतलब है कि खिलाड़ियों को अनुबंध राशि के अलावा टूर्नामेंट के दौरान अतिरिक्त प्रायोजन और प्रति मैच 7.5 लाख रुपये मैच फीस भी मिलती है।
बीसीसीआई 2028 सीज़न से आईपीएल का विस्तार कर मैचों की संख्या 74 से बढ़ाकर 94 करने की योजना बना रहा है। इसके लिए टूर्नामेंट की समयावधि भी बढ़ानी होगी।
बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार, आईपीएल के लिए सबसे उपयुक्त विंडो मार्च के पहले सप्ताह से मई के मध्य तक मानी जा रही है।
2026 का आईपीएल मार्च के अंत में शुरू हुआ था और फाइनल 31 मई को खेला गया था।
2027 चक्र के बाद मीडिया अधिकारों का नवीनीकरण होना है। उस समय सभी हितधारकों को यह भी मूल्यांकन करना होगा कि भविष्य में द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय सीरीज़ कितनी व्यवहारिक रहेंगी।
पहले के मुकाबले अब अधिकांश टेस्ट खेलने वाले देशों की अपनी टी20 लीग हैं और वे भारत के खिलाफ सीरीज़ पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं। कुछ द्विपक्षीय श्रृंखलाओं को तो प्रसारक भी अब व्यावसायिक रूप से आकर्षक नहीं मानते।
हाल ही में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेला गया एकमात्र टेस्ट मैच भी लगभग खाली स्टैंड्स के बीच संपन्न हुआ था, जिसने इस बदलते परिदृश्य को और स्पष्ट कर दिया।








