
पाकिस्तान के अनुभवी तेज गेंदबाज़ शाहीन शाह अफरीदी कथित तौर पर इस बात से नाखुश हैं कि उन्हें इस साल वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली आगामी टेस्ट सीरीज के लिए नहीं चुना जा सकता। यह फैसला उनके वर्कलोड को मैनेज करने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
पाकिस्तान की टीम वेस्टइंडीज दौरे पर 25 जुलाई को तारौबा और 2 अगस्त को पोर्ट ऑफ स्पेन में टेस्ट मैच खेलेगी। इसके बाद 19 अगस्त से इंग्लैंड में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होगी। 26 वर्षीय शाहीन फिलहाल पाकिस्तान की वनडे टीम के कप्तान हैं।
सूत्रों के अनुसार, “चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन का मानना है कि शाहीन के वर्कलोड को नियंत्रित करना बेहतर होगा और उन्हें अब से ज्यादा ध्यान व्हाइट-बॉल क्रिकेट पर देना चाहिए।”
हालांकि, बताया जा रहा है कि तेज गेंदबाज़ इस फैसले से खुश नहीं हैं और अपनी कम उम्र को देखते हुए अधिक टेस्ट क्रिकेट खेलने के इच्छुक हैं।
2018 में टेस्ट पदार्पण करने के बाद शाहीन ने अब तक 34 टेस्ट मैचों में 126 विकेट लिए हैं। लेकिन उन्होंने रेड-बॉल क्रिकेट की तुलना में व्हाइट-बॉल क्रिकेट कहीं अधिक खेला है। वह 77 वनडे और 103 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं।
पिछले कुछ समय से चयनकर्ताओं ने उनके टेस्ट मैचों की संख्या सीमित कर दी है। दिसंबर 2023 के बाद से पाकिस्तान द्वारा खेले गए 16 टेस्ट मैचों में से शाहीन केवल 7 में ही शामिल रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के व्हाइट-बॉल हेड कोच माइक हेसन ने भी शाहीन के वर्कलोड को नियंत्रित करने के इस फैसले का समर्थन किया है।
यह रणनीति पाकिस्तान की हालिया समस्या को ध्यान में रखकर बनाई गई है। टीम के पास ऐसे वास्तविक तेज गेंदबाज़ों की कमी रही है जो लगातार 140 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गेंदबाज़ी कर सकें। इसका असर टेस्ट क्रिकेट में टीम के प्रदर्शन पर भी पड़ा है और घरेलू मैदानों पर धीमी तथा स्पिन-अनुकूल पिचें तैयार करने की नौबत आई है।
इसी वजह से चयनकर्ता घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे उभरते तेज गेंदबाज़ों मोहम्मद अली, मोहम्मद अब्बास और खुर्रम शहज़ाद को अधिक मौके देना चाहते हैं, ताकि पाकिस्तान की तेज गेंदबाज़ी इकाई को भविष्य के लिए मजबूत बनाया जा सके।








