सुनील गावस्कर ने बताया क्यों आधुनिक क्रिकेटरों पर रोल मॉडल बनने का दबाव ज्यादा है!

महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने रविवार को कहा कि हर खिलाड़ी ऊंचाइयों तक पहुंचने के बाद एक आदर्श रोल मॉडल बनने की कोशिश करता है, लेकिन इंसान होने के नाते कभी-कभी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाना स्वाभाविक है।

गावस्कर ने इस साल के इंडियन प्रीमियर लीग में हुई किसी खास घटना का जिक्र किए बिना कहा कि आज सोशल मीडिया के दौर में बातें और घटनाएं पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से लोगों तक पहुंच जाती हैं।

मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए गावस्कर ने कहा, “मैदान पर तनाव के माहौल में कई बार चीजें हो जाती हैं। ऐसा नहीं है कि आप जानबूझकर युवाओं को कुछ गलत सिखाते हैं। कोई भी इंसान अचानक गुस्से में प्रतिक्रिया दे सकता है और यही होता है।”

उन्होंने आगे कहा, “हर खिलाड़ी जब ऊपर पहुंचता है तो वह खुद को सबसे अच्छा रोल मॉडल बनाने की कोशिश करता है। आपको उसी तरह पाला-पोसा जाता है कि आप दूसरों के लिए उदाहरण बनें। लेकिन हम सभी इंसान हैं, इसलिए कभी न कभी हम उस मानक पर खरे नहीं उतर पाते। फर्क सिर्फ इतना है कि आजकल ऐसी बातें तुरंत सार्वजनिक हो जाती हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था।”

गावस्कर ने अपने दौर की एक पुरानी परंपरा का जिक्र करते हुए बताया कि टेस्ट मैच के दौरान दिन का खेल खत्म होने के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी साथ बैठकर समय बिताते थे। उन्होंने इसकी तुलना आईपीएल मैचों के बाद खिलाड़ियों के आपसी मेलजोल से की।

उन्होंने कहा, “हमारे खेलने के समय एक परंपरा थी। जिस टीम की उस दिन बल्लेबाजी होती थी, वह दूसरी टीम के ड्रेसिंग रूम में ड्रिंक्स का एक केस लेकर जाती थी।”

उन्होंने आगे कहा, “दिन का खेल खत्म होने के बाद करीब 20 मिनट तक सभी खिलाड़ी शांत होते थे। फिर दिनभर के खेल पर चर्चा होती थी। आपकी टीम के 16 खिलाड़ियों में से लगभग 10-12 खिलाड़ी विपक्षी टीम के ड्रेसिंग रूम में जाकर साथ बैठते थे।”

गावस्कर ने बताया कि बातचीत सिर्फ मैच तक सीमित नहीं रहती थी।

उन्होंने कहा, “बातचीत क्रिकेट के अलावा भी होती थी। अगर आप किसी दौरे पर गए हैं तो आप उनसे पूछते थे कि कौन-सी जगह घूमने लायक है, कहां अच्छा खाना मिलता है या कौन-सी फिल्म देखनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “आज आईपीएल में भी आप देखते हैं कि मैच खत्म होने के बाद दोनों टीमें एक-दूसरे से मिलती हैं और बातचीत करती हैं। मुझे लगता है कि मैच के बाद हाथ मिलाना और साथ समय बिताना अब नई परंपरा बन गई है।”